NDTV Khabar

जानिए कैसे एक छोटा-सा चूहा बना भगवान गणेश की सवारी

कभी आपने सोचा है कि इतने बड़े गणेश जी की सवारी एक चूहा क्यों? सभी देवताओं के पास एक से बढ़कर एक सवारियां हैं, लेकिन सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश के पास एक छोटा-सा मूषक ही क्यों?

107 Shares
ईमेल करें
टिप्पणियां
जानिए कैसे एक छोटा-सा चूहा बना भगवान गणेश की सवारी

जानें गणेश जी की सवारी एक चूहा क्यों?

खास बातें

  1. क्रोंच एक विशाल चूहा था
  2. मुनि ने क्रोंच को चूहे बनने का श्राप दिया
  3. चूहे ने महर्षि पराशर की कुटिया कुतर डाली
नई दिल्ली: कभी आपने सोचा है कि इतने बड़े गणेश जी की सवारी एक चूहा क्यों? सभी देवताओं के पास एक से बढ़कर एक सवारियां हैं, लेकिन सबसे पहले पूजे जाने वाले भगवान गणेश के पास एक छोटा-सा मूषक ही क्यों? चलिए आपको बताते हैं कि आखिर श्री गणेश के पास ये सवारी कहां से आई और असल में यह मूषक है कौन.

जानिए क्यों हर शुभ काम की शुरूआत भगवान गणेश से की जाती है

एक प्रचलित कथा के अनुसार एक आधा भगवान और आधा राक्षक प्रवृत्ति वाला नर था क्रोंच. एक बार भगवान इंद्र ने अपनी सभा में सभी मुनियों को बुलाया, इस सभा में क्रोंच भी शामिल हुआ. यहां गलती से क्रोंच का पैर एक मुनि के पैरों पर रख गया. इस बात से क्रोधित होकर उस मुनि ने क्रोंच को चूहे बनने का श्राप दिया. क्रोंच ने मुनि से क्षमा मांगी, लेकिन वह अपना श्राप वापस नहीं ले पाए, लेकिन उसने एक वरदान दिया कि आने वाले समय में वो भगवान शिव के पुत्र गणेश की सवारी बनेंगे. 

क्यों गणेश जी की पूजा में इस्तेमाल नहीं होती तुलसी?

क्रोंच कोई छोटा-मोटा नहीं बल्कि एक विशाल चूहा था. जो मिनटों में पहाड़ों को कुतर डालता था. इसका आतंक इतना था कि वन में रहने वाले ऋषि-मुनियों को भी वह बहुत परेशान किया करता था. इसी तरह एक दिन उसने महर्षि पराशर की कुटिया भी तहस-नहस कर डाली. महर्षि पराशर भगवान गणेश का ध्यान कर रहे थे. कुटिया के बाहर मौजूद सभी ऋषियों ने उसे भगाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन सफल ना हो पाए. 
 
rat

इस समस्या के समाधान के लिए वो भगवान गणेश के पास गए और उन्हें सब कुछ बताया. गणेश जी ने चूहे को पकड़ने के लिए एक पाश (फंदा) फेंका. इस पाश ने चूहे का पाताल लोक तक पीछा किया और पकड़ कर गणेश जी के सामने ले आया.   

क्यों और कितनी बार करनी चाहिए मंदिर में परिक्रमा? जानिए

गणेश जी ने चूहे से इस तबाही की वजह जाननी चाही लेकिन गुस्से से भरे उस चूहे ने कोई जवाब ना दिया. इसीलिए गणेश जी ने आगे चूहे से बोला कि अब तुम मेरे आश्रय में हो इसलिए जो चाहो मुझ से मांग लो, लेकिन महर्षि पराशर को परेशान ना करो. 

इस पर घमंडी चूहे ने गणेश जी से कहा 'मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए. हां, अगर आप चाहें तो मुझसे कुछ मांग सकते हैं." इस घमंड को देख गणेश जी ने चूहे से कहा कि वो उनकी सवारी बनें. चूहे ने उनकी बात मानी और सवारी बनने को राज़ी हो गया. लेकिन जैसे ही गणेश जी उस चूहे के ऊपर बैठे वो उनकी भारी भरकर देह से दबने लगा. चूहे ने बहुत कोशिश की लेकिन गणेश जी को लेकर एक कदम आगे ना बढ़ा सका. 

चूहे का घमंड चूर-चूर हो गया और उसने गणेश जी से बोला," गणपति बप्पा! मुझे माफ कर दें. आपके वजन से मैं दबा जा रहा हूं." इस माफी को स्वीकार कर गणेश जी ने अपना भर कम किया. इस तरह वह गणेश जी की सवारी बना. चूहे को मूषक भी कहा जाता है. 

 देखें वीडियो - गणेश पर निसार दुनिया​




Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक और गूगल प्लस पर ज्वॉइन करें, ट्विटर पर फॉलो करे...

Advertisement