NDTV Khabar
होम | features

features

  • फिर इसके बाद ये पूछें कि कौन दुश्मन है...
    जोश मलीहाबादी का एक किस्सा मशहूर है. वह पाकिस्तान चले गए थे और लौटकर भारत आ गए. लोगों ने पूछा कि पाकिस्तान कैसा है. जोश साहब ने जवाब दिया, बाक़ी सब तो ठीक है, लेकिन वहां मुसलमान कुछ ज़्यादा हैं.
  • क्‍या नए दौर में सुधरेंगे भारत-पाक रिश्‍ते?
    इमरान खान के पाकिस्तान की कमान संभालने के बाद भारत पाकिस्तान रिश्तों को लेकर पहल ही ग़लत अंदाज़ में शुरू हुई. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देने का एक पत्र लिखा. लेकिन इसे लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया.
  • प्रेस की आज़ादी पर 300 अमरीकी अख़बारों के संपादकीय
    अमरीकी प्रेस के इतिहास में एक शानदार घटना हुई है. 146 पुराने अख़बार बोस्टन ग्लोब के नेतृत्व में 300 से अखबारों ने एक ही दिन अपने अखबार में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर संपादकीय छापे हैं. आप बोस्टल ग्लोब की साइट पर जाकर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर लिखे गए 300 संपादकीय का अध्ययन कर सकते हैं.
  • नीतीश कुमार का Blog: मैंने जो अटल जी से सीखा...
    बिहार के लोग कभी अटल जी को नहीं भूल पाएंगे क्‍योंकि उन्‍होंने हमें स्‍वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग और कोशी नदी समेत तीन बड़े पुल दिए
  • लोकसभा, 13 राज्यों में 'एक साल, एक चुनाव' - कानूनी अड़चनें...
    प्रधानमंत्री मोदी का ‘एक देश एक चुनाव’ का विजन सफल नहीं होने पर उसको ‘एक साल एक चुनाव’में बदलने की तैयारी है. विधि आयोग ने इस बारे में 17 अप्रैल 2018 को पब्लिक नोटिस जारी करके सभी पक्षों से राय मांगी थी. विधि आयोग द्वारा 24 अप्रैल को लिखे पत्र के जवाब में चुनाव आयोग के पूर्व विधि सलाहकार एसके मेन्दिरत्ता ने अनेक कानूनी बदलावों का मसौदा पेश किया है.
  • भारत में बदतर स्वास्थ्य सेवाओं से परेशान लोगों को बीमा कवर का झांसा
    "भारत में मेडिकल शिक्षा कुछ स्थायी मिथकों से घिर गई है, जिन्हें तोड़ना सबसे ज़रूरी है. ख़ानदानी और कुलीन परिवारों के कब्ज़े से इसे निकालने के लिए व्यापक सामाजिक समूह को भी मेडिकल शिक्षा के दायरे में लाना पड़ेगा. इन लोगों ने जान-बूझकर यह बात लोगों के दिमाग में बिठा दी है कि डॉक्टर होने के लिए दैवीय गुणों से लैस कुशाग्र होना बहुत ज़रूरी है. इसके बिना काबिल डॉक्टर नहीं हुआ जा सकता, जबकि काबिल डॉक्टर का होना इस बात पर निर्भर करता है कि आप में सेवाभाव है या नहीं. यही असली मेरिट है.
  • ‘102 नॉट आउट’ : आनंदवाद से सुखवाद की ओर छलांग…
    अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर स्टारर फिल्म '102 नॉट आउट' का इतनी तेज़ी से हो रहा प्रभाव मार्क्सवादियों की कलाविषयक इस धारणा को बखूबी पुष्ट कर रहा है कि कलाएं समाज का आईना ही नहीं, समाज को बदलने और गढ़ने वाली छेनी-हथौड़ी भी होती हैं.
  • IPL 2018 से बहुत कुछ पाया भारतीय क्रिकेट ने...
    इन प्‍लेयर्स में टॉप पर हैं ऋषभ पंत, उम्र 20 वर्ष..अब जरा इनके रिकॉर्ड को देखें ..आईपीएल की 14 पारियों में सर्वाधिक 684 रन बनाए. यही नहीं, पूरे आईपीएल में सबसे अधिक छक्के मारने का रिकॉर्ड भी पंत के ही नाम है उन्‍होंने आईपीएल 2018 में 37 छक्के मारे हैं. उनके रूप में एक ऐसा खिलाड़ी उभरा है जिसको लेकर भारतीय क्रिकेट काफी आशावान होगा.
  • हम न बलात्कार से परेशान होते हैं, न छलात्कार से
    उन्नाव, कठुआ और सूरत में सामने आई बलात्कार की घटनाओं के विरुद्ध देश भर में फूटा रोष सच्चा है, इसमें संदेह नहीं. इन सभी मामलों में पीड़ित के साथ जो जघन्य क्रूरता हुई, वह किसी भी सभ्य इंसान और व्यवस्था को सिहरा देने-शर्मिंदा कर देने के लिए काफ़ी है.
  • क्या वाकई बच्चे हमारी संवेदनाओं का हिस्सा हैं, या सिर्फ सियासत का!
    वो बच्ची जो घोड़े लेने आई, पर लौटी नहीं! क्या ऐसे कई बच्चों को हम बचा नहीं सकते? क्यों वो स्कूल छोड़ गाय-बकरी चराने निकलते हैं? क्या "14 साल से कम उम्र के बच्चों की अनिवार्य शिक्षा" का कानून बेमानी है? मन परेशान था, तभी कुछ पुरानी बातें, पुरानी तस्वीरें याद आ गईं!
  • रोज जन्म लेती है निर्भया और तिल-तिल, पल-पल मरती है उसकी अस्मिता...
    तेरह साल की बच्ची घेरे वाली फ्रॉक जिद करके ले आई थी और पूरे दो दिन तक उसे पहन कर गांवभर में घूम रही थी. एक-एक राहगीर को दिखा रही थी- 'देखो चाचा मेरी नई फ्रॉक', 'देखो काकी, देखो न...' हर कोई उसकी इस नादानी पर हंस देता और उसे पुचकार कर आगे निकल जाता.
  • नरेश अग्रवाल बीजेपी को सिखाने आए हैं या सीखने?
    14 नवंबर 2013 को उत्तर प्रदेश के हरदोई में नरेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था एक चाय बेचने वाला कभी भी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है.
  • हमारा नेता कैसा हो – नॉर्थईस्ट का जवाब, ‘टशनी’ हो...
    'मॉर्निंग वॉक' के समय 'वॉक' कम, 'टॉक' ज़्यादा होने लगा है. पहले यह बीमारी 'काउ बेल्ट' तक सीमित थी, जहां हर चर्चा राजनीति से शुरू होकर राजनीति पर खत्म होती है. इसलिए भी, क्योंकि छोटे शहरों में भागमभाग कम है और समय ज़्यादा. फुर्सत ही फुर्सत. लिहाज़ा, चाय की चुस्की के साथ राजनीति पर बहसबाज़ी सबसे पसंदीदा शगल है.
  • जहां पेट्रोल पंपों के ज़रिये हो रहा है जेल सुधार...
    तेलंगाना जाने की एक बड़ी वजह उन पेट्रोल पंपों को देखना था जो कि जेल-सुधार की नई कहानी लिख रहे हैं. वैसे तो मॉडल प्रिजन मैन्यूल में देश भर की जेलों को लेकर सुधार के कई रास्ते सुझाए गए हैं लेकिन उन पर अमल कम ही जेलें कर पाई हैं. इनमें तेलंगाना की जेलों ने एक अनूठी मिसाल कायम की है.
«123456»

Advertisement