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दिवाली को जानो : दिवाली का जिक्र इतिहास में कहां और कैसे-कैसे

यह जरूरी हो जाता है कि हम यह जाने समझें कि आखिर भारत में इस परंपरा का कितना गौरवशाली इतिहास है.

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दिवाली को जानो : दिवाली का जिक्र इतिहास में कहां और कैसे-कैसे
नई दिल्ली: दिवाली पर सुप्रीम कोर्ट ने पटाखों पर रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट की यह रोक दिल्ली और आसपास प्रदूषण के चलते लगाई गई है. वहीं कई लोगों ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के विरोध में अपनी आवाज उठाई है. कई लोग इसे धार्मिक रंग देने की फिराक में भी हैं. वहीं, कोर्ट के फैसले के विरोध के बाद कई जगहों से फैसले के समर्थन की भी आवाजें आई हैं. ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि हम यह जाने समझें कि आखिर भारत में इस परंपरा का कितना गौरवशाली इतिहास है.

दिवाली का मतलब - दीपावली का अगर संधि विच्छेद किया जाए तो दीप + आवली होता है. यहां दीप का मतलब रोशनी और आवली का मतलब पंक्ति या लाइन से है. यानी रोशनी की पंक्ति या रोशनी की कतार.

स्कन्द पुराण में ज़िक्र है - दीपावली का उल्लेख हमारे वेद-पुराणों में भी देखने को मिलता है.7वीं शताब्दी में राजा हर्षवर्धन के नाटक में ज़िक्र दीपोत्सव का उल्लेख है और 10वीं शताब्दी में राजशेखर के काव्यमीमांसा में भी इसका ज़िक्र किया गया है.

मुस्लिम बादशाहों की दिवाली- दीपावली केवल हिन्दुओं का ही त्योहार नहीं है, बल्कि अन्य धर्मों द्वारा भी इसे मनाया जाता रहा है. 14वीं शताब्दी में मोहम्मद बिन तुग़लक दिवाली मनाते थे. मुस्लिम बदशाहों द्वारा दीपावली को धूमधाम से मनाने का उल्लेख है. इनमें सबसे पहले बारी आती है बदशाह अकबर की. 16वीं शताब्दी में अकबर धूम-धाम से दिवाली मनाते थे. इस दिन दिवाली दरबार सजता था और रामायण का पाठ और श्रीराम की अयोध्या वापसी का नाट्य मंचन होता था. 

शाहजहां की दिवाली - अकबर के बाद 17वीं शताब्दी में शाहजहां ने दिवाली की शान और भी बढ़ाई. वे इस मौके पर 56 राज्यों से अलग-अलग मिठाई मंगाकर 56 थाल सजाते थे. 40 फूट के बड़े 'आकाश दीया' रोशन करने की परंपरा थी, इसे सूरजक्रांत कहा जाता था. इस दिन भव्य आतिशबाजी होती थी. इस पर्व को पूरी तरह हिंदू तौर-तरीकों से मनाया जाता था. भोज भी एकदम सात्विक होता था.

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VIDEO: धर्म से ना जोड़ो दिवाली को
औरंगज़ेब की रोक-  मुस्लिमों द्वारा दीपावली मनाने की इस परंपरा पर औरंगजेब ने रोक लगाई. आतिशबाज़ी और दीया जलाने पर औरंगज़ेब ने 1665 में रोक लगा दी थी. लेकिन उनके बाद इस त्योहार उसी पुरानी परंपरा के साथ मनाया जाने लगा.

मोहम्मद शाह की दिवाली - मोहम्द शाह को रोशन अख्तर भी कहते थे. उनका शासन 1719 से 1748 तक रहा. वह संगीत और साहित्य को प्रेमी थे. उन्होंने मोहम्मद शाह रंगीला को नाम से जाना जाता था. उन्होंने दीपावली को त्योहार को और ज्यादा भव्यता दी.


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