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फैक्‍ट फाइल

  • राफेल डील पर कब, किसके साथ और कौन था बैठकों में शामिल, जानें ये 20 बड़ी बातें
    केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में बताया कि राफेल सौदे पर मई 2015 से अप्रैल 2016 के बीच भारतीय वार्ता दल (आईएनटी) की 74 बैठक हुईं जिनमें से 26 फ्रांसीसी पक्ष के साथ थीं. आईएनटी का गठन 36 राफेल विमानों की खरीद के लिये नियम व शर्तों पर बातचीत के लिये किया गया था. आईएनटी की अध्यक्षता वायुसेना के उप प्रमुख (डीसीएएस) कर रहे थे और इसमें संयुक्त सचिव और अधिग्रहण प्रबंधक (एयर), संयुक्त सचिव (रक्षा ऑफसेट प्रबंधन शाखा), संयुक्त सचिव और अतिरिक्त वित्तीय सलाहकार, वित्त प्रबंधक (एयर), सलाहकार (लागत) और सहायक वायुसेना प्रमुख (योजना) भारत सरकार की तरफ से सदस्य के तौर पर शामिल थे. इसमें कहा गया कि फ्रांसीसी पक्ष का नेतृत्व महानिदेशक आयुध (डीजीए), फ्रांस सरकार का रक्षा मंत्रालय कर रहे थे. केंद्र ने सर्वोच्च अदालत को बताया, ‘‘आईएनटी और फ्रांसीसी पक्ष के बीच बातचीत मई 2015 में शुरू हुई और अप्रैल 2016 तक जारी रही. बातचीत के दौरान कुल 74 बैठकों में से 48 बैठकें आईएनटी की आंतरिक थी जबकि 26 बैठकें फ्रांसीसी पक्ष के साथ हुईं.
  • रिलायंस-राफेल और राहुल पर दसॉल्ट के CEO एरिक ट्रैपियर की 10 बड़ी बातें
    राफेल सौदे पर दसॉल्ट के CEO एरिक ट्रैपियर ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा है कि अंबानी को चुनना उनका फैसला था और रिलायंस के अलावा 30 ऐसी और कंपनियां भी साझीदार हैं. उन्होंने कहा कि भारतीय एयरफोर्स को इन विमानों की जरूरत है इसलिए वह इस सौदे का समर्थन कर रही है. वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की ओर से इस सौदे को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर कहा, 'मैं कभी झूठ नहीं बोलता हूं. जो सच मैंने पहले कहा था, और जो बयान मैंने दिए, वे सच हैं. मेरी छवि झूठ बोलने वाले की नहीं है. CEO के तौर पर मेरी स्थिति में रहकर आप झूठ नहीं बोलते हैं' . उन्होंने कहा, 'मेरे लिए जो अहम है, वह सच है, और सच यह है कि यह बिल्कुल साफ-सुथरा सौदा है, और भारतीय वायुसेना (IAF) इस सौदे से खुश है. आपको बता दें कि दसॉल्ट के CEO एरिक ट्रैपियर ने यह इंटरव्यू समाचार एजेंसी एएनआई के दिया है.
  • उपेंद्र कुशवाहा ने माना BJP-JDU से हैं आहत, बोले- आए-गए दल के लिए हमारी उपेक्षा ठीक नहीं, 10 बातें...
    केंद्रीय मंत्री उपेन्द्र कुशवाहा ने शुक्रवार को पटना में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित किया, जहां उन्होंने अपने दिल की बात कही. इस मौके पर उन्होंने माना कि भाजपा अब उनकी उपेक्षा कर रही है. संवाददाता सम्मेलन में उन्होंने जैसी-जैसी शर्तें रखी हैं, उसे देखकर लगता है कि वो भाजपा और जनता दल यूनाइटेड दोनों को चुनौती दे रहे हैं. उपेन्द्र कुशवाहा ने एक तरह से एनडीए आलाकमान को चुनौती देते हुए कहा कि उन्हें बिना विश्वास में लिए सीटों की संख्या की घोषणा करके दिखाएं.
  • कर्नाटक उपचुनाव 2018 : कांग्रेस-JDS गठबंधन की अग्निपरीक्षा, BJP के पास बदला लेने का मौका - 10 खास बातें
    कर्नाटक में लोकसभा की तीन और विधानसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव के परिणाम अगले साल होने वाले आम चुनाव 2019 के लिहाज़ से काफी अहम हैं. कर्नाटक मंगलवार को उपचुनावों के परिणामों के लिए इंतज़ार कर रहा है, जो न सिर्फ भारतीय जनता पार्टी (BJP), बल्कि राज्य में सत्तासीन कांग्रेस-JDS के लिए भी काफी अहम हैं. लोकसभा सीटों, शिमोगा, बल्लारी और मांड्या तथा विधानसभा सीटों जामखंडी और रामनगरम के परिणाम सभी के लिए अहम इसलिए हैं, क्योंकि लोकसभा की तीन में से दो सीटों पर अब तक BJP का कब्ज़ा था, वहीं, एक पर JDS की जीत हुई थी. इन तीन सीटों में से दो पर भी जीत BJP का मनोबल ऊंचा रखेगी, वहीं, विधानसभा चुनाव में मिली कामयाबी से कांग्रेस-JDS गठबंधन भी खुद को कमतर नहीं आंक रहा है. बता दें कि मई में हुए विधानसभा चुनाव के बाद कांग्रेस-JDS ने मिलकर सरकार बनाई थी.
  • सबरीमाला मंदिर : 2,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के बीच आज खुलेंगे मंदिर के कपाट, 10 बातें...
    भगवान अयप्पा मंदिर सोमवार को पूरे दिन के लिए खुलने जा रहा है, जिसके मद्देनजर करीब 2,300 पुलिसकर्मियों ने मंदिर कस्बे को अपने नियंत्रण में ले लिया है. बीते तीर्थयात्रा सत्र में व्यापक पैमाने पर हुए विरोध प्रदर्शनों को देखते हुए यह व्यवस्था की गई है. 4 से 6 नवंबर तक सन्नीधनम, पंबा, निलाक्कल और इलावंकुल में धारा 144 लगाने का फैसला किया गया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के तहत पंबा, नीलक्कल और इलुवांगल में चार या इससे अधिक लोगों के जुटने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है. इस संबंध में एक अधिकारी ने कहा कि श्रद्धालुओं को केवल सोमवार दोपहर बाद ऊपर के रास्ते पर जाने की इजाजत दी जाएगी. बता दें कि मंदिर के कपाट शाम पांच बजे खुलेंगे और मंगलवार रात 10 बजे बंद होंगे.
  • 'तेजप्रताप नॉर्थ तो ऐश्वर्या साउथ पोल', लालू यादव की 2 घंटे की मुलाकात, क्या बना पाएगी बात? 10 बातें
    बिहार के सबसे बड़े राजनीतिक परिवार में अभी सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है. बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव की तलाक की अर्जी ने परिवार के भीतर 'भूचाल' ला दिया है. तेजप्रताप यादव ने अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक की अर्जी दी है. हालांकि, यादव परिवार में तेजप्रताप यादव को मान-मनौवल का दौर चल रहा है, मगर तेजप्रताप यादव के जिस तरह के तेवर दिख रहे हैं, उससे लग नहीं रहा कि लालू परिवार की मुश्किलें कम होंगी. बहरहाल, राजद नेता तेज प्रताप यादव ने शनिवार को रांची स्थित एक अस्पताल में अपने पिता लालू प्रसाद से मुलाकात की और कहा कि वह ऐश्वर्या राय के साथ अपनी छह महीने पुरानी शादी समाप्त करने के अपने निर्णय पर कायम हैं क्योंकि वह ‘घुट-घुटकर नहीं जी सकते.
  • तलाक की अर्जी पर बोले तेज प्रताप- घुट-घुट कर जीना नहीं चाहता, पढ़ें पूरे शुक्रवार को देर रात हुए पूरे घटनाक्रम की 12 बातें
    तलाक की अर्जी दायर करने की खबर तेज प्रताप यादव ने कहा है कि घुट-घुट कर जीने से कोई फायदा है नहीं. उन्होंने यह बात न्यूज एजेंसी एएनआई से कही है. लालू प्रसाद यादव के बड़े पुत्र तेज प्रताप यादव ने कहा कि अपने जीवनसंगिनी के साथ घुट-घुट कर जीना नहीं चाहते हैं. उन्होंने कहा कि यह सच्चाई है कि हमने तलाक के लिए कोर्ट में अर्जी दाखिल किया है. कोर्ट का निर्णय करेगी के ऐसी जिंदगी जीने से घुट-घुट कर जीना बेहतर है या तलाक ले लेना. उन्होंने कहा कि इस बात में पूरी सच्चाई है कि हमें अब ऐश्वर्या राय के साथ रहना मुश्किल है. हम घुट-घुट कर जीना नहीं चाहते हैं. गौरतलब है कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) अध्यक्ष लालू प्रसाद के बड़े बेटे और राज्य के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री तेजप्रताप यादव ने शुक्रवार को एक स्थानीय अदालत में अर्जी दाखिल कर अपनी पत्नी ऐश्वर्या राय से तलाक की गुहार लगाई है. हालांकि ऐश्वर्या राय के परिजनों के साथ मिलकर राबड़ी देवी देर रात तक सुलह समझौता रही रहीं और फैसला लिया गया है कि ऐश्वर्या अपनी ससुराल में ही रहेंगी लेकिन तेज प्रताप के बयान से ऐसा लग रहा है कि वह मानने के लिए तैयार नहीं है.
  • Statue of Unity: 250 इंजीनियर, 3,400 मजदूर और लगे 4 साल, यूं तैयार हुई दुनिया की सबसे ऊंची सरदार पटेल की प्रतिमा, 10 बातें
    सरदार वल्लभ भाई पटेल( Vallabhbhai Patel) की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' (Statue of Unity) का 31 अक्टूबर को अनावरण हो गया. उनकी 143 वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भव्य समारोह में अनावरण किया. इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी के शौर्य के समावेश थे सरदार पटेल. उन्होंने कहा कि जब सबको लगता था कि देश ऐसे ही बिखरा रहेगा, ऐसे निराशा के दौर में सरदार पटेल ही आशा की किरण थे. अपनी ऊंचाई के कारण यह प्रतिमा अब दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बन गई है. दुनिया में अब दूसरे स्थान पर चीन में स्प्रिंग टेंपल में बुद्ध की मूर्ति है, जिसकी ऊंचाई 153 मीटर है. सरकार आमदनी के लिए टिकट भी लगाएगी. यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मूर्ति बनाने वाली कंपनी एलएंडटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक एस एन सुब्रमण्यन ने कहा, "स्टैच्यू आफ यूनिटी जहां राष्ट्रीय गौरव और एकता की प्रतीक है वहीं यह भारत के इंजीनियरिंग कौशल तथा परियोजना प्रबंधन क्षमताओं का सम्मान भी है." इस मूर्ति के प्रमुख शिल्पकार 92 वर्षीय राम वी. सुतार हैं.
  • Statue of Unity: सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा की 8 साल पहले हो गई थी प्लानिंग, पीएम मोदी के भाषण की 10 बातें
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी((Prime Minister Narendra Modi) ने सरदार वल्लभ भाई पटेल (Sardar Vallabhbhai Patel) की जयंती पर बुधवार को उनकी 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' (Statue of Unity) का अनावरण किया. 182 मीटर ऊंची यह प्रतिमा दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. इससे पहले चीन के स्प्रिंग टेंपल में बुद्ध की 153 मीटर ऊंची मूर्ति के नाम पर यह रिकॉर्ड था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी दुनिया का एक अजूबा है. उन्होंने कहा, सरदार साहब का सामर्थ्य तब भारत के काम आया था, जब 'मां भारती' साढ़े पांच सौ से ज्यादा रियासतों में बंटी पड़ी थी. मोदी ने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि उस दौर में भी निराशावादी थे, जो समझते थे कि भारत अपनी विविधताओं से ही बिखर जाएगा, मगर सरदार पटेल ने कौटिल्य की कूटनीति और शिवाजी महाराज के शौर्य का समावेश थे. पांच जुलाई 1947 को रियासतों को संबोधित करते हुए सरदार साहब ने कहा था-विदेशी आक्राताओं के सामने हमारे आपसी झगड़े, आपसी दुश्मनी और बैर का भाव ही हमारी सबसे बड़ी कमजोरी है. इस गलती को नहीं दोहराना है. सरदार साहब के आह्वान पर देश के सैकड़ों राजे-रजवाड़े ने त्याग की मिसाल कायम की थी. इस त्याग को भी नहीं भूलना चाहिए था.
  • 92 साल का वह शिल्पकार जिसने गढ़ी 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' और बना दिया रिकॉर्ड
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' (Statue of Unity) का अनावरण करने जा रहे हैं. यह दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा है. अभी चीन का स्प्रिंग टेंपल बुद्ध पहले स्थान पर था, लेकिन अब भारत की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी ने इसे पछाड़ दिया है. सरदार पटेल की प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी (Statue Of Unity) की ऊंचाई 182 मीटर है. जबकि चीन के स्प्रिंग टेंपल बुद्ध की ऊंचाई 153 मीटर है. इस प्रतिमा को देश-दुनिया में शिल्प कला की मिसाल के तौर पर भी पेश किया जा रहा है, लेकिन क्या जानते हैं कि इस शिल्प यानी प्रतिमा के पीछे शिल्पकार कौन है? ये हैं राम वी. सुतार. स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पद्मभूषण से सम्मानित 92 वर्षीय शिल्पकार राम वी. सुतार की कल्पना है और उन्होंने ही इस प्रतिमा को डिजाइन किया है. इससे पहले भी वे सैकड़ों प्रतिमाएं बना चुके हैं. जिसमें संसद भवन परिसर में लगी महात्मा गांधी की प्रतिमा भी शामिल है. 
  • सरदार पटेल की 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' का आज पीएम मोदी ने किया अनावरण, जानें  10 बड़ी बातें
    दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा के रूप में सरदार वल्लभभाई पटेल ( Vallabhbhai Patel) की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी  (Statue of Unity)  का आज(बुधवार) गुजरात में अनावरण हुआ. यह समारोह सरदार पटेल की 31 अक्टूबर को जयंती के मौके पर आयोजित है. पटेल की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा को विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा बताया जा रहा है.गुजरात के राज्यपाल ओपी कोहली, मुख्यमंत्री विजय रूपाणी, गृह राज्यमंत्री प्रदीप सिंह जडेजा और मुख्य सचिव जे एन सिंह ने अहमदाबाद हवाई अड्डे पर प्रधानमंत्री मोदी की अगवानी की.एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि मोदी रात्रि विश्राम के लिए गांधीनगर स्थित राजभवन रवाना हुए. वह प्रतिमा का अनावरण करने के लिए बुधवार सुबह नर्मदा जिले के सरदार सरोवर बांध के पास केवडिया कॉलोनी जाएंगे.मोदी ने यहां पहुंचने से कुछ घंटे पहले ट्वीट किया, ‘‘कल, सरदार पटेल की जयन्ती के मौके पर, ‘स्टेच्यू ऑफ यूनिटी' राष्ट्र को समर्पित की जाएगी.  नर्मदा के तट पर स्थित यह प्रतिमा महान सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि है.''
  • 80 फुट के पैर, 70 फुट के हाथ, ऊंचाई 600 फुट - सरदार पटेल की दुनिया में सबसे ऊंची प्रतिमा - जानें 10 खास बातें
    सरदार वल्लभ भाई पटेल( Vallabhbhai Patel) की 182 मीटर ऊंची प्रतिमा 'स्टैच्यू ऑफ यूनिटी' (Statue of Unity) का 31 अक्टूबर को उनकी जयंती पर उद्घाटन होगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में भव्य तरीके से आयोजित समारोह में इस मूर्ति के उद्घाटन की तैयारी है. अपनी ऊंचाई के कारण यह प्रतिमा अब  दुनिया की सबसे ऊंची मूर्ति बन गई है. दुनिया में अब दूसरे स्थान पर चीन में स्प्रिंग टेंपल में बुद्ध की मूर्ति है, जिसकी ऊंचाई 153 मीटर है. गुजरात सरकार को उम्मीद है कि इस विशालकाय मूर्ति को देखने के लिए देश ही नहीं विदेशों के पर्यटक भी आएंगे. इस नाते सरकार की ओर से पर्यटकों के ठहने के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है. सरकार आमदनी के लिए टिकट भी लगाएगी. यह प्रतिमा नर्मदा नदी पर सरदार सरोवर बांध से 3.5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. मूर्ति बनाने वाली कंपनी एलएंडटी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी एवं प्रबंध निदेशक एस एन सुब्रमण्यन ने कहा, "स्टैच्यू आफ यूनिटी जहां राष्ट्रीय गौरव और एकता की प्रतीक है वहीं यह भारत के इंजीनियरिंग कौशल तथा परियोजना प्रबंधन क्षमताओं का सम्मान भी है." 
  • पीएम मोदी के जापान दौरे से भारत को क्या मिला, दुनिया के सबसे बड़े द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली करार से कितना फायदा, 15 बड़ी बातें
    भारत और जापान ने आपस में 75 अरब डालर के बराबर विदेशी मुद्रा की अदला-बदली की व्यवस्था का करार किया है. यह सबसे बड़े द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली व्यवस्था समझौतों में से एक है. वित्त मंत्रालय ने सोमवार को कहा कि जापान के साथ इस तरह की सुविधा से रुपये की विनिमय दर तथा पूंजी बाजारों में बड़ी स्थिरता बनाए रखने में मदद मिलेगी. इस समझौते से दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और प्रगाढ़ होगा तथा इसमें विविधता बढ़ेगी. जापान की यात्रा पर गये प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे की प्रतिनिधि स्तर की वार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने भारत-प्रशांत क्षेत्र में स्थिति, द्विपक्षीय, क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की. दोनों नेताओं के बीच शिखर स्तर की बातचीत के बाद भारत-जापान की साझा सोच पर जारी वक्तव्य में कहा गया है, ‘‘वित्तीय तथा आर्थिक सहयोग बढ़ाने के दृष्टिकोण से जापान और भारत की सरकारें 75 अरब डालर के द्विपक्षीय मुद्रा अदला-बदली समझौते (बीएसए) पर सहमति का स्वागत करती हैं.’’
  • 15 से 59 साल के लोगों के लिए मौत की बड़ी वजह बनता जा रहा है ब्रेन स्ट्रोक, जरूर पढ़ें 15 बड़ी ये बातें
    दुनियाभर में फैली तमाम जानलेवा बीमारियों के बीच एक और खतरनाक बीमारी धीरे धीरे लोगों को अपनी गिरफ्त में ले रही है. इस बीमारी का नाम है ब्रेन स्ट्रोक. आज हालत यह है कि दुनिया का हर छठा व्यक्ति कभी न कभी ब्रेन स्ट्रोक का शिकार हुआ है और 60 से ऊपर की उम्र के लोगों में मौत का दूसरा सबसे बड़ा कारण ब्रेन स्ट्रोक है. यह 15 से 59 वर्ष के आयुवर्ग में मौत का पांचवां सबसे बड़ा कारण है. विशेषज्ञों के अनुसार स्ट्रोक आने के बाद 70 फीसदी मरीज अपनी सुनने और देखने की क्षमता खो देते हैं. साथ ही 30 फीसदी मरीजों को दूसरे लोगों के सहारे की जरूरत पड़ती है. आमतौर पर जिन लोगों को दिल की बीमारी होती है उनमें से 20 फीसदी मरीजों को स्ट्रोक की समस्या होती है.
  • तेल के दामों में लगातार नौवें दिन कटौती, क्या उपभोक्ताओं को आगे भी मिलेगी राहत, 10 बड़ी बातें
    अंतर्राष्ट्रीय बाजार में विगत दिनों कच्चे तेल के दाम में आई नरमी से त्योहारी सीजन में भारतीय उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली है. पेट्रोल और डीजल के दाम में रोज कमी हो रही है. आज लगातार नौवें दिन पेट्रोल और डीजल के दाम घटे हैं. आज दिल्ली में पेट्रोल 40 पैसे और डीजल 35 पैसे सस्ता हुआ है. विशेषज्ञों के मुताबिक वाहन ईंधन सस्ता होने से आगे माल-भाड़ा में कमी आएगी, जिसके फलस्वरूप जरूरियात की वस्तुएं सस्ती होंगी. हालांकि जानकार बताते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय परिदृश्य फिलहाल कच्चे तेल में नरमी का संकेत देता है, लेकिन यह नरमी अल्पावधि के लिए ही होगी. 
  • सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई के अंतरिम चीफ सिर्फ 'रबर स्टांप', 10 बड़ी बातें
    सुप्रीम कोर्ट ने छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा पर लगे आरोपों की जांच की निगरानी के लिए शुक्रवार को सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश ए.के.पटनायक की नियुक्ति की है. इस मामले की पूर्ण जांच के लिए केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को दो सप्ताह का समय दिया गया है. सुप्रीम कोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) के निदेशक आलोक वर्मा की अर्जी पर शुक्रवार को सीबीआई, केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) और केंद्र सरकार से जवाब तलब किया. वर्मा ने खुद को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने और सारे अधिकार वापस लिए जाने के सरकार के फैसले को चुनौती दी है. न्यायालय ने निर्देश दिया कि सीबीआई के अंतरिम निदेशक बनाए गए एम. नागेश्वर राव कोई नीतिगत फैसला नहीं करेंगे.
  • CBI vs CBI: आलोक वर्मा की याचिका पर बोले CJI-सीबीआई के अंतरिम चीफ नहीं लेंगे कोई नीतिगत फैसला, 10 बातें
    सीबीआई (CBI vs CBI) में छिड़ी जंग के बीच आज यानी शुक्रवार को सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा (Alok Verma) की अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में सुनवाई हुई. सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जब सार्वजनिक हो गया, तब केंद्र सरकार ने दोनों को छुट्टी पर भेज दिया. मगर केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो के निदेशक आलोक कुमार वर्मा को अधिकार वापस लेकर उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने के खिलाफ उनकी याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की और सीवीसी जांच के लिए महज दो सप्ताह का वक्त दिया. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने आलोक वर्मा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि दो सप्ताह के भीतर सीवीसी जांच पूरी हो जानी चाहिए. साथ ही इसकी रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में केंद्र को देना होगा. दरअसल, आलोक वर्मा ने अपनी याचिका में केंद्र की ओर से उन्हें छुट्टी पर भेजे जाने तथा अंतरिम प्रभार 1986 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के ओडिशा कैडर के अधिकारी तथा एजेंसी के संयुक्त निदेशक एम नागेश्वर राव को सौंपे जाने के फैसले पर रोक लगाने की मांग की है.
  • कौन हैं CBI के अंतरिम निदेशक बनने वाले एम नागेश्वर राव, खास बातें
    सीबीआई (CBI) में मचे घमासान के बीच अहम खबर सामने आ रही है. सीबीआई प्रमुख आलोक वर्मा ( Alok Verma) और स्पेशल डायरेक्टर राकेश (Rakesh Asthana) को छुट्टी पर भेज दिया गया है. दोनों अफसरों को फोर्स लीव पर भेजे जाने के बाद उनके सीबीआई मुख्यालय स्थित दफ्तरों को सील कर दिया गया है. वहीं ज्वाइंट डायरेक्टर एम  नागेश्वर राव (M Nageswar Rao) को सीबीआई का अंतरिम निदेशक बनाया गया है. अग्रिम आदेशों तक अब सीबीआई का कामकाज एम नागेश्वर राव ही देखेंगे. राव की पहचान एक तेज-तर्रार अफसर की है.
  • CBI vs CBI: देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई में 'अंतर्कलह', 10 प्वाइंट्स में जानें क्या-क्या हुआ
    सीबीआई यानी केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) के दो टॉप बॉस आलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना के बीच खींचतान ने अब एक नया रंग ले लिया है और यह विवाद कमने का नाम नहीं ले रहा. सीबीआई के दो बड़े अधिकारियों के बीच मचा घमासान अब अदालत की दहलीज पर पहुंच गया है. दरअसल, मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया कि वह एजेंसी के स्पेशल निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्यवाही में यथास्थिति बरकरार रखे, जबकि एक निचली अदालत ने घूस लेने के आरोप में गिरफ्तार किये गए एजेंसी के डीएसपी देवेंद्र सिंह को सात दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया. इसके अलावा, बताया यह भी जा रहा है कि सीबीआई मांस कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़े एक मामले में एक अन्य कारोबारी को राहत देने के लिए कथित तौर पर उससे रिश्वत लेने के आरोपों में अपने विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से शीघ्र पूछताछ कर सकती है. गौरतलब है कि घुस लेने को लेकर अब अफसरों का मामला सार्वजनिक हो गया है और यह लगातार मीडिया की सुर्खियों में है.
  • CBI के भीतर चल रही 'जंग' को लेकर कांग्रेस का PM मोदी पर हमला, पूछे इन 5 सवालों के जवाब...
    सीबीआई के भीतर चल रही अंदरूनी लड़ाई को लेकर कांग्रेस ने पीएम मोदी पर हमला बोला. कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने पूछा कि प्रधानमंत्री ने कल सीबीआई प्रमुख और रॉ प्रमुख को अपने आवास पर क्यों बुलाया? क्या प्रधानमंत्री भ्रष्टाचार के मामले की चल रही जांच को प्रभावित करना चाहते हैं? कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता ने कहा कि क्या प्रधानमंत्री व्यवस्थित रूप से सीबीआई, ईडी, एसएफआईओ, आयकर विभाग, सीबीडीटी, एनआईए जैसी प्रतिष्ठित जांच संस्थाओं को बंधक बनाकर उनकी स्वायत्तता को खत्म कर रहे हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत की सबसे प्रतिष्ठित जांच संस्था सीबीआई को कमजोर करने, उसकी गरिमा को गिराने के लिये पूरी तरह से जिम्मेदार हैं.
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