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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 5 बजकर 5 मिनट में ली अंतिम सांस, उनके जीवन से जुड़ी 10 बड़ीं बातें

पहली बार उन्होंने साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, साल 1998 से 19 मार्च से 26 अप्रैल 1999 तक, फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई से 2004 तक.

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 5 बजकर 5 मिनट में ली अंतिम सांस, उनके जीवन से जुड़ी 10 बड़ीं बातें

फाइल फोटो

नई दिल्ली: भारतीय राजनीति में अजातशत्रु, भीष्म पितामह, शिखर पुरुष जैसे शब्दों से पुकारे जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी देश के 10 वें प्रधानमंत्री थे. उन्होंने देश की बागडोर तीन बार संभाली. पहली बार उन्होंने साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, साल 1998 से 19 मार्च से 26 अप्रैल 1999 तक, फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई से 2004 तक. 16 अगस्त को उन्होंने अंतिम सांस ली. वह दो महीने से एम्स में भर्ती थे. प्रधानमंत्री मोदी ने अटल जी को ट्विवटर पर श्रद्धांजलि देते हुये कहा कि हम सबके श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी नहीं रहे. भावनाओं का ज्वार उमड़ रहा है. वहीं बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा है कि अटल जी के विचार, उनकी कविताएं, उनकी दूरदर्शिता और उनकी राजनीतिक कुशलता सदैव हम सबको प्रेरित व मार्गदर्शित करती रहेंगी. भारतीय राजनीति के ऐसे शिखर पुरुष को मैं कोटि-कोटि नमन करता हूँ और ईश्वर से उनकी दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करता हूँ
10 बड़ी बातें
  1. भारतीय राजनीति में अजातशत्रु, भीष्म पितामह, शिखर पुरुष जैसे शब्दों से पुकारे जाने वाले अटल बिहारी वाजपेयी देश के 10 वें प्रधानमंत्री थे. उन्होंने देश की बागडोर तीन बार संभाली. पहली बार उन्होंने साल 1996 में 16 मई से 1 जून तक, साल 1998 से 19 मार्च से 26 अप्रैल 1999 तक, फिर 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई से 2004 तक. 
  2. अपने पूरे राजनीतिक जीवन के दौरान वह 10 बार लोकसभा सदस्य चुने गए और दो बार राज्यसभा के सदस्य बने. उन्होंने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश दिल्ली और गुजरात से लोकसभा चुनाव लड़े. अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघ के संस्थापक सदस्य थे जिसकी शुरुआत श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने 21 अक्टूबर 1951 में की थी. वाजपेयी राष्ट्रीय स्वयंसेवक के संघ के पूर्णकालिक सदस्य रहे.
  3. वाजपेयी ने अपना पहला चुनाव 1957 में उत्तर प्रदेश की बलरामपुर सीट से लड़ा था. वो बाद में पार्टी के 1969 से लेकर 1972 तक अध्यक्ष भी रहे. 19977 में वो मोरार जी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री भी बनाए गए थे. 
  4. अटल जी को 27 मार्च 2015 को देश के सर्वोच्च पुरस्कार 'भारत रत्न' से सम्मानित किया गया. 7 जून को 2015 को उनको बांग्लादेश की ओर 'फ्रेंड्स ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वॉर अवॉर्ड’ सम्मानित किया गया. उनको यह सम्मान बांग्लादेश की आजादी में निभाई गई भूमिका के लिए दिया गया था. वाजपेयी की ओर से यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिया था.
  5. अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था. उनके पिता का नाम श्री कृष्णा बिहारी वाजपेयी और माता का नाम कृष्णा देवी था. हालांकि उनका मूल निवास आगरा के गांव बटेश्वर था. अटल जी के पिता स्कूल में अध्यापक थे. 
  6. स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद अटल जी ने ग्वालियर के विक्टोरिया कॉलेज से हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी विषय से ग्रेजुएशन की पढ़ाई की. इसके बाद उन्होंने कानपुर के डीएवी कॉलेज से राजनीति शास्त्र से एमए किया. उनके रिश्तेदार और दोस्त उनको बापजी कहकर पुकारते थे. वाजपेयी जीवन भर अविवाहित रहे और बाद में उन्होंने एक लड़की को गोद लिया था जिसका नाम उन्होंने नमिता रखा. 
  7. वाजपेयी को भारतीय संगीत और नृत्य काफी पसंद था और हिमाचल प्रदेश का मनाली उनकी पसंदीदा जगहों में से एक था. 
  8. 2004 में आम चुनाव में बीजेपी की हार के बाद उन्होंने भी गिरती सेहत के चलते राजनीति से संन्यास ले लिया. 
  9. वाजपेयी ने राजनीति के अलावा पत्रकारिता में भी जमकर हाथ आजमाए. उन्होंने पांचजन्य, राष्ट्रधर्म जैसी अखबारों और पत्रिकाओं का संपादन भी किया. इसके अलावा वीर अर्जुन, स्वदेश का भी संपादन किया. 
  10. राजनीतिक की 'अटल यात्रा' के दौरान उनको कई सम्मान मिले. जिनमें 2015 में भारत रत्न, 1992 में पद्म विभूषण, 1993 में कानपुर विश्वविद्यालय की ओर डीलिट की मानद उपाधि, 1994 में पंडित गोविंद वल्लभ पंत पुरस्कार, 1994 में सर्वश्रेष्ठ सांसद का पुरस्कार, 1994 में लोकमान्य तिलक पुरस्कार, 2015 में बांग्लादेश मुक्ति युद्ध पुरस्कार. 



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