Raksha Bandhan 2020: क्या आप जानते हैं रक्षा बंधन से जुड़ी ये पौराणिक कथाएं?

Raksha Bandhan 2020: भारत में कई धार्मिक और ऐतिहासिक कारणों की वजह से रक्षा बंधन मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षा बंधन मनाने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं

Raksha Bandhan 2020: क्या आप जानते हैं रक्षा बंधन से जुड़ी ये पौराणिक कथाएं?

Raksha Bandhan 2020: आज मनाया जा रहा है रक्षा बंधन का त्योहार.

नई दिल्ली:

Raksha Bandhan 2020: देशभर में आज यानी कि 3 अगस्त 2020 को राखी (Rakhi 2020) का त्योहार मनाया जा रहा है. दरअसल, यह त्योहार बहन-भाई के रिश्ते का प्रतीक होता है. इस वजह से रक्षा बंधन हिंदू धर्म का एक महत्वपूर्ण त्योहार है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधती है. इसके बदले में भाई बहन को भेंट देता है और सदैव उसकी रक्षा करने का वचन भी देता है. 

दरअसल, हिंदू धर्म में रक्षा बंधन (Raksha Bandhan 2020) के त्योहार से जुड़ी बहुत सी मान्यताएं और पौराणिक कथाएं मौजूद हैं. इन्हीं के आधार पर राखी का त्योहार मनाया जाता है और हिंदू धर्म में इतना अधिक महत्वपूर्ण भी है. हिंदू धर्म में राखी का त्योहार होली और दिवाली की तरह ही मनाया जाता है. ऐसे में अगर आपको इन पौराणिक कथाओं के बारे में नहीं पता है तो कोई बात नहीं क्योंकि हम अपने इस लेख में राखी से जुड़ी कुछ पौराणिक कथाएं आपको बताने वाले हैं. 

राखी से जुड़ी पौराणिक कथाएं:
भारत में कई धार्मिक और ऐतिहासिक कारणों की वजह से रक्षा बंधन मनाया जाता है. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रक्षा बंधन मनाने के पीछे कई कथाएं प्रचलित हैं:

वामन अवतार कथा: असुरों के राजा बलि ने अपने बल और पराक्रम से तीनों लोकों पर अधिकार कर लिया था. राजा बलि के इस आधिपत्य को देख इंद्र देव घबरा गए और भगवान विष्णु के पास मदद के लिए पहुंचे. इसके बाद भगवान विष्णु ने वामन अवतार धारण किया और राजा बलि से भिक्षा मांगने के लिए पहुंच गए. इस पर वामन भगवान ने बलि से तीन पग भूमि मांगी. अपने पहले और दूसरे पग से भगवान ने धरती और आकाश नाप लिया. इसके बाद तीसरा पग रखने के लिए कुछ बचा नहीं तो राजा बलि ने तीसरा पर उनके सिर पर रखने के लिए कहा. 

भगवान वामन ने ऐसा ही किया. इस तरह देवताओं की चिंता खत्म हो गई. साथ ही भगवान, राजा बलि के इस दान से बहुत प्रसन्न हुए. उन्होंने राजा बलि से वरदान मांगने को कहा तो बलि ने उनसे पाताल में बसने का वर मांग लिया. राजा की इच्छा पूरी करने के लिए भगवान विष्णु को पाताल जाना पड़ा. इस वजह से सभी देवतागण और माता लक्ष्मी चिंतित हो गए. अपने पति को वापस लाने के लिए माता लक्ष्मी गरीब स्त्री बनकर राजा बलि के पास पहुंच गईं और उन्हें अपना भाई बनाकर राखी बांध दी. इसके बदले उन्होंने भगवान विष्णु को पाताल लोक से ले जाने का वचन मांग लिया. उस दिन श्रावण मास की पूर्णिमा तिथि थी और माना जाता है कि तभी से रक्षाबंधन मनाया जाने लगा है. 

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भविष्य पुराण की कथा: एक बार देवता और दानवों में 12 सालों तक युद्ध हुआ लेकिन देवता जीत नहीं पाए. इंद्र देव अपनी हार के डर से दुखी होकर देवगुरु बृहस्पति के पास गए. उनके सुझाव पर इंद्र की पत्नी महारानी शची ने श्रावण शुक्ल पूर्णिमा के दिन विधि-विधान के साथ व्रत करके रक्षा सूत्र तैयार किए. इसके बाद उन्होंने इंद्र की दाहिनी कलाई में रक्षा सूत्र बांधा और समस्त देवताओं की दानवों पर विजय हुई. यह रक्षा विधान श्रवण मास की पूर्णिमा को संपन्न किया गया था. 

द्रौपदी और श्रीकृष्‍ण की कथा: महाभारत काल में कृष्ण और द्रौपदी का एक वृत्तांत मिलता है. जब कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से शिशुपाल का वध किया तब उनकी तर्जनी में चोट आ गई. द्रौपदी ने उस समय अपनी साड़ी फाड़कर उसे उनकी अंगुली पर पट्टी की तरह बांध दिया. यह श्रावण मास की पूर्णिमा का दिन था. श्रीकृष्ण ने बाद में द्रौपदी के चीर-हरण के समय उनकी लाज बचाकर भाई का धर्म निभाया था.