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इस मानवकृत समस्या से संकटमोचक हनुमान भी हैं परेशान, हर दूसरे दिन बदलना पड़ता है वस्त्र

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इस मानवकृत समस्या से संकटमोचक हनुमान भी हैं परेशान, हर दूसरे दिन बदलना पड़ता है वस्त्र

कहते हैं कि भगवान, विशेष कर संकटमोचक कहे जाने वाले हनुमानजी के लिए कुछ भी असंभव नहीं है, लेकिन मनुष्यों द्वारा उत्पन्न की गई इस समस्‍या के सामने शायद उनका भी वश नहीं चल पा रहा है।
 
बढ़ते प्रदूषण से परेशान हैं हनुमानजी...
यह समस्‍या है बढ़ते प्रदूषण की, जिसके आगे लंका में डंका बजाने वाले बजरंगबली हनुमानजी भी बेबस प्रतीत हो रहे हैं। यहां बात हो रही है मध्य प्रदेश की सांस्कृतिक नगरी कहे जाने वाले शहर इंदौर में स्थित हनुमान मंदिरों की।

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हर दूसरे-तीसरे दिन बदलना पड़ता है परिधान...
ये हनुमान मंदिर इस शहर के पीलिया खाल इलाके में स्थित हैं। यहां स्थापित प्रतिमाएं लगातार बढ़ते प्रदूषण की वजह से काली पड़ती जा रही हैं। इस कारण से मंदिर के पुजारियों को हर दूसरे-तीसरे दिन उनका वस्त्र (परिधान) बदलना पड़ रहा है।
 
प्रदूषण की मुख्य वजह है गन्दा नाला...
हनुमानजी के इन मूर्तियों के काला पड़ने पर यहां पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि यह इस मंदिर के पास से गुजरते गंदे नाले किनारे जमा गंदगी से उठने वाली गैसों के कारण विशेष रूप से हो रहा हैं।

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कई मंदिर झेल रहे हैं प्रदूषण की मार...
उल्लेखनीय है वर्तमान में इंदौर के पीलिया खाल क्षेत्र में पंचमुखी हनुमानजी का मंदिर, कसेरा बगीचा स्थित हनुमान मंदिर, हरि पर्वत हनुमानजी मंदिर, दास बगीची हनुमान मंदिर सहित कई अन्य मंदिर इस प्रदूषण की मार झेल रहे हैं।
 
कभी नाला थी निर्मल नदी...
यहां के स्थानीय लोग बताते हैं कि कभी यह नाला के प्रदूषणमुक्त छोटी धारा वाली निर्मल नदी थी। लेकिन समय के साथ यहां आबादी बढती गई। लोगों ने कचरा फ़ेंक कर इस नदी को नाले में बदल दिया। साथ ही अतिक्रमण और अवैध कब्जे के चलते स्थिति और भी खराब हो गई।


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नाले में ड्रेनेज होता है केमिकलयुक्त गंदा पानी...
लोगों के अनुसार इस नाले में केमिकलयुक्त गंदा पानी ड्रेनेज किया जाता है, जिससे उठने वाली गैसों को हनुमानजी पर लेपित सिन्दूर और तेल अवशोषित कर लेती है, इसलिए मूर्तियां शीघ्र काली पड़ रही हैं। केवल यही नहीं, नाले में बनने वाली गैसों से मंदिरों में चांदी के वर्क और प्रतिमाओं के चांदी के मुकुट भी काले पड़ रहे हैं।



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