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Dussehra 2017: इस दशहरे करें खुद के अंदर छिपी बुराई का भी अंत, इनके लिए है दशहरा एक सबक

दशहरा 2017 के मौके पर आप समाज की बुराई का दहन करने की जगह इस दशहरे अपनी अंदर छिपी किसी एक बुराई का अंत करने का प्रण कर सकते हैं.

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Dussehra 2017: इस दशहरे करें खुद के अंदर छिपी बुराई का भी अंत, इनके लिए है दशहरा एक सबक

दशहरा 2017: दशहरे से मिलती है बुरी आदतें छोड़ने की प्रेरणा

हमारे देश में जितने भी त्योहार मनाए जाते हैं उनके पीछे कुछ न कुछ रहस्य या कहानी छिपी होती है. ऐसा ही एक त्योहार दशहरा भी है. जिसे पूरे देश में बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. इस दिन को असत्य पर सत्य की विजय के तौर पर मनाया जाता है. इस दिन भगवान राम ने बुराई के प्रतीक माने जाने वाले रावण का वद्ध किया था. दशहरे को रावण के पुतले को जलाया जाता है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इससे बुराई रूपी रावण का अंत होता है. कई बार देखने को मिलता है कि रावण के साथ-साथ इस त्योहार के दिन कुछ बुरे लोगों या फिर भ्रष्टाचार रूपी रावण का दहन भी किया जाता है. लेकिन इस बार आप समाज की बुराई का दहन करने की जगह इस दशहरे अपनी अंदर छिपी किसी एक बुराई का अंत करने का प्रण कर सकते हैं. हालांकि इसका पुतला बनाकर फूंकने की कोई जरूरत नहीं है. बस अपने दिल और दिमाग से ही आप भीतर छिपी बुराई का अंत कर लेंगे.

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दशहरे से मिलती है बुरी आदतें छोड़ने की प्रेरणा
जैसा आपको पता है दशहरे का पर्व पाप के अंत का जश्न मनाने के लिए ही मनाया जाता है. लेकिन अब आपको यह जानना जरूरी होगा कि आप इस दिन अपनी कौन सी बुराई का अंत कर सकते हैं. कहा जाता है कि दशहरे का पर्व किसी भी मानव के दस तरह के पापों को दूर कर सकता है. इनमें मत्सर, अहंकार, आलस्य, काम, क्रोध, लोभ, मोह मद, हिंसा और चोरी जैसी बुराइयां शामिल हैं. तो अगर आपके पास इनमें से एक भी बुराई है तो इस दशहरे रावण के पुतले के साथ उसे भी स्वाहा कर दीजिए. श्रीराम ने 10 दिनों तक रावण से युद्ध किया था, आप भी अपनी इस पुरानी बुराई को छोड़ने के लिए कुछ टाइम ले सकते हैं. 
  अहंकार करने वालों के लिए दशहरा एक सबक
दुनिया में हर दूसरे इंसान को कभी न कभी किसी न किसी बात को लेकर अहंकार जरूर आता है. हालांकि कुछ लोगों में यह अहंकार रूपी रावण कुछ टाइम तक रहता है, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिन्हें अपनी सत्ता, काबलियत, ताकत, धन आदि के आगे पूरी दुनिया बौनी लगने लगती है. ऐसे ही इंसानों के लिए दशहरे का पर्व हर साल एक सबक के तौर पर आता है और सिखाता है कि अहंकार जब रावण जैसे शक्तिशाली और बुद्धिमान व्यक्ति का नहीं टिक पाया तो आप तो एक तुच्छ प्राणी हैं. इसीलिए यह सोचकर जरूर चलिए कि अहंकार एक न एक दिन विनाश का कारण जरूर बनता है. 
 
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