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बैंकों के मर्जर पर तेजी से आगे बढ़ेगी सरकार, किए गए खास उपाय - 10 खास बातें

वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक बैंकों के एकीकरण के कुछ मामले चालू वित्त वर्ष के दौरान ही हो सकते हैं.

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बैंकों के मर्जर पर तेजी से आगे बढ़ेगी सरकार, किए गए खास उपाय - 10 खास बातें

वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: सरकार ने देश में बड़े आकार के मजबूत बैंक बनाने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के एकीकरण में तेजी लाने का फैसला किया है. इसका मकसद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की संख्या कम रखकर उन्हें मजबूत बनाना है. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निदेशक मंडलों से आने वाले एकीकरण प्रस्तावों की वैकल्पिक व्यवस्था में समीक्षा की जाएगी.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
  1. वित्त मंत्री ने कहा, 'सार्वजनिक क्षेत्र में कई बैंक हैं. हमारा मकसद मजबूत बैंक बनाना है. एकीकरण को लेकर अभी तक हमारा अनुभव अच्छा रहा है.'
  2. उल्लेखनीय है कि हाल में भारतीय स्टेट बैंक ने अपने पांच सहयोगी बैंकों तथा भारतीय महिला बैंक का खुद में विलय किया है. जेटली ने स्पष्ट किया कि बैंकों के एकीकरण के किसी भी फैसले का एकमात्र आधार व्यावसायिक होगा.
  3. केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में एक वैकल्पिक व्यवस्था के जरिये एकीकरण को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है. एक आधिकारिक बयान मे कहा गया है कि इस फैसले से राष्ट्रीयकृत बैंकों का एकीकरण हो सकेगा और देश में मजबूत और प्रतिस्पर्धी बैंक खड़े हो सकेंगे.'
  4. सरकार का यह फैसला सार्वजिनक क्षेत्र के बैंक कर्मचारियों की नौ विभिन्न यूनियनों के साझा मंच 'यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस' की बैंकों में विलय एवं एकीकरण के खिलाफ एक दिन की हड़ताल करने के एक दिन बाद सामने आया है.
  5. एकीकरण के सैद्धांतिक मंजूरी के प्रस्ताव को वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जांचा परखा जाएगा. एकीकरण के पीछे तर्क बताते हुए जेटली ने कहा कि इससे बैंकों की वाणिज्यिक ताकत बढ़ेगी और एक ही स्थान में संसाधनों के इस्तेमाल को रोका जा सकेगा.
  6. उन्होंने कहा कि ऐसे बैंकों में झटके सहने की क्षमता होगी और वे खुद के बूते संसाधन जुटाने में सक्षम होंगे.
  7. वित्त मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक एकीकरण के कुछ मामले चालू वित्त वर्ष के दौरान ही हो सकते हैं. सूत्रों ने कहा कि इसमें रोजगार का नुकसान नहीं होगा.
  8. बैंकों के निदेशक मंडल से मिलने वाले प्रस्तावों को वैकल्पिक व्यवस्था के समक्ष रखा जाएगा. यह व्यवस्था मंत्रियों की एक समिति की देखरेख में होगी.
  9. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह तय करेंगे कि इस समिति में कौन होगा. सैद्धांतिक मंजूरी के बाद बैंक कानून और सेबी की अनिवार्यता के मुताबिक कदम उठाएंगे.
  10. इस बारे में अंतिम योजना को केंद्र सरकार भारतीय रिजर्व बैंक के साथ विचार-विमर्श के बाद अधिसूचित करेगी.



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