दिल्ली हिंसा: लोगों ने पेश की भाईचारे की मिसाल, हिन्‍दुओं ने नहीं जलने दी मस्जिद तो मुस्लिमों ने बचाया मंदिर

उत्तर पूर्वी दिल्‍ली के अशोक नगर में रहने वाले कुछ लोगों ने बताया कि दंगाई इलाके के बाहर के लोग थे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि दंगा करने वालों की उम्र 20 से 25 वर्ष थी.

दिल्ली हिंसा: लोगों ने पेश की भाईचारे की मिसाल, हिन्‍दुओं ने नहीं जलने दी मस्जिद तो मुस्लिमों ने बचाया मंदिर

हिंसा के दौरान मंदिरों पर हमला करने पहुंचे दंगाइयों को मुस्लिमों ने रोक दिया.

नई दिल्ली:

उत्तर पूर्वी दिल्ली (North East Delhi) के कई इलाकों में हिंसा की घटनाओं के बीच भाईचारे और पारस्‍परिक सौहार्द के भी कई वाकए सामने आए. दरअसल, 25 फरवरी को हिंसा के दौरान दिल्ली के अशोक नगर (Ashok Nagar) की एक मस्जिद को जलाने आए लोगों से इसे बचाने के लिए कुछ हिन्‍दू खड़े हो गए. यह मस्जिद आस पास रहने वाले 10 मुस्लिम परिवारों के घरों से सटी हुई थी.

मंगलवार दोपहर को तीन बजे करीब हिंसक भीड़ आई और मुसलमानों के घरों और मस्जिद को आग लगाने की कोशिश करने लगी. इसी बीच भाईचारे की मिसाल पेश करते हुए हिन्‍दुओं ने उन्हें अपने घर में पनाह दी और मस्जिद को भी जलाने नहीं दिया. 

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एनडीटीवी के संवादाता से बात करते हुए यहां रहने वाले कुछ लोगों ने बताया कि दंगाई इलाके के बाहर के लोग थे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि दंगा करने वालों की उम्र 20 से 25 वर्ष थी. हालांकि, हिन्‍दू और मुस्लिम परिवारों ने यहां भाईचारे की मिसाल कायम करते हुए एक दूसरे की रक्षा की और दंगाइयों के नापाक मंसूबों को नाकाम कर दिया. 

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वहीं दिल्ली के चांदबाग में भी कुछ हिन्‍दू और मुस्लिम परिवारों ने भी हिंसा के बीच भाईचारे की मिसाल पेश की. जानकारी के मुताबिक, यह मुस्लिम बहुल इलाका है और यहां कुछ ही हिंदू परिवार रहते हैं. इस इलाके में तीन मंदिर हैं. हिंसा के दौरान यहां मंदिरों पर हमला करने पहुंचे दंगाइयों को मुस्लिमों ने रोक दिया और किसी को भी नुकसान नहीं पंहुचाने दिया. इस दौरान मुस्लिम और हिंदुओं ने भाईचारा बनाए रखा. 

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गौरतलब है कि उत्तर पूर्वी दिल्ली के इलाकों में हुई हिंसा में अब तक 34 लोगों की मौत हो चुकी है.