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Devuthani Ekadashi 2018: देवउठनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, कथा और महत्व

Dev Uthani Ekadashi 2018: देवउठनी एकादशी के दिन भगवान विष्‍णु शालीग्राम रूप में तुलसी से विवाह करते हैं. देवउठनी एकादशी से ही सारे मांगलिक कार्य जैसे कि विवाह, नामकरण, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश की शुरुआत हो जाती है.

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Devuthani Ekadashi 2018: देवउठनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, कथा और महत्व

Dev Uthani Ekadashi 2018: देवउठनी एकादशी का शुभ मुहूर्त, पूजा-विधि, कथा और महत्व

नई दिल्ली:

Devuthani Ekadashi 2018: देवउठनी एकादशी (Dev Uthani Ekadashi) , देवोत्थान एकादशी (Devutthana Ekadashi) और तुलसी विवाह (Tulsi Vivah) का हिन्‍दू धर्म में विशेष महत्‍व है. ऐसी मान्‍यता है कि सृष्टि के पालनहार श्री हरि विष्‍णु चार महीने तक सोने के बाद दवउठनी एकादशी के दिन जागते हैं. इसी दिन भगवान विष्‍णु शालीग्राम रूप में तुलसी से विवाह करते हैं. देवउठनी एकादशी से ही सारे मांगलिक कार्य जैसे कि विवाह, नामकरण, मुंडन, जनेऊ और गृह प्रवेश की शुरुआत हो जाती है. 

देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह कब है? (When is Devuthani Ekadashi or Tusli Vivah)
हिन्‍दू कैलेंडर के अनुसार देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह कार्तिक माह की शुक्‍ल पक्ष एकादशी को मनाया जाता है. अंग्रेजी कैलेंडर के मुताबिक यह त्‍योहार हर साल नवंबर में आता है. इस बार देवउठनी एकादशी या तुलसी विवाह 19 नवंबर को है. 

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देवउठनी एकादशी का महत्‍व (Dev Uthani Ekadashi Importance)
हिंदू मान्यता के अनुसार सभी शुभ कामों की शुरुआत देवउठनी एकादशी से की जाती है. यानी रूके हुए शुभ कार्य जैसे शादी और पूजा को आरंभ किया जाता है. माना जाता है कि देवउठनी के दिन ही भगवान विष्णु जागते हैं. जागने के बाद सबसे पहले उन्हें तुलसी खिलाई जाती है. मान्यता है कि देवउठनी एकादशी के दिन विष्णु जी की व्रत कथा सुनने से 100 गायों को दान के बराबर पुण्य मिलता है. इस दिन तुलसी विवाह भी किया जाता है. वहीं, इस दिन व्रत रखना भी शुभ माना जाता है.

देवउठनी एकादशी पूजा विधि (Dev Uthani Puja Vidhi)
1. देवुत्थान एकादशी के दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए.
2. नहाने के बाद सूर्योदय होते ही भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का संकल्प लें.
3. भगवान विष्णु को बेल पत्र, शमी पत्र और तुलसी चढ़ाएं.
4. पूरे दिन भूखे रहने के बाद भगवान विष्णु की पूजा करके व्रत खोलना चाहिए.
5. मान्यता है कि देवउठनी के दिन सोना नहीं चाहिए, इसीलिए इस रात लोग सोते नहीं हैं. बल्कि भजन-कीर्तन कर भगवान विष्णु का नाम लेते हैं.

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देवउठनी एकादशी तिथि आरंभ और अंत (Dev Uthani Date and Time)
एकादशी तिथि का आरंभ - 18 नवंबर दोपहर 01:33 बजे से.
एकादशी तिथि की समाप्ति - 19 नवंबर दोपहर 02: 29 बजे तक.

देवउठनी एकादशी की कथा ((Dev Uthani Katha)
पौराणिक कथाओं के अनुसार, एक बार माता लक्ष्मी ने भगवान विष्णु से कहा, हे नाथ! आप समय से नींद नहीं लेते, दिन-रात जागते हैं और फिर अचानक लाखों वर्षों तक सो जाते हैं. आप नियम से प्रतिवर्ष निद्रा लिया करें. मां लक्ष्मी ने आगे कहा आपके ऐसा करने से मुझे भी कुछ विश्राम करने का समय मिल जाएगा. इस बात को सुन विष्णु जी मुस्कुराए और बोले, देवी तुमने ठीक कहा. मेरे जागने से तुम्हे ही नहीं बल्कि सभी देवों को कष्ट होता है. मेरी सेवा की वजह से तुम्हें कभी भी आराम नहीं मिलता. इसीलिए मैं अब प्रति वर्ष नियम से चार महीनों के लिए शयन करूंगा. ऐसे तुम्हें और सभी देवगणों को अवकाश मिलेगा. इसी शयन के बाद सभी शुभ कार्यों का आरंभ होगा.

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इसी कथा को अपनाते हुए माना जाता है कि देवउठनी एकादशी के दिन ही भगवान विष्णु चार महीने की नींद से जागते हैं. इसी दिन के बाद से सभी शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है.

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