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गुजरात में कांग्रेस को 10 बातों का जरूर रखना होगा ध्यान, क्योंकि यह नरेंद्र मोदी का मैदान है

गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब सिर्फ 5 दिन ही बचे हैं. पहले दौर में 89 सीटों पर 9 दिसंबर को और दूसरे दौर में 93 सीटों पर 14 दिसंबर को मतदान होगा

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गुजरात में कांग्रेस को 10 बातों का जरूर रखना होगा ध्यान, क्योंकि यह नरेंद्र मोदी का मैदान है

गुजरात में पहले चरण का मतदान 9 दिसंबर को होगा

गांधीनगर: गुजरात विधानसभा चुनाव के पहले चरण के मतदान में अब सिर्फ 5 दिन ही बचे हैं. पहले दौर में 89 सीटों पर 9 दिसंबर को और दूसरे दौर में 93 सीटों पर 14 दिसंबर को मतदान होगा. अभी तक के चुनाव प्रचार में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बीजेपी को हर मोर्चे पर कड़ी टक्कर देने की कोशिश की है. राहुल के तीखे सवालों ने बीजेपी के लिए परेशानी जरूर खड़ी है वह रोज पीएम मोदी से सवाल पूछ रहे हैं. वहीं दूसरी ओर उन्होंने बीजेपी को हराने के लिए जातिगत घेराबंदी भी इस बार तगड़ी की है. लेकिन इसके बावजूद कांग्रेस के सामने अभी बड़ी चुनौतियां हैं.
मतदान में 5 दिन, कांग्रेस के सामने हैं ये 10 चुनौतियां
  1. केंद्र की राजनीति में आने से पहले अपने तीन बार के शासनकाल में पीएम मोदी ने गुजरात के अंदर अपनी व्यक्तिगत छवि एक मजबूत क्षेत्रीय नेता के तौर पर कर चुके हैं. क्या राहुल गांधी का आक्रामक चुनाव प्रचार और उनके साथ जुड़े जातिगत आंदोलनों के तीनों नेता इस छवि को तोड़ पाने में कामयाब हो पाएंगे.
  2. हाल ही में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में हद से ज्यादा उलझे जातिगत समीकरणों को पीछे छोड़ते हुए प्रचंड बहुमत हासिल किया है. इसके पीछे भी बहुत हद तक पीएम मोदी की ही छवि है. यूपी निकाय चुनाव में भी बीजेपी को ही जीत मिली है तो क्या इसका असर राहुल गांधी या कांग्रेस कम कर पाएगी.
  3. यह नहीं भूलना चाहिए कि नरेंद्र मोदी खुद भी गुजरात से आते हैं. वह इन 2 दिनों में ही 7 रैलियां कर डालेंगे. पीएम मोदी हर रैली में गुजराती में बोलते हैं और गुजराती अस्मिता की बात करते हैं. इस समय देश के सबसे बड़े नेता के तौर पर मोदी वोट मांगेंगे तो हो सकता है अचानक उठा 'भावनात्मक ज्वार' सारे मुद्दों को गौण कर दे. कांग्रेस को यह लड़ाई अंतिम समय तक बिना थके लड़ने होगी.
  4. गुजरात मॉडल में कितनी भी बुराइयां हों लेकिन इसको यह कहकर पूरी तरह से खारिज नहीं किया जा सकता है कि गुजरात में कुछ भी नहीं हुआ है.
  5. विकास के मुद्दे पर शुरू हुआ प्रचार 'जातिवाद' से 'जनेऊ' के जाल में आकर फंस गया है. अब बीजेपी ने बहुत आसानी से इसे मोदी बनाम राहुल बना रही है. कांग्रेस भी अपने मंच से सीधे नरेंद्र मोदी को ही खारिज कर रही है. कहीं यह कांग्रेस के लिए भारी न पड़ जाए.
  6. कांग्रेस को यह नहीं भूलना चाहिए कि 2007 के विधानसभा से पहले भी बिजली के मुद्दे पर सीएम रहते मोदी ने बड़ा आंदोलन झेला था. संघ से जुड़े संगठन भारतीय किसान संघ ने भी विरोध प्रदर्शन किया था. उस समय कई पाटीदार नेता भी मोदी के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद किए हुए थे. उस गुस्से के आगे जीएसटी को लेकर हुई नाराजगी कुछ भी नहीं है.
  7. 2007 के विधानसभा चुनाव में भी मोदी ने पटेलों और क्षत्रियों की नाराजगी झेलते हुए जीत दर्ज की थी क्योंकि उस समय तक वह गुजराती जनमानस के बीच अपनी खुद की छवि गढ़ चुके थे. कांग्रेस ने जिन समीकरणों का सहारा ले रही है वह कितना कारगर होगी यह गौर करने वाली बात होगी.
  8. गुजरात में दलित वर्ग के बीच बीजेपी को लेकर नाराजगी जरूर है. हाल ही में जो घटनाएं हुई हैं उनका असर कितना पड़ा होगा यह तो बाद में पता चलेगा लेकिन उन्हीं घटनाओं को लेकर हुए विरोध के बीच ही बीजेपी ने कांग्रेस को निकाय चुनाव में पराजित किया है.
  9. कांग्रेस को इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि संघ से जुड़े कई संगठन और एनजीओ आदिवासियों और दलितों के बीच काम करते रहते हैं. जो बीजेपी के लिए दिन रात प्रचार कर रहे हैं. 
  10. गुजरात में बीजेपी के पास कार्यकर्ताओं की एक बड़ी फौज है. उसने हर कार्यकर्ता को पन्ना प्रमुख बना रखा है. बूथ मैनेजमेंट में कांग्रेस को 24 घंटे मेहनत करनी होगी. रैलियों में जो भीड़ आ रही है उसे बूथ तक कैसे पहुंचाया जाए इसके लिए कांग्रेस को 'परिश्रम की पराकाष्ठा' करने होगी.



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