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खुले में शौच जाने वालों की संख्या 55 करोड़ से घटकर हुई 25 करोड़, आसान शब्दों में पढ़ें आर्थिक सर्वेक्षण की 15 खास बातें

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश कर दिया है. यह रिपोर्ट देश की आर्थिक स्थिति की वर्तमान स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से मिलने वाले परिणामों को दर्शाती है. वास्तव में यह वित्त मंत्रालय की ओर से पेश की जाने वाली आधिकारिक रिपोर्ट होती है, आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया जाता है कि वर्ष के दौरान विकास की प्रवृत्ति क्या और कैसी रही.

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खुले में शौच जाने वालों की संख्या 55 करोड़ से घटकर हुई 25 करोड़, आसान शब्दों में पढ़ें आर्थिक सर्वेक्षण की 15 खास बातें

वित्त मंत्री अरुण जेटली ( फाइल फोटो )

नई दिल्ली: वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण संसद में पेश कर दिया है. यह रिपोर्ट देश की आर्थिक स्थिति की वर्तमान स्थिति और सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से मिलने वाले परिणामों को दर्शाती है. वास्तव में यह वित्त मंत्रालय की ओर से पेश की जाने वाली आधिकारिक रिपोर्ट होती है, आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट में बताया जाता है कि वर्ष के दौरान विकास की प्रवृत्ति क्या और कैसी रही. सर्वे के मुताबिक साल 2017-18 में GDP 6.75 फीसदी रहने की उम्‍मीद है. यह 2016-17 में 7.1 फीसदी और 2015-16 में 8 फीसदी थी. साल 2018-19 में 7 से 7.5 रहने का अनुमान है. इनडायरेक्‍ट टैक्‍स देने वालों में 50 फीसदी का इजाफा हुआ है. विदेशी मुद्रा भंडार बढ़कर वर्ष 2017-18 में 409.4 बिलियन यूएस डॉलर रहने का अनुमान है. एक्‍सपोर्ट में शानदार ग्रोथ देखने को मिला. वर्ष 2015-16 में जहां यह -15.5 फीसदी निगेटिव ग्रोथ था वहीं वर्ष 2017-18 में इसे 12.1 फीसदी रहने का अनुमान है. इंडस्‍ट्रियल ग्रोथ में पिछले वित्‍त वर्ष 2016-17 की तुलना में 1.4 फीसदी कम रहने का अनुमान है. वर्ष 2016-17 में यह 4.6 फीसदी था वहीं इसे इस वित्त वर्ष 2017-18 में 3.2 फीसदी रहने का अनुमान है.
15 खास बातें
  1. जीडीपी के एक अनुपात के रूप में केन्‍द्र एवं राज्‍यों द्वारा सामाजिक सेवाओं पर व्‍यय 2012-13 से 2014-15 के दौरान 6 प्रतिशत के दायरे में बना रहा था. 2017-18 (बजट अनुमान) में सामाजिक सेवाओं पर व्‍यय 6.6 प्रतिशत है. साल 2017-18 के दौरान लगभग 4.6 करोड़ परिवारों को रोजगार प्रदान किया गया है जिसका कुल योग 177.8 करोड़ व्यगक्ति दिवस होता है, इसमें महिलाओं की 54 प्रतिशत, अनुसूचित जाति की 22 प्रतिशत और अनुसूचित जन जाति 17 प्रतिशत भागीदारी शामिल है.
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  2. 2014 में खुले में शौच जाने वाले व्यक्तियों की आबादी 55 करोड़ थी, जो जनवरी, 2018 में घटकर 25 करोड़ हो गई है. अब तक पूरे देश में 296 जिलों तथा 3,07,349 गांव को खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) घोषित किया गया है. 8 राज्यों और 2 केन्द्रशासित प्रदेशों - सिक्किम, हिमाचल प्रदेश, केरल, हरियाणा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, दमन और दीव तथा चंडीगढ़ – को खुले में शौच से पूर्ण रूप से मुक्त घोषित किया गया है.
  3. राष्ट्रीय प्रदर्श सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएस) को तथा भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) के रिपोर्टों के आधार पर वैसे लोगों जिनकी शौचालय तक पहुंच है, की संख्या में 2016 के मुकाबले 2017 में 90 प्रतिशत वृद्धि दर्ज की गई है. सर्वेक्षण कहता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खुले में शौच जाने वाले व्यक्तियों की संख्या में तेजी से कमी आई है.
  4. सर्वेक्षण में बताया गया है कि 2016 में भारत में स्वास्थ्य हानि के लिए बाल एवं मातृत्व कुपोषण सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण व जोखिम भरा कारक रहा है. अन्य प्रमुख कारक हैं वायु प्रदूषण, आहार आधारित जोखिम, उच्च रक्तचाप तथा मधुमेह आदि हैं. 1990 से 2015 की अवधि के दौरान जीवन प्रत्याशा 10 वर्षों तक बढ़ी है. फिर भी, सर्वेक्षण में इस बात पर चिंता व्यक्त की गई है कि विभिन्न शहरों में नैदानिक जांचों के औसत मूल्यों में भारी अंतर है, जिसका समाधान स्वास्थ्य सेवाओं पर आउट ऑफ पॉकेट एक्सपेंसिस (ओपीई) को कम करने हेतु दरों का मानकीकरण किए जाने की आवश्यकता है.
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  5. सर्वेक्षण में कहा गया है कि कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग/ भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का वास्‍तविक व्‍यय 2017-18 के दौरान बढ़कर 6800 करोड़ (बजट अनुमान) तक पहुंच गया. आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार 2016 के दौरान देश में विभिन्‍न कृषि पर्या क्षेत्रों में खेती के लिए अनाज की 155 उच्‍च पैदावार की किस्‍में/ नस्‍लें जारी की गईं. अनाज- वर्ष 2017 के दौरान देश के विभिन्‍न कृषि पर्यावरणों में खेती के लिए 117 उच्‍च पैदावार किस्‍में/ संकर किस्‍में जारी की गई जिनमें शामिल हैं- चावल की 65 किस्‍में, गेंहू की 14, मक्‍का की 24, रागी की 5, बाजरा की 3, ज्‍वार, जई, कंगनी, कोदो मिलेट, लिटिल मिलेट और प्रोसो मिलेट की एक-एक किस्‍म. 
  6. तिलहन- विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में 28 उच्‍च पैदावार वाली तिलहन की किस्‍में जारी की गई हैं जिनमें 8 सफेद सरसों की, 7 सोयाबीन की, 4 मूंगफली और अलसी की, 3 सूरजमुखी की, 2 अरंडी की और नाइजर की.  दलहन- विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में दहलन की 32 उच्‍च पैदावार की किस्‍में जारी की गईय लोबिया की 10, दाल की 6, मूंग की 3, अरहर, चना और फील्‍ड पी की 2-2, उड़द, राजमा और फावाबीन की एक-एक.  
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  7. वाणिज्यिक फसलें:-विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में वाणिज्यिक फसलों की 24 उच्‍च पैदावार की किस्‍में जारी की गई जिसमें शामिल हैं – कपास की 13, गन्‍ने की 8, जूट की 3.  चारा फसलें-  विभिन्‍न कृषि पर्यावरण क्षेत्रों के संबंध में खेती के लिए चारे की 8 उच्‍च पैदावार की किस्‍में/संकर किस्‍में जारी की गई जिनमें शामिल हैं- जई की 3, बाजरा, नेपियर संकर, चारा ज्‍वार, ग्रेन अमारन्‍यस, चारा चना और मारवल ग्रास की 1-1 किस्‍म. 
  8. जीएसटी पर आर्थिक सर्वेक्षण में यह भी बताया गया है कि नई प्रणाली अपनाने से प्रमुख उत्‍पादक राज्‍यों के कर संग्रह में कमी आने की आशंका निराधार साबित हुई है, क्‍योंकि राज्‍यों के बीच जीएसटी आधार के वितरण को उनकी अर्थव्‍यवस्‍थाओं के आकार से जोड़ दिया गया है. 
  9. आर्थिक सर्वेक्षण के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र के विश्व पर्यटन संगठन (दिसंबर 2017) के अनुसार 2016 में अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आगमन कुल मिलाकर 1.2 बिलियन तक पहुंच गया जो पिछले वर्ष की तुलना में 46 मिलियन अधिक रहा.
  10. 9.19 भारत की सूचना प्रौद्योगिकी-बीपीएम में 8.1 प्रतिशत की दर से वृद्धि हुई और नासकॉम के आंकडों के अनुसार 2015-16 में 129.4 बिलियन अमरीकी डॉलर से बढ़कर 2016-17 में 139.9 बिलियन अमरीकी डॉलर (ई-कॉमर्स तथा हार्डवेयर को छोड़कर) हो गया.
  11. स्वास्थ्य संपदा क्षेत्र का हिस्सा जिसमें मकानों का स्वामित्व भी शामिल है, 2015-16 में भारत की संपदा जीवीए का 7.7 प्रतिशत था, पिछले तीन वर्षों में इस क्षेत्र की विभिन्न कमी आई है जो कि 2013-14 में 7.5 प्रतिशत से कम होकर 2014-15 में 6.6 प्रतिशत हो गई और यहां 215-16 में और घटकर 4.4 प्रतिशत हो गई. 
  12. अनुसंधान और विकास (आर एंड डी) के लिए अलग से कोई शीर्षक नहीं है जिसमें व्यवसायिक, वैज्ञानिक तकनीकी गतिविधियों की हिस्सेदारी होती है। इन सेवाओं में क्रमशः 2014-15 और 2015-16 में 17.5 प्रतिशत और 41.1 की वृद्धि हुई है. 
  13. उपग्रह प्रक्षेपण के मामले में भारत ने पिछले कुछ वर्षों में शानदार प्रदर्शन किया है। मार्च 2017 में 254 उपग्रहों के के प्रक्षेपण के साथ भारत ने सैटलाइट के क्षेत्र में मिसाल कायम की। इससे भारत को काफी मात्रा में विदेशी मुद्रा प्राप्त हुई। 2015-16 और 2016-17 क्रमशः 394 करोड़ और 275 करोड़ रूपये का उपग्रह प्रक्षेपण से राजस्व हासिल हुआ। इसी तरह 2014-15 में 149 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल हुआ. वैश्विक उपग्रह प्रक्षेपण से प्राप्त होने वाले राजस्व में भारत की हिस्सेदारी बढ़ रही है। इसमें 2015-16 में 1 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। 2014-15 में 0.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी.
  14. विज्ञान में निवेश, भारत की सुरक्षा व्यवस्था की मूलभूत आवश्यकता है. नागरिकों की सुरक्षा के लिए, जलवायु परिवर्तन से होने वाली अनिश्चितताओं का सामना करने के लिए तथा नए खतरों जैसे साइबर युद्ध, ड्रोन जैसी स्वायत्त सैन्य प्रणाली से राष्ट्रीय सुरक्षा बनाए रखने की चुनौती के लिए भी विज्ञान में निवेश की आवश्यकता है. 
  15. ग्रॉस स्‍टेट वैल्‍यू एडेड जीएसवीए के अंश और वृद्धि के आधार पर, उसमें काफी अंतर है. 32 राज्‍यों और संघ राज्‍य क्षेत्रों, जिनके लिए 2016-17 के लिए डाटा उपलब्‍ध है (या वर्तमान वर्ष, जिसके लिए डाटा उपलब्‍ध है), में से सेवा जीएसवीए अंश के आधार पर, दिल्‍ली और चंडीगढ़ 80 प्रतिशत अंश के साथ शीर्ष पर हैं, जबकि 31.7 प्रतिशत अंश के साथ सिक्किम सबसे निचले स्‍थान पर हैं. सेवा जीएसवीए के आधार पर, वर्ष 2016-17 में 14.5 प्रतिशत और 7.0 प्रतिशत के साथ क्रमश: बिहार शीर्ष स्‍थान पर और उत्‍तर प्रदेश निचले स्‍थान पर है.



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