अक्षय तृतीया 9 मई को, लेकिन इस साल उतना शुभ नहीं है यह दिन, जानिए इस पर्व से जुड़ी मान्यताएं

अक्षय तृतीया 9 मई को, लेकिन इस साल उतना शुभ नहीं है यह दिन, जानिए इस पर्व से जुड़ी मान्यताएं

फाइल फोटो

हिन्दू पंचांग के अनुसार, इस साल अक्षय तृतीया पर्व 9 मई को पड़ रही है। लेकिन पंडितों और ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस वर्ष इस दिन के मुहूर्त उतने शुभदायी नहीं हैं, जितना कि अन्य वर्षों में ये रहा है।

गौरतलब है कि अक्षय तृतीया पर्व वैशाख महीने की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। सनातन वैदिक परंपरा के अनुसार यह तिथि साल के चार सर्वाधिक शुभ दिनों में एक मानी गई है।

क्या है अक्षय तृतीया से जुड़ी मान्यता
'अक्षय' का अर्थ है ‘जो कभी क्षय यानी नष्ट न हो' अर्थात जो शाश्वत यानी हमेशा कायम रहे। इस पर्व को ‘आखा तीज’ के नाम से भी जाना जाता है।

हिन्दू धर्म की प्रचलित मान्यताओं में यह दिन काफी सौभाग्यवर्धक माना गया है। कहते हैं, इस दिन जो भी शुभ काम शुरू किया जाता है, उसमें सफलता प्राप्त होती है। यह भी मान्यता है कि इस दिन खरीदे गए सोना और आभूषण कभी समाप्त नहीं होते हैं क्योंकि स्वयं भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी उसकी रक्षा करते हैं।

'सर्वसिद्धि मुहूर्त दिवस' भी कहते हैं इसे
इस दिन को 'सर्वसिद्धि मुहूर्त दिवस' भी कहा गया है। यही कारण है कि इस दिन कोई भी शुभ काम की शुरुआत करने के लिये पंचांग देखने की ज़रूरत नहीं पड़ती है।

ऐसी मान्यता है कि इस दिन मनुष्य यदि अपने द्वारा किए गए जाने-अनजाने अपराधों के लिए सच्चे मन से ईश्वर से क्षमा मांगता है, तो भगवान उसके अपराधों को माफ़ कर देते हैं और सदगुण प्रदान करते हैं।

अक्षय तृतीया से जुड़ी पौराणिक मान्यताएं
प्रायः सभी पुराणों में उल्लिखित है कि वैशाख तृतीया की तिथि को त्रेता युग की शुरुआत हुई थी। भगवान विष्णु के स्वरुप नर और नारायण ने भी इसी दिन अवतार लिया था।

धर्म की स्थापना के लिए भगवान परशुराम जी का अवतरण भी इसी दिन हुआ था। उल्लेखनीय है कि प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर के कपाट भी इसी तिथि खोले जाते हैं और वृन्दावन स्थित बांके बिहारी के मन्दिर में स्थापति ठाकुरजी के विग्रह के श्रीचरण के दर्शन भी इसी दिन होते हैं।

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इस साल नहीं हो पाएंगी इस दिन शादियां...
पंडितों के अनुसार अक्षय तृतीया को शादी के लिए 'अबूझ मुहूर्त' मानने वाले श्रद्धालुओं को इस बार निराशा हो सकती है, क्योंकि इस साल 9 मई को पड़ने वाली अक्षय तृतीया के अवसर पर विवाह का मुहूर्त नहीं है।

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ज्योतिषियों के अनुसार, ऐसा शुक्र ग्रह के अस्त होने के कारण हो रहा है। ऐसा 100 वर्षों में पहली बार हुआ है। लिहाजा ऐसे में 100 साल बाद अक्षय तृतीय पर ऐसी घड़ी आई है कि घरों में शहनाई नहीं बज सकेगी।