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आम बजट का काउंटडाउन शुरू, वित्त मंत्रालय में अगले सप्ताह शुरू होगी प्रक्रिया - 10 खास बातें

यह बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले अंतिम पूर्ण बजट होगा.

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आम बजट का काउंटडाउन शुरू, वित्त मंत्रालय में अगले सप्ताह शुरू होगी प्रक्रिया - 10 खास बातें

वित्त मंत्री अरुण जेटली (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: वित्त मंत्रालय देश में जीएसटी लागू होने के बाद पहले केंद्रीय बजट (2018-19) पर काम अगले सप्ताह शुरू करेगा. मंत्रालय विभिन्न प्रक्रियाओं के लिए समयसीमा जारी करेगा. वर्तमान सरकार का 2018 में पेश होने वाला बजट पूर्ण रूप से अंतिम बजट होगा, क्योंकि 2019 में आम चुनाव होने हैं.
बजट 2018-19 की तैयारी
  1. वित्त मंत्रालय अगले सप्ताह बजट सर्कुलर जारी करेगा और अक्टूबर से अन्य मंत्रालयों के साथ चालू वित्त वर्ष के लिए व्यय संशोधित अनुमान के लिए विचार-विमर्श शुरू करेगा.
  2. इस सर्कुलर में निर्धारित प्रारूप के साथ बजट आवश्यकता के बारे में वित्त मंत्रालय को जानकारी देने को लेकर समसीमा का जिक्र होगा. आजादी के बाद देश के सबसे बड़े कर सुधार जीएसटी को 1 जुलाई से लागू किया गया था.
  3. वित्त वर्ष 2017-18 के बजट में अप्रत्यक्ष कर राजस्व अनुमान सीमा शुल्क, केंद्रीय उत्पाद और सर्विस टैक्स मद में दिखाया गया.
  4. एक अधिकारी ने कहा कि उत्पाद शुल्क और सेवा कर के जीएसटी में शामिल किए जाने के साथ वर्गीकरण में बदलाव आएगा.
  5. जीएसटी से राजस्व के लिए नए वर्गीकरण को अगले वित्त वर्ष के बजट में शामिल किया जाएगा.
  6. चालू वर्ष के लिए अकाउंटिंग के दो सेट पेश किए जा सकते हैं. इसमें एक अप्रैल-जून के दौरान उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क एवं सेवा कर से प्राप्त राशि तथा अन्य जुलाई-मार्च की अवधि के लिए जीएसटी एवं सीमा शुल्क मद होगा.
  7. अधिकारी ने कहा कि चूंकि जीएसटी दरों के बारे में निर्णय केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता वाली जीएसटी परिषद करेगी, ऐसे में 2018-19 के बजट में उत्पाद एवं सेवा कर से संबंधित कोई कर प्रस्ताव नहीं होगा.
  8. बजट में सरकार की नई योजनाओं और कार्यक्रमों के साथ केवल प्रत्यक्ष कर (व्यक्तिगत आयकर तथा कॉरपोरेट टैक्स) के मामले में बदलाव के प्रस्ताव होंगे. इसके अलावा सीमा शुल्क का प्रस्ताव होगा.
  9. यह बीजेपी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का 2019 में होने वाले आम चुनावों से पहले अंतिम पूर्ण बजट होगा.
  10. चुनावी वर्ष में सीमित अवधि के लिए जरूरी सरकारी खर्च को लेकर मंजूरी या लेखानुदान पेश किया जाता है और नई सरकार ही पूर्ण बजट पेश करती है.



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