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नेहरू-गांधी परिवार ने अच्छे और बुरे हर वक्त में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया है : कांग्रेस

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नेहरू-गांधी परिवार ने अच्छे और बुरे हर वक्त में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया है : कांग्रेस

राहुल गांधी और सोनिया गांधी की फाइल तस्वीर

नई दिल्ली:

लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की भारी पराजय के मद्देनजर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ बढ़ते हमलों के बीच पार्टी ने अपने इन दोनों नेताओं के पीछे पूरी मजबूती से खड़े रहते हुए कहा कि नेहरू-गांधी परिवार ने अच्छे और बुरे दोनों तरह के समय में उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया है।

पार्टी प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने यहां संवादददाताअें से बातचीत करते हुए पार्टी के अंदर किसी तरह के कलह की बात को खारिज किया और आलोचकों को ऐसा एक या दो असंतुष्ट तत्व करार दिया, जिसने संसदीय चुनावों में बीजेपी को मदद पहुंचाई है।

उन्होंने ऐसे तत्वों पर इसी तरह का एजेंडा चुनाव से पहले भी चलाने का आरोप लगाया और कहा कि राज्य इकाइयां उनके खिलाफ उचित कार्रवाई करेंगी। सुरजेवाला की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब पार्टी की केरल और राजस्थान इकाई ने पार्टी नेता क्रमश: टीएच मुस्तफा और भंवरलाल शर्मा को राहुल गांधी पर हमला बोलने के लिए निलंबित कर दिया है। इन दोनों नेताओं ने राहुल गांधी को लेकर काफी प्रतिकूल टिप्पणियां की थीं।

कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व के खिलाफ किसी तरह का मोहभंग होने या अनादर का कोई प्रश्न नहीं उठता है। उन्होंने कहा कि सोनिया गांधी और राहुल गांधी दोनों ने कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी की पराजय के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की थी।

उन्होंने कहा कि नेहरू-गांधी परिवार ने अच्छे और बुरे दोनों तरह के समय में पार्टी को देखा है। उन्होंने प्रतिकूल और जीत के दोनों तरह के समय में पार्टी को उत्कृष्ट नेतृत्व प्रदान किया है। सुरजेवाला ने यह भी कहा कि सोनिया और राहुल के नेतृत्व के तहत पार्टी राष्ट्र निर्माण की अपनी भूमिका जारी रखेगी और एक बार फिर जनता की आवाज बनेगी। कांग्रेस पार्टी का पूरा तबका सोनिया और राहुल के नेतृत्व को सम्मान देता है।

सुरजेवाला ने सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखने वाले पार्टी के नेताओं को भी आगाह किया और उन्हें सोनिया की वह टिप्पणी याद दिलाई, जिसमें कांग्रेस अध्यक्ष ने साफ तौर पर कहा था कि पार्टी नेताओं को सार्वजनिक बयानबाजी नहीं करनी चाहिए।

कांग्रेस प्रवक्ता ने चुनाव के समय दिल्ली के जामा मस्जिद के शाही इमाम की सोनिया गांधी के साथ हुई मुलाकात को लेकर उठे विवाद को भी कोई तवज्जो नहीं दिया और कहा कि विभिन्न धार्मिक समूहों के नेता तथा अन्य लोग कांग्रेस अध्यक्ष से मिलते रहते हैं और इसका यह मतलब नहीं कि कांग्रेस अध्यक्ष या पार्टी उनसे मिलने वाले हर व्यक्ति के विचारों से सहमत हों।

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