अपने गांव की जमीन पर बाबरी मस्जिद बनने पर खुश हैं धन्नीपुर के लोग, बोले- "शुरू हो जाएंगे अच्‍छे दिन"

धन्नीपुर गांव के प्रधान राकेश यादव ने कहा, "मस्जिद में दुनियाभर के लोग आएंगे और इससे हमारा गांव प्रसिद्ध हो जाएगा. केवल मुस्लिम ही नहीं, हिन्‍दू लोग भी मस्जिद का स्वागत करने और इसके निर्माण में सहायता देने को तैयार हैं."

अपने गांव की जमीन पर बाबरी मस्जिद बनने पर खुश हैं धन्नीपुर के लोग, बोले-

अयोध्‍या के घाट का नजारा

धन्नीपुर के निवासियों ने मस्जिद निर्माण के लिए क्षेत्र में स्थान आवंटित करने पर प्रसन्नता जाहिर की है और उम्मीद जताई है कि मस्जिद बनने पर उनका गांव दुनियाभर में प्रसिद्ध हो जाएगा. उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा के अनुसार राज्य सरकार ने लखनऊ राजमार्ग पर अयोध्या में सोहवाल तहसील के धन्नीपुर गांव में जमीन का आवंटन पत्र सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया है. भूमि का यह टुकड़ा जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर है.

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धन्नीपुर गांव के प्रधान राकेश यादव ने कहा, "मस्जिद में दुनियाभर के लोग आएंगे और इससे हमारा गांव प्रसिद्ध हो जाएगा. केवल मुस्लिम ही नहीं, हिन्‍दू लोग भी मस्जिद का स्वागत करने और इसके निर्माण में सहायता देने को तैयार हैं."

अयोध्या से बीजेपी विधायक वेद प्रकाश गुप्ता ने कहा, "धन्नीपुर में मस्जिद निर्माण का मैं स्वागत करता हूं. मैं जल्द ही वहां जाऊंगा और मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से मुलाकात करुंगा. मस्जिद के निर्माण में मैं अपनी सेवा और सहायता दूंगा."

स्थानीय व्यापारी हाजी सलीम ने कहा, "राम मंदिर निर्माण के बाद जिस तरह दुनियाभर के हिन्‍दू अनुयायी अयोध्या आएंगे, उसी तरह दुनियाभर के मुस्लिम अनुयायी मस्जिद में नमाज अदा करने धन्नीपुर आएंगे. इससे गांव का विकास होगा."
एक अन्य निवासी आरती देवी ने कहा कि मस्जिद से गांव को नई पहचान मिलेगी और इससे गांव के अच्छे दिन शुरू हो जाएंगे.

उधर, राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले के मुस्लिम पक्षकारों ने तोड़ी जा चुकी बाबरी मस्जिद के बदले मस्जिद बनाने के लिए दी गई जमीन की लोकेशन को लेकर नाखुशी जताई है. उनका कहना है कि जमीन नगर केंद्र से बहुत दूर है.
उत्तर प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बुधवार को पत्रकारों को बताया था कि राज्य सरकार ने लखनऊ राजमार्ग पर अयोध्या में सोहावाल तहसील के धन्नीपुर गांव में जमीन का आवंटन पत्र सुन्नी वक्फ बोर्ड को दे दिया है. भूमि का यह टुकड़ा जिला मुख्यालय से 18 किलोमीटर दूर है.

मामले के पक्षकार मोहम्मद उमर ने कहा कि जमीन का स्थान प्रमुख जगह नहीं है. उनके मुताबिक, "सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अयोध्या में किसी भी प्रमुख स्थान पर जमीन आवंटित की जानी चाहिए, लेकिन आवंटित भूमि गांव में है और सड़क से 25 किलोमीटर दूर है, इसलिए यह प्रमुख स्थान नहीं है."

मुकदमे के दूसरे पक्षकार हसबुल्लाह बादशाह खान ने कहा, "इस्माइल फारूकी के मामले में 1994 में सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट उल्लेख किया था कि मस्जिद और मंदिर 67 एकड़ की सीमा के अंदर होगी. 2019 के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक, मस्जिद के लिए जमीन अयोध्या में एक अहम स्थान पर दी जाएगी. रौहानी थाना क्षेत्र और सोहावाल तहसील में पहचानी गई जमीन तो अयोध्या तक में नहीं है."

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य और वकील जफरयाब जिलानी ने कहा कि शहर का नाम बदलने और उसकी नगरपालिका की सीमा का विस्तार करने का मतलब यह नहीं है कि जिस जमीन की पेशकश की गई है, वह अयोध्या में ही है.

उन्होंने कहा, "उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले साल दिवाली के दौरान फैज़ाबाद जिले का नाम बदल कर अयोध्या कर दिया था. मुकदमे से संबंधित सभी दस्तावेज़ों में अयोध्या एक छोटा शहर है, फैज़ाबाद का शहर है. अब सरकार द्वारा बनाए गए नए जिले में इस अयोध्या की बराबरी नहीं की जा सकती."

उन्होंने कहा कि जमीन सुन्नी वक्फ बोर्ड को दी गई है. ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत मुस्लिम संगठनों ने बाबरी मस्जिद के बदले में दूसरी जगह जमीन स्वीकार करने की निंदा की है.

गौरतलब है कि एक सदी से भी पुराने बाबरी मस्जिद-राम जन्म भूमि मामले का सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल नौ नवंबर को निपटारा कर दिया था और विवादित भूमि राम मंदिर के लिए रामलला विराजमान को दे दी थी, जबकि सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को कहीं और पांच एकड़ जमीन देने का निर्देश दिया था.

 
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