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यहां बंदी बनकर रही थीं सीता, आज भी गूंजती है हनुमान चालीसा की आवाज

आज हम आपको बताने जा रहे हैं सीता मंदिर के बारे जो श्रीलंका में है और वो अब पर्यटन स्थल बन चुका है. तमिल श्रद्धालू हिंदी न ही बोल पाते हैं और न ही समझ. फिर भी यहां हनुमान चालीसा की आवाज आती है.

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यहां बंदी बनकर रही थीं सीता, आज भी गूंजती है हनुमान चालीसा की आवाज

श्रीलंका में बना है सीता का मंदिर.

खास बातें

  1. श्रीलंका में बना है सीता मंदिर.
  2. श्रीलंका सरकार ने इसे पर्यटन स्थल बनाया है.
  3. सीता जी के इस एकमात्र मंदिर का निर्माण यद्यपि सन् 1998 में हुआ.
नई दिल्ली: यूं तो भारत व विश्व के प्रत्येक छोटे बड़े देवस्थल में श्रीराम एवं लक्षण जी के साथ सीताजी विराजमान हैं किंतु ऐसा देवस्थल जहां मुख्य देव प्रतिमा के रूप में सीता जी की पूजा अर्चना होती है विश्व में एक ही है. जहां सीता जी ने एक लंबा समय बिताया. आज हम आपको बताने जा रहे हैं सीता मंदिर के बारे जो श्रीलंका में है और वो अब पर्यटन स्थल बन चुका है. तमिल श्रद्धालू हिंदी न ही बोल पाते हैं और न ही समझ. फिर भी यहां हनुमान चालीसा की पढ़ी जाती है.

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यहां बंदी बनकर रहीं थीं सीता
रावण के राज्य श्रीलंका के 'न्यूवार इलिया' नामक पर्वतीय स्थल पर बसे इसी नाम के कस्बे से 5 कि. मी. दूर केन्डी रोड पर इस सीता इलिया अथवा सीता अम्मान मंदिर की स्थापना की गई है. सीता जी के इस एकमात्र मंदिर का निर्माण यद्यपि सन् 1998 में हुआ है. किंतु मान्यताओं एवं किंवदन्तियों की दृष्टि में यह वहीं स्थल है जहां रावण द्वारा सीताजी को बन्दी बनाकर रखा गया था.

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seeta temple

पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण
शांत ग्रामीण क्षेत्र में एक झरने के निकट निर्मित इस मंदिर को गोलाकार छत बहुरंगी पौराणिक चित्रों से समृद्ध है. श्रीलंका सरकार द्वारा पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होने की आशा से इस पूरी योजना को सीता इलिया प्रोजेक्ट का नाम दिया गया है.

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देखें PHOTOS-

seeta temple
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श्वास की धरोहर है ये मंदिर
सीता अम्मान टेम्पल ट्रस्ट द्वारा व्यवस्थित यह स्थल बहुत कम समय में इतना लोकप्रिय हो चुका है कि श्रीलंका के पर्यटन उद्योग को इसमें असीम संभावनाएं नजर आने लगी हैं. इसी कारण निकट ही हनुमान जी का मंदिर भी बनवाया गया है. पौराणिक मान्यताओं की छाया में श्रद्धा एवं विश्वास की धरोहर स्वयं में समेटे इस मंदिर की एक विशेषता कि यह विश्व का सीतामाता का एकमात्र मंदिर है इसे महत्वपूर्ण देव स्थल मानने के लिए काफी है.




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