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धन-दौलत की हानि जुड़ी वास्तु की इन मान्यताओं के बारे में जानते हैं आप!

कभी-कभी तो कर्ज लेने की नौबत भी आ जाती है. भारतीय वास्तुशास्त्र में धन को बचाने के कुछ उपाय बताए गए हैं, मान्यता है कि इन्हें अपनाने से आकस्मिक खर्चों में न केवल कमी आती है, बल्कि बचत से धन में वृद्धि होने लगती है. 

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धन-दौलत की हानि जुड़ी वास्तु की इन मान्यताओं के बारे में जानते हैं आप!

अगर आप वास्तु को मानते हैं, तो इससे जुड़ी मान्यताओं को भी मानते होंगे. वास्तु में स्वास्थ्य, धन, रिश्तों और जीवन के दूसरे पहलुओं को सुखद और सुंदर बनाने के लिए उपाय बताए जाते हैं. धनवान बनने के लिए केवल धन कमाना ही जरूरी नहीं, बल्कि उसे बचाना उससे भी ज्यादा जरुरी है. लेकिन कई बार चाहते हुए भी धन बच नहीं पाता है. कई प्रकार के वांछित-अवांछित और आकस्मिक खर्च बजट इस कदर बिगाड़ देते हैं, कि उबरने में समय लगता है. कभी-कभी तो कर्ज लेने की नौबत भी आ जाती है. भारतीय वास्तुशास्त्र में धन को बचाने के कुछ उपाय बताए गए हैं, मान्यता है कि इन्हें अपनाने से आकस्मिक खर्चों में न केवल कमी आती है, बल्कि बचत से धन में वृद्धि होने लगती है. 

नल को बदलें: 
वास्तु को मानने वालों के अनुसार घर के किसी भी नल से पानी का टपकते रहना भारतीय वास्तुशास्त्र में वित्तीय हानि का एक बड़ा कारण माना गया है. यह अनदेखा नहीं करना चाहिए. मान्यता है कि नल से पानी का टपकते रहना धीरे-धीरे धन के खर्च होने का संकेत है. इसलिए नल के बिगड़ने पर तुरंत बदल देना चाहिए.


दीवार पर टांगे धातु का सामान: 
बेडरुम के प्रवेश द्वार के सामने वाली दीवार के बाएं कोने पर धातु की कोई चीज लटकाकर रखने की भी मान्रूता है. भारतीय वास्तुशास्त्र के अनुसार यह स्थान भाग्य और संपत्ति का क्षेत्र है. वास्तु के अनुसार अगर इस दिशा में दीवार पर दरारें हों तो उनकी मरम्मत तुरंत करवा लेनी चाहिए.

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घर में कबाड़ नहीं रखें: 
वास्तु मानने वालों का कहना है कि घर में कबाड़, टूटे-फूटे बर्तन और सामानों को जमा नहीं करना चाहिए. कहते हैं कि यह सब घर में रखने से घर की नकारात्मक उर्जा में वृद्धि होती है. टूटा हुआ पलंग भी घर में नहीं रखना चाहिए. मान्यता के अनुसार इनसे खर्च बढ़ता है और आमदनी में कमी आती है.

जल का निकासी: 
अगर आप वास्तु को मानते हैं और इसमें विश्वास रखते हैं, तो वास्तु के अनुसार घर में इस्तेमाल किस दिशा से बाहर निकल रहा है इस बात पर भी नजर रखें. भारतीय वास्तुशास्त्र में उत्तर दिशा और पूर्व दिशा में जल की निकासी आर्थिक दृष्टि से अच्छी मानी गयी है. वास्तुशास्त्र के अनुसार जिन घरों में जल की निकासी दक्षिण या पश्चिम दिशा में होती है, उन्हें धन से जुड़ी समस्याओं के साथ अन्य कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.


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