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एनडीए की पटना की रैली पर क्यों टिकी हैं सबकी निगाहें

रैली की पूर्व संध्या पर विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव ने कहा है कि नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी जी का गठबंधन घोर अवसरवादिता की पराकाष्ठा है.

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एनडीए की पटना की रैली पर क्यों टिकी हैं सबकी निगाहें

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)

पटना: रविवार को पटना के गांधी मैदान में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी NDA के चुनावी अभियान का बिहार में श्रीगणेश करेंगे. पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार इस मंच से उन्हें एक बार फिर प्रधानमंत्री बनाने के लिए अपील करेंगे. इस रैली पर सबकी निगाहें टिकी हैं. हालांकि तेजस्‍वी यादव ने रैली की पूर्व संध्‍या पर नीतीश कुमार और नरेंद्र मोदी के गठबंधन को लेकर कई सवाल भी उठाए हैं. आइए जानते हैं कि आख़िर वो कौन से कारण हैं जिसके कारण रविवार की यह रैली इतनी महत्वपूर्ण है.
करीब 10 साल बाद मंच साझा करेंगे पीएम मोदी और नीतीश कुमार
  1. सबसे बड़ा कारण यह माना जा रहा है कि यह पहली बार होगा कि बिहार की धरती पर किसी राजनीतिक मंच से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान एक साथ एक मंच पर होंगे. हालांकि इससे पूर्व कई सारे सरकारी कार्यक्रमों में ये तीनों नेता देखे गए हैं लेकिन नीतीश 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान लुधियाना में NDA की रैली के बाद पहली बार मंच साझा करेंगे.
  2. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए भी यह रैली इसलिए महत्वपूर्ण है कि एक ज़माने में उन्हें पानी पी पीकर कोसने वाले और प्रधानमंत्री पद के लिए अनुपयुक्त और देश के लिए घातक बताने वाले बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार गांधी मैदान में उपस्थित लोगों और TV के दर्शकों के सामने उन्हें एक बार फिर प्रधानमंत्री बनाने के लिए लोगों से अपील करेंगे. शायद नरेंद्र मोदी के लिए उनके राजनीतिक जीवन में इससे सुखद कोई दूसरा पहलू नहीं हो सकता क्योंकि 2005 में बिहार में मुख्यमंत्री पद का NDA उम्मीदवार बनने के बाद से ही नीतीश कुमार ने 2013 तक उन्हें चुनाव प्रचार में भाग नहीं लेने दिया था.
  3. इस रैली पर लोगों की निगाहें इस बात को लेकर भी टिकी हैं कि जब आयोजकों में BJP, जेडीयू और लोक जनशक्ति पार्टी तीनों शामिल हैं और तीनों दलों ने अपने सारे संसाधन झोंक दिए हैं तब यह पूर्व में इसी गांधी मैदान में आयोजित लालू यादव की विशाल रैलियों ख़ासकर उनकी ग़रीब रैली का रिकॉर्ड तोड़ पाएगी या नहीं.
  4. इस रैली के लिए लोगों को जुटाने के लिए भाजपा ने सबसे ज़्यादा पहल की है. पार्टी की बिहार इकाई के अध्यक्ष नित्यानंद राय ने दावा किया है कि पांच हज़ार से अधिक बसों के अलावा क़रीब तीस विशेष ट्रेनों से लोग आएंगे.
  5. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए ये भी संतोष की बात होगी कि जब पिछली बार 2013 अक्‍टूबर में वो यहां पार्टी की रैली संबोधित करने आए थे तब लचर सुरक्षा व्यवस्था के कारण एक के बाद एक कई बम धमाके हुए थे. लेकिन इस बार अब वो प्रधानमंत्री हैं और नीतीश कुमार उनके मेज़बान जो ख़ुद सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी ना रह जाये उसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं.
  6. इस रैली के बाद बिहार में एनडीए के घटक दलों में कौन सा दल कौन सी सीट पर अपना उम्मीदवार उतारेगा उसपर फ़ैसला जल्द हो जायेगा.
  7. हालांकि बिहार में पिछले एक महीने के दौरान केंद्र सरकार द्वारा विकास की परियोजना के शिलान्यास की बाढ़ आयी हुई है. हर मंत्रालय अपने-अपने विभाग के प्रोजेक्ट का क्रियान्वयन कर रहा है. लेकिन देखना है कि बिहार के विशेष राज्य के दर्जे पर क्या प्रधानमंत्री कोई नयी घोषणा करते हैं.
  8. इसके अलावा दो ऐसी परियोजनाएं हैं जिसपर केंद्र सरकार ने अब तक नीतीश कुमार को निराश किया है. इसमें से एक है पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा देना, जो मांग प्रधानमंत्री ने सार्वजनिक मंच से ख़ारिज कर दी थी. उसपर क्या चुनाव पूर्व मोदी अपना मन बदलते हैं. दूसरा राज्य में दूसरा AIIMS खोलने की जगह जो भाजपा नेताओं के बीच मूंछ की लड़ाई बन गया है. इस वजह से आज तक यही तय नहीं हो पाया है कि इसका निर्माण कहां होगा.
  9. नरेंद्र मोदी की सभा के दौरान मारे गए भाजपा समर्थक लोगों को आज तक न्याय नहीं मिला है क्योंकि उस बम ब्लास्ट में शामिल सभी अंतकवादी तो गिरफ़्तार हुए लेकिन ट्रायल अभी भी चल रहा है. कुछ परिवार वालों को जो आश्वासन दिया गया वो आज तक लंबित है.
  10. इस रैली का असर राज्य के विपक्षी दलों पर भी पड़ेगा क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि राजद अध्यक्ष लालू यादव महागठबंधन के सहयोगियों के बीच अब सीटों के बंटवारे पर अंतिम फ़ैसला लेंगे.



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