Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने का समय और पूजा-विधि

Sharad Purnima Kheer: इस रात की बनी खीर को रात 12 बजे तक खुले आसमान में रखने के बाद खाने से चर्म रोग, अस्थमा, दिल की बीमारियां, फेफड़ों की बीमारियां और आंखों की रोशनी से जुड़ी परेशानियों में लाभ होता है. 

Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने का समय और पूजा-विधि

Sharad Purnima kheer (शरद पूर्णिमा खीर)

नई दिल्ली:

Sharad Purnima 2019: शरद पूर्णिमा की रात माता लक्ष्मी की पूजा के साथ-साथ खीर (Kheer) का भी महत्व होता है. क्योंकि इस पूर्णिमा का हिंदू धर्म में खास महत्व बताया गया है. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा (Sharad Purnima) की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्‍त होकर धरती पर अमृत की वर्षा करता है. इसी अमृत को चखने के लिए शरद पूर्णिमा की रात को खुले आसमान में खीर रखी जाती है. 

बता दें, हिन्‍दू धर्म में मनुष्‍य के एक-एक गुण को किसी न किसी कला से जोड़कर देखा जाता है. माना जाता है कि 16 कलाओं वाला पुरुष ही सर्वोत्तम पुरुष है. कहा जाता है कि श्री हरि विष्‍णु के अवतार भगवान श्रीकृष्‍ण ने 16 कलाओं के साथ जन्‍म लिया था, जबकि भगवान राम के पास 12 कलाएं थीं. 

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शरद पूर्णिमा की रात खीर रखने का समय
शरद पूर्णिमा की रात खीर (Sharad Purnima Kheer) बनाकर उसे आकाश के नीचे रखा जाता है. शरद पूर्णिमा के दिन चंद्रोदय के समय आकाश के नीचे खीर बनाकर रखी जाती है. इस खीर को 12 बजे के बाद खाया जाता है. 

चंद्रोदय का समय: 13 अक्‍टूबर 2019 की शाम 05 बजकर 26 मिनट.

मान्यता है कि इस रात की बनी खीर को रात 12 बजे तक खुले आसमान में रखने के बाद खाने से चर्म रोग, अस्थमा, दिल की बीमारियां, फेफड़ों की बीमारियां और आंखों की रोशनी से जुड़ी परेशानियों में लाभ होता है. 

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शरद पूर्णिमा की पूजा विधि 
- शरद पूर्णिमा के दिन सुबह उठकर स्‍नान करने के बाद व्रत का संकल्‍प लें. 
- घर के मंदिर में घी का दीपक जलाएं
- इसके बाद ईष्‍ट देवता की पूजा करें. 
- फिर भगवान इंद्र और माता लक्ष्‍मी की पूजा की जाती है. 
- अब धूप-बत्ती से आरती उतारें.  
- संध्‍या के समय लक्ष्‍मी जी की पूजा करें और आरती उतारें. 
- अब चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर प्रसाद चढ़ाएं और आारती करें. 
- अब उपवास खोल लें. 
- रात 12 बजे के बाद अपने परिजनों में खीर का प्रसाद बांटें.

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