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अमरनाथ यात्रा: अनुच्‍छेद 35-ए के समर्थन में हड़ताल, श्रद्धालु नहीं कर सके बाबा बर्फानी के दर्शन

अलगाववादियों की ओर से प्रायोजित हड़ताल के मद्देनजर एहतियातन सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी जम्मू से अमरनाथ यात्रा स्थगित रही.

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अमरनाथ यात्रा: अनुच्‍छेद 35-ए के समर्थन में हड़ताल, श्रद्धालु नहीं कर सके बाबा बर्फानी के दर्शन

बाबा बर्फानी

खास बातें

  1. घाटी में हड़ताल के चलते अमरनाथ यात्रा दूसरे दिन भी स्‍थगित रही
  2. अनुच्‍छेद 35-ए के समर्थन में हड़ताल चल रही है
  3. इस हड़ताल को अलगाववादियों ने प्रायोजित किया है
जम्‍मू: अनुच्छेद 35-ए की वैधता को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दिए जाने के खिलाफ कश्‍मीर घाटी में अलगाववादियों की ओर से प्रायोजित हड़ताल के मद्देनजर एहतियातन सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी जम्मू से अमरनाथ यात्रा स्थगित रही. पुलिस का कहना है कि सुरक्षा उपाय के तहत यात्रा लगातार दूसरे दिन भी स्थगित रही.

अनुच्छेद 35-ए की वैधता को कानूनी चुनौती के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों का बंद

पुलिस के मुताबिक हड़ताल को देखते हुए अधिकारियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग पर जम्मू से श्रीनगर के लिये यातायात स्थगित कर दिया है. उन्होंने बताया कि चेनाब घाटी के रामबन, डोडा एवं किश्तवाड़ जिलों से अनुच्छेद 35-ए के समर्थन में आंशिक हड़ताल और शांतिपूर्ण रैलियों की रिपोर्ट मिली.

विभिन्न धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों ने संवैधानिक प्रावधान की रक्षा के लिये दो दिवसीय हड़ताल का आह्वान किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने यह कहकर अनुच्छेद 35-ए की संवैधानित वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई स्थगित कर दी कि पीठ के तीन सदस्यों में से एक न्यायाधीश मौजूद नहीं हैं. गौरतलब है कि यह अनुच्छेद जम्मू-कश्मीर के लोगों को विशेष अधिकार देता है.

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि अमरनाथ यात्रा के 39वें दिन यानी रविवार को 1529 श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा में दर्शन किए और कुल मिलाकर 2 लाख 72 हजार 815 श्रद्धालु अब तक बाबा बर्फानी के दर्शन कर चुके हैं. 

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क्‍या है अनुच्‍छेद 35-ए 
अनुच्छेद 35-ए जम्मू-कश्मीर विधानसभा को लेकर संविधान में प्रावधान करता है कि वह राज्य में स्थाई निवासियों को पारभाषित कर सके. साल 1954 में 14 मई को राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद ने एक आदेश पारित किया था. इस आदेश के जरिए संविधान में एक नया अनुच्छेद 35-ए जोड़ दिया गया. आर्टिकल 370 के तहत यह अधिकार दिया गया है. साल 1956 में जम्मू-कश्मीर का संविधान बना जिसमें स्थायी नागरिकता को परिभाषित किया गया.

जम्मू-कश्मीर के संविधान के मुताबिक, स्थाई नागरिक वह व्यक्ति है जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या फिर उससे पहले के 10 सालों से राज्य में रह रहा हो, और उसने वहां संपत्ति हासिल की हो. 
  Video: अनुच्छेद 35-ए को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई टली


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