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ये हैं वो 5 रास्ते, जिससे बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक विधानसभा में साबित कर सकते हैं बहुमत

बीजेपी के पास 104 विधायक हैं और बहुमत के लिये 112 विधायक चाहिये. वहीं कांग्रेस के 78 और जेडीएस के 38 मिलाकर 116 विधायक हैं. इसके अलावा कांग्रेस का दावा है कि 2 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है.

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ये हैं वो 5 रास्ते, जिससे बीएस येदियुरप्पा कर्नाटक विधानसभा में साबित कर सकते हैं बहुमत

बीएस येदियुरप्पा को कर्नाटक विधानसभा में बहुमत साबित करना है

बेंगलुरु: सीएम के तौर पर अपना कई भी कार्यकाल पूरा नहीं कर सके बीएस येदियुरप्पा शनिवार को कर्नाटक विधानसभा में बहुमत साबित करना है. राज्यपाल की ओर से पहले उन्हें 15 दिन का समय दिया था. उन्होंने शुक्रवार की सुबह ही कर्नाटक के नये सीएम के तौर पर शपथ ली है. आज इस मामले में सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि शनिवार को ही बहुमत साबित किया जाए. हालांकि बीजेपी की ओर से पेश हुए वकील मुकुल रोहतगी ने सोमवार तक का समय माना था. बात करें अभी विधायकों की संख्या की तो बीजेपी के पास 104 विधायक हैं और बहुमत के लिये 112 विधायक चाहिये. वहीं कांग्रेस के 78 और जेडीएस के 38 मिलाकर 116 विधायक हैं. इसके अलावा कांग्रेस का दावा है कि 2 निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन है. इन हालात में सीएम येदियुरप्पा के पास 5 विकल्प हो सकते हैं.
बीएस येदुरप्पा के सामने हैं ये 5 विकल्प
  1. बीजेपी के कहने पर अगर कांग्रेस और जेडीएस के विधायक वोटिंग के दौरान सदन में अनुपस्थित रहें या फिर उसके पक्ष में वोट कर दें. कांग्रेस और जेडीएस व्हीप जारी करेगी और तब अगर कोई विधायक अपनी पार्टी के खिलाफ जाकर बीजेपी के पक्ष में वोट करता है तो इससे उनकी सदस्यता जा सकती है. 
  2. सदन में वोट गिने जाते हैं, यह नहीं कि व्हिप का उल्लंघन कर कहां वोट दिया. बीजेपी को वोट देने वालों के खिलाफ बाद में कार्रवाई होती रहेगी.
  3. इसके लिए बीजेपी को बहुमत के आंकड़े के पास लाने के लिए कांग्रेस और जेडीए के 15 विधायकों को इस्तीफा दिलवाना होगा. इस हालत में सदन के सदस्यों की कुल संख्या 222 से 208 हो जाएगी और इस आंकड़े पर बीजेपी आसानी से बहुमत पा जाएगी. 
  4. कांग्रेस के पास 21 और जेडीएस के 10 लिंगायत विधायक हैं. बीएस येदियुरप्पा भी लिंगायत समुदाय के बड़े नेता हैं. अगर वह लिंगायत के नाम पर इन विधायकों को मनाने में कामयाब हो जाते हैं. 
  5. बीजेपी अगर कांग्रेस और जेडीएस के दो तिहाई विधायकों को तोड़ ले जाने में कामयाब हो जाती है तो वह दल-बदल कानून से बच जाएगी. इसके लिए कांग्रेस के 52 और जेडीएस के 26 विधायकों को राजी करना होगा. 



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