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गंगा सप्तमी से जुड़ी मान्यताएं, कथा और रहस्य...

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गंगा सप्तमी से जुड़ी मान्यताएं, कथा और रहस्य...

Ganga Saptami 2017: गंगा सप्तमी देवी गंगा को समर्पित एक पर्व है.

हिंदू धर्म में नदियों को देवी के रूप में पूजा जाता है. इन्हीं देवियों में एक हैं मां गंगा. गंगा को हिंदुओं ने सबसे पवित्र नदी माना है, जो मानव के हर पाप को धो सकती है. गंगा सप्तमी इन्हीं देवी गंगा को समर्पित एक पर्व है. इस दिन को गंगा पूजन या गंगा जयंती के रूप में भी मनाया जाता है. मान्यता है कि इसी दिन गंगा का पुनर्जन्म हुआ था.

क्या है नाम का रहस्य 
गंगा सप्तमी हिंदू माह वैशाख के शुक्ल पक्ष की सप्तमी को मनाया जाता है. हिंदू धर्म ग्रंथों और हिन्दू मान्यताओं के अनुसार वैशाख मास की सप्तमी को ही गंगा स्वर्ग से उतरकर भगवान शिव की जटाओं में आई थीं. कहते हैं कि स्वीर् से उतरकर शिव की जटाओं में समाने का कारण यह था कि पृथ्वी उनका तेज वेग नहीं सह सकती थी. इसलिए उन्होंने पहले शिव की जटाओं में अपना स्थान बनाया. इसके बाद शिव ने गंगा को धरती पर छोड़ा. इसलिए ही इस दिन को गंगा जयंती या गंगा जन्मोत्सव भी कहा जाता है. 

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पौराणिक कथा 
पौराणिक धर्म ग्रंथों के अनुसार कपिल मुनि के श्राप से सूर्यवंशी राजा सगर के 60 हज़ार पुत्र जल कर भस्म हो गए थे. ऐसे में उनके वंश के उद्धार के लिए राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या की. क्योंकि वे जानते थे कि गंगा के छूने से ही राजा सगर के 60 पुत्रों का उद्धार होगा. भगीरथ की तपस्या से गंगा प्रसन्न तो हो गईं, लेकिन उनका पृथ्वी पर आना अब भी संभव नहीं था. क्योंकि गंगा का वेग धरती सह नहीं पाती. इसके बाद भगीरथ ने शिव की आराधना की थी. 

मोक्षदायिनी गंगा
हिंदू धर्म में गंगा को मोक्षदायिनी माना जाता है. गंगा को मां का दर्जा दिया गया है. कहा जाता है कि मां गंगा में स्नान करने से ही मानव के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं. कई शुभ अवसरों पर गंगा नदी के तट पर मेले और गंगा स्नान बड़े पैमाने पर किया जाता है.


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