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गोपीनाथ मुंडे की पुत्री ने रचा इतिहास, करीब सात लाख वोटों से जीती

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गोपीनाथ मुंडे की पुत्री ने रचा इतिहास, करीब सात लाख वोटों से जीती
नई दिल्ली:

महाराष्ट्र में बीड़ लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में दिवंगत भाजपा नेता गोपीनाथ मुंडे की छोटी बेटी प्रीतम मुंडे ने देश में अब तक के सबसे बड़े, 6.96 लाख वोटों के, अंतर से चुनाव जीतकर इतिहास रच डाला है। इससे पहले, वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के अनिल बसु ने 5.92 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज करके रिकॉर्ड बनाया था, जिसे अब प्रीतम मुंडे तोड़ने में कामयाब रहीं।

इस साल के शुरू में हुए लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी पांच लाख 70 हजार से अधिक मतों से गुजरात की वड़ोदरा सीट पर जीत दर्ज की थी और वह बसु का रिकॉर्ड तोड़ने से करीब 22 हजार मतों से वंचित रह गए थे, लेकिन अब उनकी ही पार्टी की टिकट पर प्रीतम मुंडे ने यह रिकार्ड तोड़ डाला है।

इसी वर्ष जून में नई दिल्ली में एक सड़क दुर्घटना में केंद्रीय मंत्री गोपीनाथ मुंडे के निधन के कारण बीड़ सीट पर उपचुनाव कराना पड़ा, जिसका प्रतिनिधित्व मुंडे कर रहे थे। इस सीट पर महाराष्ट्र तथा हरियाणा विधानसभाओं के साथ-साथ 15 अक्टूबर को उपचुनाव कराया गया था। मुंडे की छोटी बेटी और भाजपा उम्मीदवार प्रीतम मुंडे ने इस सीट पर अपने निकटमत प्रतिद्वन्द्वी और कांग्रेस उम्मीदवार अशोकराव शंकरराव पाटिल को 6.96 मतों से पराजित किया। प्रीतम को कुल 9,22,416 वोट प्राप्त हुए, वहीं पाटिल को 2,26,095 वोट प्राप्त हुए।

देश में लोकसभा चुनाव के इतिहास में अब तक सबसे अधिक अंतर (5.92 लाख वोट) से चुनाव जीतने का रिकॉर्ड माकपा के अनिल बसु के नाम था, जो अब पंकजा के नाम है। दूसरी ओर, सबसे कम अंतर (9-9 वोट) से जीतने का रिकॉर्ड कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ने वाले कोनाथला रामकृष्ण और भाजपा के सोम मरांडी के नाम है।

भारत के चुनाव आयोग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2004 के लोकसभा चुनाव में माकपा के अनिल बसु ने पश्चिम बंगाल के आरामबाग से चुनाव लड़ा था और 5,92,502 मतों से जीत दर्ज की थी।

उधर, गोपीनाथ मुंडे की बड़ी पुत्री पंकजा मुंडे ने भी परली विधानसभा सीट बरकरार रखी। पंकजा ने अपने चचेरे भाई एवं एनसीपी प्रत्याशी धनंजय मुंडे को 25,895 मतों से हराया। पंकजा को 96,904 तथा धनंजय को 71,009 वोट मिले। मुंडे बहनों के लिए स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एवं भाजपा अध्यक्ष अमित शाह सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार किया था। नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव प्रचार की शुरुआत ही बीड़ से की थी और कहा था कि यदि गोपीनाथ मुंडे जीवित होते तो उन्हें वोट के लिए प्रचार करने की जरूरत ही नहीं पड़ती। शिवसेना ने जहां दोनों मुंडे बहनों के विरुद्ध अपना कोई प्रत्याशी ही नहीं उतारा था, वहीं एनसीपी ने मुंडे की मृत्य के बाद शरद पवार की घोषणा के अनुरूप प्रीतम के विरुद्ध उम्मीदवार नहीं उतारा।

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