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  • लोकसभा चुनाव से पहले कोलकाता में 'सियासी पिच' तैयार, ममता बनर्जी की विपक्षी एकजुटता रैली आज, 10 प्वाइंट में जानें सब कुछ
    कोलकाता (Kolkata) का ब्रिगेड परेड ग्राउंड लोकसभा चुनाव के लिए सियासी पिच का गवाह बनने को तैयार है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की महारैली में शनिवार यानी आज न सिर्फ विपक्षी एकता की झलक दिखेगी, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार को एक संदेश देने की भी कोशिश होगी. करीब 20 विपक्षी दलों के एक मंच पर जुटान से लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) से ठीक पहले ऐसा लगने लगा है कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बार फिर से विपक्षी एकता की झलक देखने को मिल सकती है. इतना ही नहीं, लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों की क्या रणनीति होगी इसका भी खाका तैयार करने पर जोर होगी. ममता बनर्जी की कोलकाता में होने वाली ‘संयुक्त विपक्षी रैली' में विपक्षी दलों से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, डीएमके चीफ एमके स्टालिन, पूर्व बीजेपी नेता अरुण शौरी, शरद यादव, अरविंद केजरीवाल आदि शामिल हो सकते हैं. 
  • कर्नाटक सरकार संकट में? कांग्रेस के 5 विधायक कर सकते हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस, 10 बड़ी बातें
    कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के 7 महीने बाद एक बार फिर राज्य सरकार को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं. खबर है कि कांग्रेस के 5 विधायक गायब हैं. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी 'ऑपरेशन लोटस' के तहत सरकार गिराने की कोशिश कर रही है. वहीं बीजेपी ने भी अपने सभी 14 विधायकों को गुरुग्राम के होटल में टिका दिया रखा है. अब यह अभी तक पुख्ता नहीं हो रहा है कि आखिर किसको किसका खौफ है. राज्य में 224 सीटें जिसमें 104 बीजेपी, कांग्रेस 80, जेडीएस-37, बीएसपी-01, केपीजेपी-01, निर्दलीय-01 सीटें है. कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.
  • बीएसपी-सपा के गठबंधन के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल, 8 अहम बातें
    बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह घोषणा की है कि दोनों दल लोकसभा का चुनाव मिलकर लड़ेंगे. मायावती ने बसपा-सपा गठबंधन को 'नई राजनीतिक क्रांति का आगाज' करार देते हुए कहा कि इस गठबंधन से 'गुरू-चेला' (नरेंद्र मोदी और अमित शाह) की नींद उड़ जाएगी. उन्होंने कहा, 'नए वर्ष में यह एक प्रकार की नई राजनीतिक क्रांति की शुरुआत है. इस गठबंधन से समाज की बहुत उम्मीदें जग गई हैं. यह सिर्फ दो पार्टियों का मेल नहीं है बल्कि सर्वसमाज (दलित, पिछड़ा, मुस्लिम, आदिवासी, गरीबों, किसानों और नौजवानों) का मेल है. यह सामाजिक परिवर्तन का बड़ा आंदोलन बन सकता है.' यह पूछे जाने पर कि यह गठबंधन कितना लंबा चलेगा, इस पर मायावती ने कहा कि गठबंधन 'स्थायी' है. यह सिर्फ लोकसभा चुनाव तक नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में भी चलेगा और उसके बाद भी चलेगा. मायावती ने बसपा और सपा के 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल का नाम तक नहीं लिया. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि दो सीटें अन्य दलों के लिए छोड़ी गई हैं.
  • सीबीआई में घूसकांड : आलोक वर्मा का इस्तीफा, राकेश अस्थाना को कोर्ट से झटका, बीते 2 दिनों में हुई 10 बड़ी बातें
    मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक के पद पर रहे आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि उनके इस पद पर बने रहने के फैसले पर सेलेक्ट कमेटी फैसला करेगी. सेलेक्ट कमेटी में प्रधानमंत्री मोदी, सुप्रीम कोर्ट के जज सीकरी और कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे. समिति ने 2:1 के फैसले से सीवीसी की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आलोक वर्मा को सीबीआई से हटा दिया. के 1979 बैच के आईपीएस वर्मा का तबादला महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद पर कर दिया गया था. सीबीआई निदेशक के पद पर वर्मा का दो सालों का कार्यकाल आगामी 31 जनवरी को पूरा होने वाला था. हालांकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे हटाने के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इस फैसले के खिलाफ डिसेंट नोट भी लिखा है. सीवीसी की रिपोर्ट में आलोक वर्मा के खिलाफ कई गंभीर आरोप थे. जिसमें लालू प्रसाद यादव से जुड़े आईआरसीटीसी घोटाले में एक अधिकारी को बचाने की कोशिश की और गुरुग्राम जमीन अधिग्रहण मामले में भी उनका नाम सामने आया था.
  • इसरो प्रमुख ने कहा- भारत दिसंबर 2021 तक अंतरिक्ष में भेजेगा अंतरिक्ष यात्री, 10 बड़ी बातें
    इसरो प्रमुख ने शुक्रवार को कहा कि भारत का दिसंबर 2021 तक अंतरिक्ष में मनुष्य को भेजने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि हम अपने गगनयान प्रोजेक्ट की मदद से ऐसा कर पाने में सफल होंगे. अगर हम निर्धारित समय के अंदर ऐसा कर पाते हैं तो हमारा देश विश्व का चौथा ऐसा देश होगा जो अपने बल पर अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेज सकेगा. इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि भारत इस साल अप्रैल तक चंद्रयान-2 के भी लांचिंग की तैयारी में है. बता दें कि गगनयान प्रोजेक्ट की घोषणा पिछले साल पीएम मोदी ने की थी. 
  • 'SC ने बनाया, PM के पैनल ने हटाया': आलोक वर्मा की CBI से छुट्टी पर सियासी हमले तेज, 10 प्वाइंट में पूरा मामला
    सीबीआई डायरेक्टर पद से आलोक वर्मा की छुट्टी कर दी गई है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल किये जाने के मात्र दो दिन बाद आलोक वर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक हाई पावर सेलेक्शन कमेटी ने ने गुरुवार को एक मैराथन बैठक के बाद एक अभूतपूर्व कदम के तहत भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों में सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कल सेलेक्शन कमेटी की बैठक में 2:1 से ये फ़ैसला लिया गया. पैनल में मौजूद पीएम मोदी और चीफ़ जस्टिस के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद जस्टिस एके सीकरी वर्मा को हटाने के पक्ष में थे. वहीं पैनल के तीसरे सदस्य के तौर पर मौजूद लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आलोक वर्मा को हटाने के विरोध में थे. उन्होंने समिति को विरोध की चिट्ठी भी सौंपी. पैनल ने पाया कि सीवीसी ने आलोक वर्मा पर गंभीर टिप्पणियां की हैं. पैनल को लगा कि आलोक वर्मा जिस तरह के संवेदनशील संस्था के प्रमुख थे, उन्होंने वैसा आचरण नहीं किया.
  • सवर्णों के आरक्षण पर संसद की मुहर: किसी ने बताया 'राजनीतिक स्टंट', तो किसी ने सवर्णों से 'धोखा', 10 खास बातें
    सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को बुधवार को संसद की मंजूरी मिल गयी. राज्यसभा ने करीब 10 घंटे तक चली बैठक के बाद संविधान (124 वां संशोधन), 2019 विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से मंजूरी दे दी. इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया. लोकसभा ने इस विधेयक को मंगलवाार को ही मंजूरी दी थी जहां मतदान में तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया था. उच्च सदन में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया. कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाये जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जतायी. हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिये लाया गया है. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया. 
  • आर्थिक आधार पर आरक्षण: 'लोकसभा में पास, राज्यसभा से आस', मोदी सरकार की 'अग्निपरीक्षा' आज, 10 बड़ी बातें
    लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मोदी सरकार (Modi Govt) ने बड़ा दांव खेलकर विपक्ष के चुनावी हमलों को एक तरह से कमजोर कर दिया है. मोदी सरकार ने अपने मास्टरस्ट्रोक के तहत आर्थिक तौर पर कमजोर सवर्णों (quota Bill for economically weak in general category) को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने का फ़ैसला किया है. आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पेश किया और उसे पारित भी करा लिया. बिल के समर्थन में जहां 323 वोट पड़े वहीं, विरोध में महज 3 वोट. हालांकि, राज्यसभा में आज यानी बुधवार को इस बिल को पेश किया जाएगा. राज्यसभा में इस बिल को लेकर सरकार की अग्निपरीक्षा होगी. हालांकि, लोकसभा में जिस तरह से विपक्षी पार्टियों ने अपने तेवर दिखाए, उससे नहीं लगता कि सरकार को यहां से पास कराने में खासा परेशानी होगी, मगर कांग्रेस की जेपीसी की मांग इस बिल को लटका सकती है. 
  • सवर्ण आरक्षण बिल: लोकसभा में 5 घंटे की चर्चा के दौरान नेताओं ने क्या-क्या कहा?
    सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाया गया बिल लोकसभा में पास हो गया. लगभग पांच घंटे की चर्चा के बाद यह बिल मंगलवार को लोकसभा में पास हुआ. बिल के समर्थन में 323 वोट और विरोध में महज 3 वोट पड़े. लगभग सभी दलों ने इसका पक्ष लिया, लेकिन किसी ने भी इसका खुलकर विरोध नहीं किया. राज्यसभा में बुधवार को इस बिल को पेश किया जाएगा. इस बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समर्थन करने वाले सभी सांसदों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आरक्षण बिल पास होना देश के इतिहास में ऐतिहासिक पल है. हालांकि, कई सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल भी खड़े किए. कांग्रेस ने कहा कि वह आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए विधेयक के समर्थन में है, लेकिन उसे सरकार की मंशा पर शक है. 
  • आर्थिक आधार पर आरक्षण : कौन सा दल है पक्ष में और कौन खड़ा है विपक्ष में? जानें- विस्तार से
    जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला संविधान का 124वां संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने यह विधेयक पेश किया. एक दिन पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी प्रदान की थी. आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दी थी.  सूत्रों के अनुसार, यह कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से अलग होगा. सामान्य वर्ग को अभी आरक्षण हासिल नहीं है.  समझा जाता है कि यह आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा, जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है. आरक्षण का लाभ उन्हें मिलने की उम्मीद है जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रूपये से कम होगी और 5 एकड़ तक जमीन होगी. मोदी सरकार के इस फैसले का ज्यादातर विपक्षी दलों ने स्वागत किया है, हालांकि कुछ दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल भी खड़े किये हैं और इसे महज चुनावी स्टंट बताया है. आइये आपको बताते हैं कि आर्थिक आधार पर आरक्षण के मुद्दे पर विभिन्न राजनैतिक दलों की क्या राय है. 
  • सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को मिली दफ्तर जाने की इजाजत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 8 बड़ी बातें
    सीबीआई में रिश्वत कांड के बाद CBI चीफ आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आलोक वर्मा अभी कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हैं. वह अपने दफ्तर जा सकते हैं. आपको बता दें कि सीबीआई में विवाद उस समय शुरू हुआ था जब सीबीआई के दूसरे नंबर के अधिकारी राकेश अस्थाना पर रिश्वत लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी. यह अपने आप में पहली बार था जब सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर पर सीबीआई ने ही केस दर्ज किया हो. लेकिन इस कार्रवाई के बाद राकेश अस्थाना ने भी चीफ पर 2 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगा दिया. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप झेल रहे मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़ा था. इसके बाद दोनों अधिकारियों मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. फिलहाल इस मामले की सुनवाई अभी कोर्ट में है. आज जस्टिस संजय किशन कौल ने फैसला सुनाया है क्योंकि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई छुट्टी पर हैं. फैसले के वक्त जस्टिस जोसेफ भी मौजूद थे. फैसला तीनों जजों की सहमति से लिखा गया है.
  • किन्हें मिलेगा गरीब सवर्णों के आरक्षण का लाभ और क्या हैं शर्तें, 5 अहम बातें
    सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों को 10 प्रतिशत आरक्षण देने के कैबिनेट के फैसले का भाजपा सहित सहयोगी रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (आ) तथा लोजपा ने स्वागत करते हुए इसे सामाजिक न्याय के क्षेत्र में क्रांतिकारी कदम बताया और कहा कि इस फैसले ने सामाजिक न्याय का नया पन्ना खोला है और इससे समाज में सद्भाव बढ़ेगा. आरपीआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले ने केंद्र सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर सवर्णों को आरक्षण दिए जाने के निर्णय का स्वागत हुए कहा कि प्रधानमंत्री.नरेंद्र मोदी जी का यह क्रांतिकारी कदम है और इससे समाज में आपसी सद्भाव बढेगा. उन्होंने यह भी कहा कि यह मांग वह पिछले 20 वर्षो से कर रहे थे और एनडीए की कई बैठकों में प्रधानमंत्री के समक्ष इस विषय को लगातार उठया था. अठावले ने संवाददाताओं से कहा कि सवर्ण समाज में भी आर्थिक रूप से बहुत लोग पिछड़े हुए है और वह समाज की मुख्यधारा से वंचित है लेकिन केंद्र सरकार के इस निर्णय के बाद उनको राहत पहुंचेगी. उन्होंने यह भी कहा कि देश के विभिन्न प्रदेशों में अलग -अलग वर्गों के लोगों द्वारा आरक्षण दिए जाने को लेकर चल रहे आंदोलन में भी अब रोक लगेगी. उन्होंने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री.नरेंद्र मोदी पर पूरा विश्वास है और भारत रत्न बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर द्वारा बनाए गए संविधान में संसद को अधिकार है कि विधेयक लाकर कानून को संशोधित कर नया कानून बना सकती है. बीजेपी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मोदी सरकार ने निर्धन सवर्णों को भी नौकरी, शिक्षा में 10% आरक्षण देने का फैसला किया है. लोकजनशक्ति पार्टी के नेता चिराग पासवान ने भी इस फैसले का स्वागत किया है.
  • PM मोदी का मास्टर स्ट्रोक : गरीब सवर्णों के आरक्षण बिल पर कांग्रेस के बाद अब मायावती ने भी किया समर्थन का ऐलान, 15 बड़ी बातें
    लोकसभा चुनावों से पहले एक बड़ा कदम उठाते हुए केंद्रीय कैबिनेट ने 'आर्थिक रूप से कमजोर' तबकों के लिए नौकरियों एवं शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दी है. बीजेपी के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को आरक्षण दिया जाए. बीजेपी ने मोदी सरकार के इस कदम को 'ऐतिहासिक' करार दिया जबकि विपक्ष ने इसके समय पर सवाल उठाया. कांग्रेस ने इसे 'चुनावी जुमला' करार दिया. बहरहाल, विपक्षी पार्टियों ने सरकार के इस कदम को अपना समर्थन व्यक्त किया है. एक शीर्ष सरकारी अधिकारी ने कहा कि सामाजिक न्याय मंत्री थावरचंद गहलोत मंगलवार को संसद में विधेयक पेश कर सकते हैं. हालांकि अब तय हो गया है कि इस पर आज ही विधेयक पेश किया जाएगा. इस विधेयक के जरिए पहली बार गैर-जातिगत एवं गैर-धार्मिक आधार पर आरक्षण देने की कोशिश की गई है. प्रस्तावित आरक्षण अनुसूचित जातियों (एससी), अनुसूचित जनजातियों (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्गों (ओबीसी) को मिल रहे आरक्षण की 50 फीसदी सीमा के अतिरिक्त होगा, यानी ‘‘आर्थिक रूप से कमजोर’’ तबकों के लिए आरक्षण लागू हो जाने पर यह आंकड़ा बढकर 60 फीसदी हो जाएगा.
  • राहुल गांधी को बड़ा झटका, सूत्रों के मुताबिक यूपी में अखिलेश-मायावती के बीच सीटें भी तय, 10 अहम बातें
    बीएसपी की प्रमुख मायावती और समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव इस वर्ष होने वाले लोकसभा चुनाव के मद्देनजर सीट-बंटवारे के फॉर्मूले को अंतिम रूप देने के करीब पहुंच गए हैं. सूत्रों ने यह जानकारी दी। सपा के सूत्रों ने बताया कि यादव ने प्रस्तावित गठबंधन के अंतिम पहलुओं पर चर्चा करने के लिए यहां मायावती से मुलाकात की. हालांकि दोनों पार्टियों की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है लेकिन सूत्रों का दावा है कि उत्तर प्रदेश की ये दोनों पार्टियां 37-37 लोकसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगी. उत्तर प्रदेश में लोकसभा की कुल 80 सीटें हैं. सूत्रों ने बताया कि शेष सीटों को कांग्रेस,राष्ट्रीय लोकदल और अन्य छोटी पार्टियों के लिए छोड़ा जायेगा. अगर यह महागठबंधन तैयार होता है तो बीजेपी के साथ-साथ कांग्रेस के लिए भी यह बड़ा झटका होगा.
  • आधा मिनट हुई अयोध्या मामले की सुनवाई, अब नई बेंच में जाएगा मामला, 10 बड़ी बातें
    अयोध्या मामले की सुनवाई अब 10 जनवरी को नई बेंच करेगी और तीन जजों की इस पीठ का गठन 10 जनवरी से पहले कर दिया जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की बेंच ने मुश्किल से आधा मिनट की सुनवाई में कहा कि मई बेंच अब इस मामले में अब आगे की आदेश जारी करेगी. इसके साथ ही यह भी साफ हो गया है कि नई बेंच ही तय करेगी कि मामले की सुनवाई कब से की जाए और यह भी फैसला करेगी मामले की सुनवाई नियमित की जाएगी या नहीं. आपको बता दें कि वकील हरी नाथ राम ने याचिका में कहा है कि इस मामले की अनिश्चितकाल के लिए टाला नहीं जा सकता और सुप्रीम कोर्ट को इस पर जल्द सुनवाई करे.
  • सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के बाद केरल में बिगड़े हालात, 750 से ज्यादा लोग गिरफ्तार, पढ़ें 10 बड़ी बातें
    सबरीमाला मंदिर में दो महिलाओं के प्रवेश के बाद हालात बिगड़ते ही जा रहे हैं. इस घटना के सामने के आने बाद केरल में कई जगह पर स्थानीय लोगों ने राज्य सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन किए. इस दौरान उन्होंने पुलिस पर पत्थर फेंके और अपना विरोध दर्ज कराया. कई जगहों पर स्थानीय संगठनों ने बंद का भी आह्वान किया. गुरुवार शाम होते-होते अलग-अलग जगह हुई हिंसा में 30 से ज्यादा पुलिस वाले घायल हो गए. जबकि पुलिस ने कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए 750 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया.
  • राफेल मामला: राहुल पर अरुण जेटली का पलटवार: मिशेल ने क्यों कहा 'सन ऑफ इटालियन लेडी', पढ़ें 10 काउंटर अटैक
    वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राहुल गांधी ने हमें एक बार फिर निराश किया है क्योंकि हमें इनसे उम्मीद थी कि ये कुछ पुख्ता बातें सदन में रखेंगे. उन्होंने कहा कि कांग्रेस के मुख्य वक्ता ने सब कुछ झूठ बोला है, पिछले छह माह से इस मामले में बोला गया हर शब्द फर्जी और झूठा है. जेटली ने कहा कि ऑडियो टेप फर्जी है और इसकी जांच हो रही है. राफेल पर राहुल गांधी के आरोपों का जवाब देते हुए सरकार की ओर से वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि राहुल गांधी ने जो भी कहा है वह सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ है. कांग्रेस सच को नकार रही है.
  • राफेल मामला: संसद में राहुल गांधी ने लगाई आरोपों की झड़ी, 'PM ने ही अंबानी को दिलाया कॉन्ट्रेक्ट', पढ़ें 8 वार
    कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को लोकसभा में राफेल डील पर हो रही बहस में हिस्सा लिया. इस मौके पर उन्होंने पीएम मोदी पर जमकर हमला बोला. राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने HAL से राफेल का कॉन्ट्रैक्ट छीनकर अनिल अंबानी की कंपनी को दे दिया, जिससे देश के युवाओं का कितना नुकसान हुआ है. अगर यह कॉन्ट्रैक्ट HAL को मिला होता तो देश के युवाओं को रोजगार मिलता ऑनर मिलता. लेकिन मोदी सरकार ने देश के युवाओं को भी धोखा दे दिया. सदन में बहस के दौरान राहुल गांधी ने अनिल अंबानी का भी नाम लिया, जिसपर स्पीकर सुमित्रा महाजन ने उन्हें यह कहकर समझाया कि वो उनका नाम नहीं ले सकते, क्योंकि वो सदन के मेंबर नहीं हैं. राहुल ने इस मौके पर पीएम मोदी को घेरते हुए कहा कि पिछली बार मेर भाषण के बाद उन्होंने एक घंटे का लंबा भाषण दिया, लेकिन राफेल डील पर 5 मिनट भी नहीं बोल पाए. साथ ही राहुल गांधी ने जेपीसी की मांग की.
  • PM मोदी ने राम मंदिर, सर्जिकल स्ट्राइक, चुनावी हार समेत कई मुद्दों पर की बात -Interview की 10 खास बातें...
    चुनावी साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi Interview)ने समाचार एजेंसी ANI को दिए 95 मिनट के इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की. इसमें राम मंदिर (Ram Temple), RBI बनाम सरकार, नोटबंदी (Demonetisation), जीएसटी (GST), मॉब लिंचिंग (Mob Lynching), तीन राज्यों में BJP की हार, कांग्रेस द्वारा की गई किसानों की कर्जमाफी, सर्जिकल स्ट्राइक (Surgical Strike), सीमापार आतंकवाद (Cross Border Terrorism) प्रमुख रूप से शामिल रहे. पीएम मोदी ने कहा कि हमारे लिए साल 2018 बेहद सफल रहा. साल के अंत में 5 राज्यों में चुनावी हार से मोदी लहर खत्म होने की बात को भी उन्होंने खारिज कर दिया. पीएम ने कहा कि हमनें कोई भी ऐसा कार्य नहीं किया है, जिससे देश की जनता हमारी सरकार से दूर जाने की कोशिश करे, मेरा देश की जनता जनार्दन और देश के युवाओं पर पूरा भरोसा है. पीएम ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी सबका साथ-सबका विकास के मंत्र को लेकर के जनविश्वास को जीतते हुए प्रगति कर रही है और पूरे आत्म विश्वास से आगे बढ़ रही है. प्रधानमंत्री मोदी ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण के लिए अध्यादेश लाने पर फैसला न्यायिक प्रक्रिया के पूरा होने के बाद ही लिया जाएगा. आइये जानते पीएम मोदी के भाषण की 10 बड़ी बातें...
  • भीमा-कोरेगांव का आज 201वां विजय दिवस : 5 हज़ार पुलिसकर्मी, 1200 होमगार्ड, CRPF की 12 टीमें, 500 सीसीटीवी और 11 ड्रोन तैनात, 10 बड़ी बातें
    कोरेगांव-भीमा संघर्ष की एक और वर्षगांठ नजदीक होने के साथ पुणे पुलिस इस बार पूरी चौकसी बरत रही है ताकि कोई अप्रिय घटना ना हो. पुणे ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक संदीप पाटिल ने पीटीआई-भाषा से कहा कि इस बार जय स्तंभ के आसपास भारी सुरक्षा व्यवस्था की गयी है. गौरतलब है कि एक जनवरी, 2018 को पुणे के पास स्थित कोरेगांव-भीमा में भड़की जातीय हिंसा मामले को एक साल होने को है. ऐसे में पुणे पुलिस यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह अलर्ट है कि इस बार हिंसा की कोई घटना नहीं हो. महाराष्ट्र के लिए वर्ष की शुरूआत हिंसा से हुई थी और अगले कुछ महीने तक यह मामला कुछ ना कुछ कारणों से लगातार चर्चा में बना रहा. भीमा-कोरेगांव संघर्ष की 200वीं वर्षगांठ के पहले तनाव व्याप्त हो गया था क्योंकि कुछ दक्षिणपंथी संगठनों ने आयोजन का विरोध किया था. पुणे से 40 किलोमीटर दूर कोरेगांव-भीमा में जय स्तंभ पर हर साल लोग इकट्ठा होते हैं. लेकिन पिछले साल हिंसा भड़कने पर भीड़ ने वाहनों में आग लगा दी और दुकानों-मकानों में तोड़फोड़ की थी. पुणे के पूर्व शासक पेशवा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच 1818 में लड़ाई हुई थी.
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