Radha Ashtami 2019: 6 सितंबर को है राधा अष्‍टमी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्‍व

हिन्‍दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी तिथि को राधा अष्‍टमी (Radha Ashtami) मनाई जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक यह हर साल अगस्‍त या सितंबर महीने में आती है. इस बार राधा अष्‍टमी (Radha Ashtmi) 06 सितंबर को है.

Radha Ashtami 2019: 6 सितंबर को है राधा अष्‍टमी, जानिए शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्‍व

Radha Ashtami 2019 (राधा अष्टमी 2019)

नई दिल्ली:

राधा अष्‍टमी (Radhastami) कई जगहों पर पूरे हर्षोल्‍लास के साथ मनाई जाती है. खासतौर से मथुरा, वृंदावन और बरसाना में तो इस पर्व को कृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी (Krishna Janmashtami) की ही तरह धूमधाम से मनाया जाता है. मान्‍यता है कि इसी दिन राधा रानी का जन्‍म (Radha Birthday) हुआ था. कहते हैं कि राधा के बिना श्रीकृष्‍ण अधूरे हैं. कृष्‍ण के नाम से पहले राधा का नाम लिया जाता है. वेद-पुराणों में राधा को 'कृष्ण वल्लभा' कहकर उनका गुणगान किया गया है. मान्‍यता है कि राधा जी के मंत्र जाप से ही मोक्ष की प्राप्‍ति हो जाती है. राधा को भगवान श्रीकृष्ण के प्राणों की अधिष्ठात्री देवी माना गया है.

राधा अष्‍टमी कब है?
हिन्‍दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्‍ल पक्ष की अष्‍टमी तिथि को राधा अष्‍टमी (Radha Ashtami) मनाई जाती है. ग्रेगोरियन कैलेंडर के मुताबिक यह हर साल अगस्‍त या सितंबर महीने में आती है. इस बार राधा अष्‍टमी (Radha Ashtmi) 06 सितंबर को है.  

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राधा अष्‍टमी की  तिथि और शुभ मुहूर्त
राधा अष्‍टमी की तिथि: 06 सितंबर 2019
अष्‍टमी तिथि प्रारंभ: 05 सितंबर 2019 को रात 08 बजकर 49 मिनट से 
अष्‍टमी तिथि समाप्‍त: 06 सितंबर 2019 को रात 08 बजकर 43 मिनट तक 

राधा अष्‍टमी का महत्‍व 
राधा-कृष्‍ण के भक्‍तों के लिए राधा अष्‍टमी (Radha Ashtmi) का विशेष महत्‍व है. मान्‍यता है कि इस व्रत को करने से धन की कमी नहीं होती और घर में सौभाग्‍य आता है. कहते हैं अगर श्रीकृष्‍ण को प्रसन्‍न करना है तो राधा की आराधना जरूरी है. यही वजह है कि अपने आराध्‍य कृष्‍ण को मनाने के लिए भक्‍त पहले राधा रानी को प्रसन्‍न करते हैं. मान्‍यता है कि राधा अष्‍टमी का व्रत (Radhashtami Fast) करने से सभी पाप नष्‍ट हो जाते हैं.

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कैसे मनाई जाती है राधा अष्‍टमी
राधा अष्‍टमी (Radha Ashtmi 2019) का त्‍योहार पूरे जोश और उमंग के साथ मनाया जाता है. ब्रज और बरसाना में तो राधा अष्‍टमी भी श्रीकृष्‍ण जन्‍माष्‍टमी की ही तरह धूमधाम से मनाई जाती है. इस दिन लोग बरसाना की ऊंची पहाड़ी पर स्थित गहवर वन की परिक्रमा करते हैं. वृन्दावन के राधा बल्लभ मंदिर में राधा अष्‍टमी की छटा देखते ही बनती है. मंदिर में राधा रानी के जन्‍म के बाद उन्‍हें भोग लगाया जाता है. फिर बधाई गायन होता है और सामुहिक आरती के साथ इसका समापन होता है. इसके अलावा दूसरे मंदिरों में भी राधा के जन्‍म की खुशियां मनाई जाती हैं और विशेष आरती का आयोजन किया जाता है. इस दिन लोग व्रत भी रखते हैं. मान्‍यता है कि इस व्रत के प्रताप से श्रीकृष्‍ण प्रसन्‍न होते हैं और भक्‍तों की सभी मनोकामानाएं पूर्ण करते हैं.

राधा अष्‍टमी का व्रत कैसे करें 
- सुबह स्‍नान करने के बाद स्‍वच्‍छ वस्‍त्र धारण करें. 
- अब पूजा घर के मंडप के नीचे बीचोंबीच कलश स्‍थापित करें. 
- कलश पर तांबे का पात्र/बर्तन रखें. 
- अब राधा जी की मूर्ति को पंचामृत (दूध, दही, शहद, तुलसी दल और घी) से स्‍नान कराएं.
- स्‍नान के बाद राधा जी को सुंदर वस्‍त्र और आभूषण पहनाएं.
- अब राधा जी की मूर्ति को कलश पर रखे पात्र पर विराजमान करें. 
- इसके बाद विधिवत्त धूप-दीप से आरती उतारें. 
- अब राधा जी को ऋतु फल, मिठाई और भोग में बनाया प्रसाद अर्पित करें. 
- पूजा के बाद दिन भर उपवास करें. 
- अगले दिन यथाशक्ति सुहागिन महिलाओं और ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा दें.