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  • पारदर्शी और ईमानदार परीक्षा व्यवस्था कब आएगी?
    सभी प्रकार की सरकारों से आज तक ये न हुआ कि एक पारदर्शी और ईमानदार परीक्षा व्यवस्था दे सकें जिस पर सबका भरोसा हो. बुनियादी समस्या का समाधान छोड़ कर हर समय एक बड़े और आसान मुद्दे की तलाश ने लाखों की संख्या में नौजवानों को तोड़ दिया है.
  • ये कौन से गरीब हैं, जिन्हें आरक्षण मिलेगा...?
    आरक्षण को लेकर BJP और कांग्रेस जैसी मूलतः अगड़े वर्चस्व वाली पार्टियां हमेशा दुविधा में रहीं. लेफ्ट फ्रंट को भी जातिगत आधार पर आरक्षण के सिद्धांत का समर्थन करने में वक्त लगा. संघ परिवार खुलेआम आरक्षण का विरोध करता रहा. 1990 में जब तत्कालीन प्रधानमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह ने पिछड़ी जातियों के आरक्षण के लिए मंडल आयोग की सिफारिशें लागू करने का ऐलान किया, तो देशभर में जो मंडल-विरोधी आंदोलन चल पड़ा, उसे इन राजनीतिक दलों की शह भी हासिल थी. मंडल की काट के लिए BJP ने कमंडल का दांव भी खेला.
  • 'The Accidental Prime Minister' से फिर उठेगी कथा और इतिहास की बात
    मसला यह था कि क्या किसी ऐतिहासिक चरित्र को नई कथा में ढाला जा सकता है. खैर, जिन्होंने विवाद खड़ा किया, उन्हें क्या और कितना हासिल हुआ, इसका पता नहीं चला. आखिर मामला सुलटा लिया गया. फिल्म रिलीज़ हुई. लेकिन साहित्य जगत में एक सवाल ज़रूर उठा और उठा ही रह गया कि क्या ऐतिहासिक चरित्रों के साथ उपन्यासबाजी या कहानीबाजी की जा सकती है, या की जानी चाहिए, या नहीं की जानी चाहिए...? कला या अभिव्यक्ति की आज़ादी के नाम पर क्या किसी ऐतिहासिक चरित्र को वैसा चित्रित किया जा सकता है, जैसा वह न रहा हो...? यह सवाल भी कि क्या कोई कलाकार किसी का चरित्र चित्रण ग्राहक की मांग के आधार पर कर सकता है...?
  • राजनीति की भट्टी में पिघलाया जा रहा स्टील प्रेम...
    पहले देश के तीन राज्य के लोगों ने सत्ता में बैठे राजनीतिक दलों में बदलाव किया. नई पार्टी सत्ता पर आसीन हुई, और गद्दी पर आने के बाद उसने जो दूसरा बड़ा काम किया, वह था - बड़ी संख्या में प्रशासनिक फेरबदल. मीडिया में इसे 'प्रशासनिक सर्जरी' कहा गया. 'सर्जरी' किसी खराबी को दुरुस्त करने के लिए की जाती है. ज़ाहिर है, इससे ऐसा लगता है कि इनके आने से पहले प्रशासन में जो लोग थे, वे सही नहीं थे. अब उन्हें ठिकाने (बेकार के पद) लगाया जा रहा है, जैसा व्यक्तिगत रूप से बातचीत के दौरान एक नेता ने थोड़ा शर्माते हुए कहा था, "पहले उनके लोगों ने मलाई खाई, अब हमारे लोगों की बारी है..."
  • शिक्षा के मकसद पर प्रधानमंत्री का भाषण
    शनिवार को विज्ञान भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण में शिक्षा के पारंपरिक लक्ष्य को दोहराया गया. एक ऐसे लक्ष्य को दोहराया गया, जिसे हासिल करने का तरीका सदियों से तलाशा जा रहा है. लक्ष्य यह कि शिक्षा ऐसी हो जो हमें मनुष्य बना सके, जिससे जीवन का निर्माण हो, मानवता का प्रसार हो और चरित्र का गठन हो. प्रधानमंत्री ने ये लक्ष्य विवेकानंद के हवाले से कहे. इस दोहराव में बस वह बात फिर रह गई कि ये लक्ष्य हासिल करने का तरीका क्या हो? प्रधानमंत्री के इस भाषण से उस तरीके के बारे में कोई विशिष्ट सुझाव तो नहीं दिखा, फिर भी उन्होंने निरंतर नवोन्मेष की जरूरत बताई. हालांकि अपनी तरफ से उन्होंने नवोन्मेष को देश दुनिया में संतुलित विकास से जोड़ा. खैर, कुछ भी हो, शिक्षा और ज्ञान की मौजूदा शक्लोसूरत की आलोचना के बहाने से ही सही, कम से कम शिक्षा और ज्ञान के बारे में कुछ सुनने को तो मिला.
  • क्योंकि संपत्ति नहीं है स्त्री
    व्यभिचार कानून को रद्द करने का सुप्रीम कोर्ट का फैसला बस इतना नहीं है कि स्त्री और पुरुष के विवाहेतर संबंधों को अब जुर्म नहीं माना जाएगा. दुर्भाग्य से हमारे लगातार सतही-सपाट होते समय में ज़्यादातर लोग इस फैसले की इतनी भर व्याख्या करेंगे. लगातार चुटकुलेबाज होते जा रहे हमारे समाज को यह फैसला अपने लिए स्त्री-पुरुष संबंधों के खुलेपन पर कुछ छींटाकशी का अवसर भर लग सकता है, लेकिन यह एक ऐतिहासिक फैसला है.
  • आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जोरों पर, क्या है राफेल सौदे का सच?
    राफेल का सच क्या है? क्या यह सच इस बात से तय होगा कि आप राजनीतिक विचारधारा को बांटने वाली रेखा के किस ओर खड़े हैं? ऐसा क्यों होता है कि राजनीतिक पार्टियां सत्ता में रहते हुए कुछ कहती हैं और विपक्ष में आने के बाद कुछ और? राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर लग रहे तमाम आरोपों में कुछ बड़े आरोपों की पड़ताल के बाद एक अलग ही तस्वीर सामने आई है. सबसे बड़ा आरोप कीमतों को लेकर है.
  • देश के मसले, पाकिस्तान का नाम!
    पाकिस्तान का नाम जब भारत की राजनीति में आ जाए तो तय करना मुश्किल हो जाता है कि यह फुलटॉस है या बाउंसर. बिहार का चुनाव हो तब पाकिस्तान. राफेल डील तब पाकिस्तान पाकिस्तान. पाकिस्तान वाले भी इतना पाकिस्तान पाकिस्तान नहीं करते होंगे जितना भाजपा प्रवक्ता पाकिस्तान पाकिस्तान करते हैं.
  • फिर इसके बाद ये पूछें कि कौन दुश्मन है...
    जोश मलीहाबादी का एक किस्सा मशहूर है. वह पाकिस्तान चले गए थे और लौटकर भारत आ गए. लोगों ने पूछा कि पाकिस्तान कैसा है. जोश साहब ने जवाब दिया, बाक़ी सब तो ठीक है, लेकिन वहां मुसलमान कुछ ज़्यादा हैं.
  • क्‍या नए दौर में सुधरेंगे भारत-पाक रिश्‍ते?
    इमरान खान के पाकिस्तान की कमान संभालने के बाद भारत पाकिस्तान रिश्तों को लेकर पहल ही ग़लत अंदाज़ में शुरू हुई. दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरान खान को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई देने का एक पत्र लिखा. लेकिन इसे लेकर पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बयान को लेकर विवाद खड़ा हो गया.
  • प्रेस की आज़ादी पर 300 अमरीकी अख़बारों के संपादकीय
    अमरीकी प्रेस के इतिहास में एक शानदार घटना हुई है. 146 पुराने अख़बार बोस्टन ग्लोब के नेतृत्व में 300 से अखबारों ने एक ही दिन अपने अखबार में प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर संपादकीय छापे हैं. आप बोस्टल ग्लोब की साइट पर जाकर प्रेस की स्वतंत्रता को लेकर लिखे गए 300 संपादकीय का अध्ययन कर सकते हैं.
  • नीतीश कुमार का Blog: मैंने जो अटल जी से सीखा...
    बिहार के लोग कभी अटल जी को नहीं भूल पाएंगे क्‍योंकि उन्‍होंने हमें स्‍वर्णिम चतुर्भुज राजमार्ग और कोशी नदी समेत तीन बड़े पुल दिए
  • लोकसभा, 13 राज्यों में 'एक साल, एक चुनाव' - कानूनी अड़चनें...
    प्रधानमंत्री मोदी का ‘एक देश एक चुनाव’ का विजन सफल नहीं होने पर उसको ‘एक साल एक चुनाव’में बदलने की तैयारी है. विधि आयोग ने इस बारे में 17 अप्रैल 2018 को पब्लिक नोटिस जारी करके सभी पक्षों से राय मांगी थी. विधि आयोग द्वारा 24 अप्रैल को लिखे पत्र के जवाब में चुनाव आयोग के पूर्व विधि सलाहकार एसके मेन्दिरत्ता ने अनेक कानूनी बदलावों का मसौदा पेश किया है.
  • भारत में बदतर स्वास्थ्य सेवाओं से परेशान लोगों को बीमा कवर का झांसा
    "भारत में मेडिकल शिक्षा कुछ स्थायी मिथकों से घिर गई है, जिन्हें तोड़ना सबसे ज़रूरी है. ख़ानदानी और कुलीन परिवारों के कब्ज़े से इसे निकालने के लिए व्यापक सामाजिक समूह को भी मेडिकल शिक्षा के दायरे में लाना पड़ेगा. इन लोगों ने जान-बूझकर यह बात लोगों के दिमाग में बिठा दी है कि डॉक्टर होने के लिए दैवीय गुणों से लैस कुशाग्र होना बहुत ज़रूरी है. इसके बिना काबिल डॉक्टर नहीं हुआ जा सकता, जबकि काबिल डॉक्टर का होना इस बात पर निर्भर करता है कि आप में सेवाभाव है या नहीं. यही असली मेरिट है.
  • ‘102 नॉट आउट’ : आनंदवाद से सुखवाद की ओर छलांग…
    अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर स्टारर फिल्म '102 नॉट आउट' का इतनी तेज़ी से हो रहा प्रभाव मार्क्सवादियों की कलाविषयक इस धारणा को बखूबी पुष्ट कर रहा है कि कलाएं समाज का आईना ही नहीं, समाज को बदलने और गढ़ने वाली छेनी-हथौड़ी भी होती हैं.
  • IPL 2018 से बहुत कुछ पाया भारतीय क्रिकेट ने...
    इन प्‍लेयर्स में टॉप पर हैं ऋषभ पंत, उम्र 20 वर्ष..अब जरा इनके रिकॉर्ड को देखें ..आईपीएल की 14 पारियों में सर्वाधिक 684 रन बनाए. यही नहीं, पूरे आईपीएल में सबसे अधिक छक्के मारने का रिकॉर्ड भी पंत के ही नाम है उन्‍होंने आईपीएल 2018 में 37 छक्के मारे हैं. उनके रूप में एक ऐसा खिलाड़ी उभरा है जिसको लेकर भारतीय क्रिकेट काफी आशावान होगा.
  • हम न बलात्कार से परेशान होते हैं, न छलात्कार से
    उन्नाव, कठुआ और सूरत में सामने आई बलात्कार की घटनाओं के विरुद्ध देश भर में फूटा रोष सच्चा है, इसमें संदेह नहीं. इन सभी मामलों में पीड़ित के साथ जो जघन्य क्रूरता हुई, वह किसी भी सभ्य इंसान और व्यवस्था को सिहरा देने-शर्मिंदा कर देने के लिए काफ़ी है.
  • क्या वाकई बच्चे हमारी संवेदनाओं का हिस्सा हैं, या सिर्फ सियासत का!
    वो बच्ची जो घोड़े लेने आई, पर लौटी नहीं! क्या ऐसे कई बच्चों को हम बचा नहीं सकते? क्यों वो स्कूल छोड़ गाय-बकरी चराने निकलते हैं? क्या "14 साल से कम उम्र के बच्चों की अनिवार्य शिक्षा" का कानून बेमानी है? मन परेशान था, तभी कुछ पुरानी बातें, पुरानी तस्वीरें याद आ गईं!
  • रोज जन्म लेती है निर्भया और तिल-तिल, पल-पल मरती है उसकी अस्मिता...
    तेरह साल की बच्ची घेरे वाली फ्रॉक जिद करके ले आई थी और पूरे दो दिन तक उसे पहन कर गांवभर में घूम रही थी. एक-एक राहगीर को दिखा रही थी- 'देखो चाचा मेरी नई फ्रॉक', 'देखो काकी, देखो न...' हर कोई उसकी इस नादानी पर हंस देता और उसे पुचकार कर आगे निकल जाता.
  • नरेश अग्रवाल बीजेपी को सिखाने आए हैं या सीखने?
    14 नवंबर 2013 को उत्तर प्रदेश के हरदोई में नरेश अग्रवाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा था एक चाय बेचने वाला कभी भी देश का प्रधानमंत्री नहीं बन सकता है.
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