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क्या होता है ग्रहण? सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण में क्या है अंतर

ज्योतिषों के अनुसार ग्रहण को देखना अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान खुले आसमान में नही रहा जाता और ना ही मंदिरों के दरवाजों को खुला रखा जाता है.

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क्या होता है ग्रहण? सूर्यग्रहण और चंद्रग्रहण में क्या है अंतर

क्या होता है ग्रहण?

खास बातें

  1. साल 2018 का पहला सूर्यग्रहण दिखेगा कल
  2. ज्योतिषों अनुसार भगवान पर कष्ट होता है ग्रहण
  3. समुद्र मंथन से जुड़ी है ग्रहण की कहानी
नई दिल्ली: ग्रहण को देखने के लिए लोगों में उत्सुकता बनी रहती है. इसके लिए वो सोलर-व्युइंग ग्लासेस, पर्सनल सोलर फिल्टर्स या आइक्लिप्स ग्लासेस का इस्तेमाल करते हैं. वहीं, ज्योतिषों के अनुसार ग्रहण को देखना अशुभ माना जाता है. मान्यता है कि ग्रहण के दौरान खुले आसमान में नही रहा जाता और ना ही मंदिरों के दरवाजों को खुला रखा जाता है. 

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ज्योतिषों के अनुसार भगवान पर कष्ट होता है ग्रहण. लेकिन विज्ञान में यह एक खगोलिय घटना है, जिसमें पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा तीनों एक ही सीध में दिखते हैं. यही घटना आज 15 फरवरी को है, आज साल 2018 का पहला सूर्यग्रहण है. इसके बाद दूसरा सूर्यग्रहण 13 जुलाई 2018 और तीसरा सूर्यग्रहण 11 अगस्त 2018 को होगा.

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यहां जानिए आखिर ग्रहण क्या है? और ऐसी क्या वजह है जिसके चलते ग्रहण को देखना अशुभ माना जाता है. यहां जानें पौराणिक कथा कि वो एक कहानी जिस वजह से ग्रहण को इंसान ही नहीं बल्कि भगवान को भी नहीं दिखाया जाता. 

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क्या कहती है पौराणिक कथा?
एक पौराणिक कथा के अनुसार समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और दानवों के बीच अमृत के लिए घमासान चला. इस मंथन में अमृत देवताओं को मिला लेकिन असुरों ने उसे छीन लिया. अमृत को वापस लाने के लिए भगवान विष्णु ने मोहिनी नाम की सुंदर कन्या का रूप धारण किया और असुरों से अमृत ले लिया. जब वह उस अमृत को लेकर देवताओं के पास पहुंचे और उन्हें पिलाने लगे तो राहु नामक असुर भी देवताओं के बीच जाकर अमृत पीने बैठ गया. जैसे ही वो अमृत पीकर हटा, भगवान सूर्य और चंद्रमा को भनक हो गई कि वह असुर है. तुरंत उससे अमृत छीन लिया गया और विष्णु जी ने अपने सुदर्शन चक्र से उसकी गर्दन धड़ से अलग कर दी. 

क्योंकि वो अमृत पी चुका था इसीलिए वह मरा नहीं. उसका सिर और धड़ राहु और केतु नाम के ग्रह पर गिरकर स्थापित हो गए. ऐसी मान्यता है कि इसी घटना के कारण सूर्य और चंद्रमा को ग्रहण लगता है, इसी वजह से उनकी चमक कुछ देर के लिए चली जाती है. 

क्या कहता है विज्ञान?
वहीं, विज्ञान के अनुसार यह एक प्रकार की खगोलीय घटना है. जिनमें सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी तीनों एक ही सीधी रेखा में आ जाते हैं. इससे चांद सूर्य की उपछाया से होकर गुजरता है, जिस वजह से उसकी रोशनी फिकी पड़ जाती है. 

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क्या होता है सूर्य ग्रहण?
पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमने के साथ-साथ अपने सौरमंडल के सूर्य के चारों ओर भी चक्कर लगाती है. दूसरी ओर, चंद्रमा दरअसल पृथ्वी का उपग्रह है और उसके चक्कर लगता है, इसलिए, जब भी चंद्रमा चक्कर काटते-काटते सूर्य और पृथ्वी के बीच आ जाता है, तब पृथ्वी पर सूर्य आंशिक या पूर्ण रूप से दिखना बंद हो जाता है. इसी घटना को सूर्यग्रहण कहा जाता है. 
 
solar eclipse 2018

क्या होता है चंद्रग्रहण?
जब सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती हुई पृथ्वी एक सीध में अपने उपग्रह चंद्रमा तथा सूर्य के बीच आ जाती है, तो चंद्रमा पर पड़ने वाली सूर्य की किरणें रुक जाती हैं, और पृथ्वी की प्रच्छाया उस पर पड़ने लगती है, जिससे उसका दिखना बंद हो जाता है. इसी खगोलीय घटना को चंद्रग्रहण कहा जाता है.
 
lunar eclipse

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देखें वीडियो - ग्रहण का असर
 


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