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आज भी मां देती हैं पैसे, चाय की है आदत, गुस्सा नहीं करता: जानें पीएम मोदी की जिंदगी के 10 अनसुने पहलू

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बुधवार को ‘निष्पक्ष और पूरी तरह से गैर राजनीतिक’ बातचीत की.

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आज भी मां देती हैं पैसे, चाय की है आदत, गुस्सा नहीं करता: जानें पीएम मोदी की जिंदगी के 10 अनसुने पहलू

पीएम मोदी और अक्षय कुमार

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अभिनेता अक्षय कुमार के साथ बुधवार को ‘निष्पक्ष और पूरी तरह से गैर राजनीतिक’ बातचीत की. पीएम मोदी ने इस दौरान पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी से जुड़ी उन सभी पहलुओं को साझा किया, जिससे आमतौर पर कम ही लोक वाकिफ हैं. पीएम मोदी ने अपने बचपन से लेकर रियाटरमेंट तक की बातें कीं. इतना ही नहीं, उन्हें किस चीज की तलब है, उनके अकाउंट में कितना पैसा है, वह गुस्सा करते हैं या नहीं, इन तमाम प्रश्नों का बेबाकी से जवाब दिया. पढ़ें अभिनेता अक्षय कुमार के संग पीएम मोदी के बातचीत की 10 खास बातें...
अक्षय कुमार के साथ पीएम मोदी की बातचीत के अंश

  1. मैं आम खाता हूं और मुझे आम पसंद भी है. वैसे जब मैं छोटा था तो हमारे परिवार की स्थिति ऐसी नहीं थी की खरीद कर खा सकें. लेकिन हम खेतों में चले जाते थे और वहां पेड़ के पके आम खाते थे. 
  2. कभी मेरे मन में प्रधानमंत्री बनने का विचार नहीं आया और सामान्य लोगों के मन में ये विचार आता भी नहीं हैं और मेरा जो फैमिली बैकग्राउंड हैं उसमें मुझे कोई छोटी नौकरी मिल जाती तो मेरी मां उसी में पूरे गाओं को गुड़ खिला देती. बचपन में मेरा स्वाभाव था किताबें पढ़ना, बड़े बड़े लोगों का जीवन पढ़ता था. कभी फ़ौज वाले निकलते थे तो बच्चों की तरह खड़ा होकर उन्हें सेल्यूट करता था. मैंने पीएम बनने के बारे में कभी नहीं सोचा था. जो सोचा नहीं था वो बन गया. भटकते-भटकते यहां पहुंच गया.
  3. मैं कभी लोगों पर गुस्सा नहीं हुआ, गुस्सा मनुष्य के स्वभाव का हिस्सा है, सो, भीतर गुस्सा ज़रूर होता होगा, लेकिन उसे व्यक्त करने से रोक लेता हूं. इतने लम्बे समय तक मुख्यमंत्री रहा लेकिन मुझे कभी गुस्सा व्यक्त करने का अवसर नहीं आया. मैं सख्त हूं, अनुशासित हूं लेकिन कभी किसी को नीचा दिखाने का काम नहीं करता. अक्सर कोशिश करता हूं कि किसी काम को कहा तो उसमें खुद इन्वॉल्व हो जाऊं. सीखता हूं और सिखाता भी हूं और टीम बनाता चला जाता हूं. सख्त प्रशासक' की छवि सच नहीं है, मैं बहुत काम करवाता नहीं हूं, खुद करता हूं, सो, लोगों को भी करना पड़ता है.
  4. राजनीतिक दलों के लोगों से अपने रिश्तों के बारे में पीएम मोदी ने बताया कि विपक्षी दलों में भी बहुत अच्छे मित्र हैं. ममता दीदी साल में आज भी मेरे लिए एक-दो कुर्ते भेजती हैं. बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना जी साल में 3-4 बार खास तौर पर ढाका से मिठाई भेजती हैं. ममता दीदी को पता चला तो वो भी साल में एक-दो बार मिठाई जरूर भेज देती हैं.
  5. अगर मुझे अलादीन का चिराग मिल जाये तो मैं उसे कहूंगा की ये जितने भी समाजशास्त्री और शिक्षाविद हैं उनके दिमाग में भर दो कि वो आने वाली पीढ़ियों को ये अलादीन के चिराग वाली थ्योरी पढ़ानी बंद कर दें. उन्हें मेहनत करने की शिक्षा दें. 
  6. मेरे ऊपर बनाए गए मीम (memes) में खुद को कम, क्रिएटिविटी को ज़्यादा देखता हूं, उन्हें देखकर एन्जॉय करता हूं... अगर कोई मीम आपको अच्छा नहीं लगता, और आप उसे देखकर भी संतुलित रहें, तो बनाने वाले का उद्देश्य नाकाम हो जाता है.
  7. मैं अपनी मां को पैसा नहीं भेजता, वही आज भी मुझे पैसा देती हैं. मैं जब भी मं से मिलता हूं वे ही सवा रूपया मुझे देती हैं. 
  8. बचपन से संघ की शाखाओं में जाया करता था, संघ की शाखाओं में वैज्ञानिक खेल खिलाए जाते हैं... शाखाओं के खेलों से अनुशासन और टीम भावना सीखने को मिलती है... वैसे, गुल्ली-डंडा भी बहुत खेला है, योग से ज़्यादा जुड़ा हूं, शारीरिक स्वास्थ्य तैराकी की वजह से है... बचपन में परिवार के सारे कपड़े मैं ही धोया करता था.
  9. सुबह 5 बजे, शाम 6 बजे चाय की आदत है, शरीर को तलब महसूस होने लगती है.
  10. जब मैं गुजरात से CM बना तो मेरा बैंक अकाउंट नहीं था. जब MLA बना तो सेलरी आनी लगी. स्कूल में देना बैंक के लोग आए थे.  उन्होंने बच्चों को गुल्लक दिया और कहा कि इसमें पैसे जमा करें और बैंक में जमा कर दें. लेकिन हमारे पास होता तब तो डालते. तब से अकाउंट यूं ही पड़ा रहा. सरकार की तरफ से एक प्लॉट मिलता है, कुछ कम दाम में मिलता हैय फिर मैंने वो पार्टी को दे दिया. हालांकि कुछ नियम है जिस पर सुप्रीम कोर्ट में मामला है. जैसे ही वह क्लीयर होगा, प्लॉट मैं पार्टी के नाम कर दूंगा.
     



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