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Buddha Purnima 2018: क्यों मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा? क्या है 'विशेष स्नान' का महत्व

आज बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) है. बुद्ध भगवान बौद्ध धर्म के संस्थापक थे. बौध धर्म को मानने वाले भगवान बुद्ध के उपदेशों का पालन करते हैं. यह बुद्ध अनुयायियों के लिए काफी बड़ा त्यौहार है.

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Buddha Purnima 2018: क्यों मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा? क्या है 'विशेष स्नान' का महत्व

Buddha Purnima (Vesak Day): क्यों मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा

खास बातें

  1. बुद्ध पूर्णिमा है आज
  2. इसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है
  3. आज ही भगवान बुद्ध को बौध यानी ज्ञान प्राप्त हुआ था
नई दिल्ली: बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) वैशाख महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है. इसे वैशाख पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है. इस दिन (Budha Purnima) को भगवान गौतम बुद्ध की जयंती के तौर पर मनाया जाता है. इसी दिन भगवान बुद्ध को बौध यानी ज्ञान प्राप्त हुआ था. यह बुद्ध अनुयायियों के लिए काफी बड़ा त्यौहार है. बुद्ध भगवान बौद्ध धर्म के संस्थापक थे. बौध धर्म को मानने वाले भगवान बुद्ध के उपदेशों का पालन करते हैं. भगवान बुद्ध का पहला उपदेश ‘धर्मचक्र प्रवर्तन’ के नाम से जाना जाता है. यह पहला उपदेश भगवान बुद्ध ने आषाढ़ पूर्णिमा के दिन पांच भिक्षुओं को दिया था.

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बुद्ध पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताएं
माना जाता है कि वैशाख की पूर्णिमा को ही भगवान विष्णु ने अपने नौवें अवतार के रूप में जन्म लिया. इसी दिन को सत्य विनायक पूर्णिमा के तौर पर भी मनाया जाता है, मान्यता है कि आज के दिन भगवान कृष्ण के बचपन के दोस्त सुदामा गरीबी के दिनों में उनसे मिलने पहुंचे थे. इसी दौरान जब दोनों दोस्त साथ बैठे तब कृष्ण ने सुदामा को सत्यविनायक व्रत का विधान बताया था. सुदामा ने इस व्रत को विधिवत किया और उनकी गरीबी नष्ट हो गई. इस दिन धर्मराज की पूजा करने की भी मान्यता है. कहते हैं कि सत्यविनायक व्रत से धर्मराज खुश होते हैं. माना जाता है कि धर्मराज मृत्यु के देवता हैं इसलिए उनके प्रसन्‍न होने से अकाल मौत का डर कम हो जाता है. 

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क्यों किया जाता है विशेष स्नान

हिंदुओं में हर महीने की पूर्णिमा विष्णु भगवान को समर्पित होती है. इस दिन तीर्थ स्थलों में गंगा स्नान का लाभदायक और पाप नाशक माना जाता है. लेकिन वैशाख पूर्णिमा का अपना-अलग ही महत्व है. इसका कारण यह बताया जाता है कि इस माह होने वाली पूर्णिमा को सूर्य अपनी उच्च राशि मेष में और चांद भी अपनी उच्च राशि तुला में होता है. कहते हैं कि बुद्ध पूर्णिमा के दिन लिया स्नान कई जन्मों के पापों का नाश करता है.

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