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मीरी-पीरी के मालिक सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब का प्रकाशोत्सव आज

क्रांतिकारी योद्धा क‍े रूप में जाने गए गुरु हरगोबिंद सिंह का जन्म का 21 आषाढ़ (वदी 6) संवत 1652 को हुआ. उनका जन्म पंजाब के गुरू की वडाली में हुआ था. गुरु हरगोबिंद सिंह ने 19 मार्च 1644 को कीरतपुर साहिब में चोला छोड़ा था. चलिए एक नजर ड़ालते हैं गुरु हरगोबिंद सिंह के जीवन से जुड़ी बातों पर, जिनसे आप अभी तक अंजान थे. 

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मीरी-पीरी के मालिक सिखों के छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब का प्रकाशोत्सव आज

प्रतीकात्मक चित्र

आज मीरी पीरी के मालिक छठे गुरु श्री गुरु हरगोबिंद साहिब का प्रकाशोत्सव है. इसे देश के विभिन्न भागों में और कश्मीर में प्रकाशोत्सव आज मनाया जा रहा है. कश्मीर में आज के दिन अवकाश दिया गया है. भले ही इसे राज्य सरकार ने आज इसके लिए अवकाश दिया हो, लेकिन जम्मू में गुरुपर्व पांच जुलाई को मनाया जाएगा. क्रांतिकारी योद्धा क‍े रूप में जाने गए गुरु हरगोबिंद सिंह का जन्म का 21 आषाढ़ (वदी 6) संवत 1652 को हुआ. उनका जन्म पंजाब के गुरू की वडाली में हुआ था. गुरु हरगोबिंद सिंह ने 19 मार्च 1644 को कीरतपुर साहिब में चोला छोड़ा था. चलिए एक नजर ड़ालते हैं गुरु हरगोबिंद सिंह के जीवन से जुड़ी बातों पर, जिनसे आप अभी तक अंजान थे. 
  • सिख धर्म के दस गुरुओं में से एक गुरु हरगोबिंद सिंह सिखों के छठे गुरु हैं. 
  • वे पांचवें गुरु अर्जुनदेव सिंह के बेटे थे. गुरु हरगोबिंद सिंह ने सिखों को अस्त्र-शस्त्र की श‍िक्षा लेने के लिए बहुत प्रेरित किया था. 
  • माना जाता है कि गुरु हरगोबिंद सिंह ने ही सिख पंथ को योद्धा चरित्र दिया. 
  • सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह को सिख इतिहास में एक दल-भंजन योद्धा के रूप में जाना जाता है. 
  • गुरु हरगोबिंद सिंह धर्म में कई बदलाव किए और इस धर्म को एक मजबूत धर्म के रूप में पेश किया. 
  • गुरु हरगोबिंद सिंह के पिता सिखों के पांचवें गुरु अर्जन देव और माता गंगा जी थी. 
  • क्रांतिकारी योद्धा और सिखों के छठे गुरु गुरु हरगोबिंद सिंह के जन्मदिन को गुरु हरगोबिंद सिंह जयन्ती के तौर पर मनाया जाता है.
  • गुरु हरगोबिंद सिंह जयन्ती के मौके पर गुरुद्वारों में सहित गुरु ग्रंथ साहिब का पाठ, लंगर किया जाता है. 
  • नानक शाही पंचांग और सामान्य पंचांगों को देखते हुए इस साल गुरु हरगोबिंद सिंह जयन्ती के 10 जून यानी आज मनाई जा रही है. 
  • गुरु हरगोबिंद सिंह ने सिख विद्वान भाई गुरदास की देख-रेख में शिक्षा दीक्षा ग्रहण की. 
  • सिखों के पांचवें गुरु और गुरु हरगोबिंद सिंह के पिता अर्जन देव के बाद गुरु हरगोबिंद सिंह को महज 11 साल की उम्र में गुरुपद सौंपा गया था. 
  • कहते हैं कि गद्दी संभालते ही गुरु हरगोबिंद सिंह ने मीरी और पीरी की दो तलवारें ग्रहण की थीं. एक तलवार धर्म और दूसरी तलवार धर्म की रक्षा के लिए ग्रहण करी थी. 
  • कहते हैं कि मीरी और पीरी की तलवारें उन्हें बाबा बुड्डाजी ने पहनाई थी.


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