यह ख़बर 17 मई, 2014 को प्रकाशित हुई थी

अरुण जेटली ने अमृतसर से हार की निराशा को किया एक तरफ

अरुण जेटली ने अमृतसर से हार की निराशा को किया एक तरफ

अरुण जेटली की फाइल तस्वीर

नई दिल्ली:

बीजेपी नेता अरुण जेटली ने अमृतसर में अपनी हार से यह कहकर उबरने का प्रयास किया कि यह लोकसभा चुनावों में बीजेपी की अभूतपूर्व जीत के बीच समुद्र में एक बूंद की तरह है। उनकी भविष्य की योजना के बारे में पूछे जाने पर जेटली ने कहा कि पार्टी उनके लिए जो ठीक समझेगी, वह वही भूमिका निभाएंगे।

जेटली बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के काफी करीब समझे जाते हैं। जेटली ने कहा, मेरी कोई प्राथमिकता नहीं है। अगर मुझसे सांगठनिक कार्य करने को कहा गया, तो मैं बहुत खुश होऊंगा।

यह पूछे जाने पर कि क्या वह कह रहे हैं कि वह मोदी मंत्रिमंडल का हिस्सा नहीं होंगे, उन्होंने कहा, वह कोई सुझाव नहीं दे रहे हैं। उन्होंने कहा, कोई भी अभी उस क्षण की नहीं सोच रहा है। पार्टी पूरी स्थिति को समग्रता से देखेगी।

जेटली ने पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह से अपनी हार के लिए स्थानीय कारकों को जिम्मेदार बताया। उन्होंने कहा, यह चुनौतीपूर्ण सीट थी, यह हमें हमेशा से पता था। ऐसा लगता है कि कुछ स्थानीय कारक हैं, जो प्रतिकूल प्रभाव पैदा कर रहे हैं...कुछ स्थानीय कारक थे, लेकिन हमने सोचा था कि हम उनको पार कर जाएंगे।

जेटली ने कहा, जब आप नहीं जीतते हैं, तब हमेशा ही निराशा होती है। मैं बीजेपी की जीत से इतना खुश हूं कि मेरी अपनी जीत मुझे समुद्र में एक बूंद की तरह लग रही है। इसलिए इससे वास्तव में कोई फर्क नहीं पड़ता। उन्होंने कहा कि उन्होंने अमरिंदर सिंह को उनकी निर्णायक जीत पर बधाई दी है और उनके बीच हुई तीखी नोक झोंक को यह कहकर कम करने का प्रयास किया कि इनके बिना चुनाव प्रचार उबाऊ हो जाता है। अमरिंदर सिंह ने जेटली को एक लाख से अधिक मतों से हराया।

उन्होंने सुषमा स्वराज के अप्रसन्न होने के बारे में आई खबरों का खंडन करते हुए कहा कि मीडिया उनके प्रति कठोर रहा। सुषमा विदिशा सीट से विजयी हुई हैं।

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