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कुंभ मेला 2019 में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, 18 करोड़ में बिछा डिजिटल वायरलेस सिस्टम का जाल

विभाग के सूत्रों ने बताया कि आधुनिक तकनीक से लैस डिजिटल वायरलेस सिस्टम से आसानी से एक दूसरे को संदेश भी भेजा जा सकेगा. 

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कुंभ मेला 2019 में सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम, 18 करोड़ में बिछा डिजिटल वायरलेस सिस्टम का जाल

डिजिटल वायरलेस सिस्टम से लैस होगा कुंभ मेला परिसर

नई दिल्ली: कुंभ मेले की तैयारियां ज़ोरों पर चल रही हैं. भाजपा सरकार इस बार कुंभ मेले पर 4 हज़ार करोड़ रुपये खर्च करने की बात कह रही है. वहीं, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर हर विभाग अपनी तरफ से बेहतर करने के प्रयास में जुटे हुए हैं. इसी क्रम में राज्य का टेलीकॉम विभाग भी सक्रिय हो गया है. अधिकारियों का दावा है कि कुंभ के दौरान पूरा क्षेत्र डिजिटल वायरलेस सिस्टम से लैस होगा. इसके लिए जीपीएस तकनीक से लैस 2,500 डिजिटल वायरलेस सेट खरीदे जा चुके हैं. 

टेलीकॉम विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, कुंभ मेला 2019 को सकुशल निपटाने के लिए सुरक्षाकर्मियों के बीच सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए उप्र पुलिस का टेलीकॉम विभाग 18 करोड़ रुपये की लागत से डिजिटल वायरलेस सिस्टम का जाल बिछाएगा. 

विभाग के सूत्रों ने बताया कि आधुनिक तकनीक से लैस डिजिटल वायरलेस सिस्टम से आसानी से एक दूसरे को संदेश भी भेजा जा सकेगा. 

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टेलीकॉम विभाग के महानिदेशक पी के तिवारी के मुताबिक, "कुंभ मेला स्थल पर करीब 40 थाने और 70 से ज्यादा पुलिस चौकियां स्थापित की जाएंगी. सभी थानों एवं चौकियों को वायरलेस सेट दिए जाएंगे. इसके अतिरिक्त 500 हैंड हेल्ड वायरलेस सेट भी बांटे जाएंगे."

उन्होंने बताया कि रिपीटर के जरिए इन सेट की रेंज 17 से 18 किलोमीटर तक करने की व्यवस्था की गई है ताकि मेला क्षेत्र में संचार व्यवस्था में किसी तरह की रुकावट न आए.

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विभाग के अधिकारियों के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के क्षेत्र गोरखपुर में सबसे पहले 12 जिलों को डिजिटल वायरलेस सेट उपलब्ध कराया गया है. इसके अतिरिक्त मेला स्थल के लिए 500 न्यूमैटिक मोस्ट खरीदे गए हैं. इनकी खासियत यह है कि वायरलेस सिस्टम के नेटवर्क के लिए इन्हें कहीं भी किसी भी समय खड़ा किया जा सकता है. 

वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार मेला क्षेत्र को 12 ग्रिड में बांटा जाएगा. डिजिलट वायरलेस सेट, ट्रैफिक डायवर्जन सहित अन्य संदेशों के प्रसारण के लिए मेला स्थल पर 24 वेरिएबल मैसेज साइन बोर्ड लगाए जाएंगे. संचार व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए 1200 लोगों की तैनाती की जाएगी और इन कर्मियों को डिजिटल वायरलेस सिस्टम को चलाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा. 


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