Ramadan 2018: 17 मई से शुरू हो रहा है रमज़ान का पाक महीना, इस दिन होगा सबसे लंबा रोज़ा

रमज़ान के महीने को तीन भागों में बांटा जाता है. 10 दिन के पहले भाग को 'रहमतों का दौर' बताया गया है. 10 दिन के दूसरे भाग को 'माफी का दौर' कहा जाता है और 10 दिन के आखिरी हिस्से को 'जहन्नुम से बचाने का दौर' पुकारा जाता है.

Ramadan 2018: 17 मई से शुरू हो रहा है रमज़ान का पाक महीना, इस दिन होगा सबसे लंबा रोज़ा

रमज़ान के महीने में इस दिन होगा सबसे लंबा रोज़ा

खास बातें

  • 17 मई से रमज़ान का महीना शुरू
  • 30 दिन रखे जाते हैं रोज़े
  • इस दिन पड़ेगा सबसे लंबा रोज़ा
नई दिल्ली:

माह-ए-रमज़ान (Ramadan) 17 मई से शुरू होने वाला है. इस बार रमज़ान के पूरे महीने में 5 जुमे पड़ेंगे. पहला जुमा रमज़ान शुरू होने के अगले 18 मई को पड़ेगा, वहीं, 15 जून को आखिरी जुमा होगा, जिसे अलविदा जुमा कहा जाता है. आखिरी जुमे के अगले दिन ही ईद मनाई जाएगी.

यह भी पढ़ें : इस्‍लाम में 786 अंक शुभ क्‍यों माना जाता है...?

इससे भी ज़्यादा खास बात यह है कि इस बार 14 जून को सबसे लंबा रोज़ा पड़ने वाला है. हर बार रोज़े का वक्त 14-15 घंटे से कम वक्त में ही खत्म हो जाता है, लेकिन 14 जून को सबसे लंबा रोज़ा 15 घंटे 6 मिनट का होगा. वहीं, 11 जून को शब-ए-कद्र होगी, जिसके दौरान रोज़ा रखने वाले रातभर इबादत करते हैं.

यह भी पढ़ें : Ramadan 2018: चांद से रोशन हो रमज़ान तुम्हारा - भेजें, रमज़ान के ऐसे ही मैसेज

आपको बता दें, रमज़ान का महीना पूरे 30 दिन का होता है, और हर रोज़ रोज़ा रखा जाता है. मान्यता है कि इस्लामी कैलेंडर के इस महीने के दौरान हर रोज़ कुरान पढ़ने से ज़्यादा सबाब मिलता है.

यह भी पढ़ें : इस्लाम धर्म में हरे रंग को क्‍यों माना जाता है पाक, जानिए इसका महत्‍व

वहीं, रोज़े को इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक माना गया है. इस महीने मुसलमान तकवा हासिल करने के लिए रोज़ा रखते हैं. तकवा का अर्थ है अल्लाह को नापसंद काम न कर उनकी पसंद के कामों को करना. आसान शब्दों में कहा जाए तो यह महीना मुसलमानों के लिए सबसे खास होता है.

यह भी पढ़ें : इन 3 नियमों का पालन न करने पर पूरी नहीं होती जुमे की नमाज़

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

रमज़ान के तीन दौर
आपको बता दें कि रमज़ान के महीने को तीन भागों में बांटा जाता है. 10 दिन के पहले भाग को 'रहमतों का दौर' बताया गया है. 10 दिन के दूसरे भाग को 'माफी का दौर' कहा जाता है और 10 दिन के आखिरी हिस्से को 'जहन्नुम से बचाने का दौर' पुकारा जाता है.

देखें वीडियो - रमजान : खास लखनऊ का रंग