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इन 5 कारणों से चीन केे 'वन बेल्ट, वन रोड' प्रोजेक्‍ट का भारत कर रहा है विरोध

चीन का ये अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसका बजट है दस खरब अमेरिकी डॉलर यानी सात सौ ख़रब रुपये है, जो भारत की कुल अर्थव्यवस्था का क़रीब एक तिहाई है

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इन 5 कारणों से चीन केे 'वन बेल्ट, वन रोड' प्रोजेक्‍ट का भारत कर रहा है विरोध

पीएम मोदी (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन सम्मेलन के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी ने इशारों ही इशारों में चीन को नसीहत दे डाली. वन बेल्ट, वन रोड प्रोजेक्ट को लेकर पीएम मोदी ने कहा कि कोई भी प्रोजेक्ट सदस्य देशों की अखंडता और संप्रभुता की क़ीमत पर नहीं होना चाहिए. वन बेल्ट, वन रोड प्रोजेक्ट को लेकर भारत को गहरी आपत्ति है क्योंकि ये पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर से गुज़रता है जो भारत का अभिन्न हिस्सा है, लेकिन पाकिस्तान की तरफदारी करने वाला चीन भारत की चिंता पर ग़ौर करेगा, ऐसा लगता नहीं. वन बेल्ट-वन रोड चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग का सपना है, जिसका मकसद बताया गया है, एशियाई देशों के साथ चीन का संपर्क और सहयोग बेहतर करना और अफ्रीका व यूरोप को भी एशियाई देशों के साथ क़रीबी से जोड़ना. भारत का चीन के इस प्रोजेक्‍ट का विरोध करने के ये हैं पांच कारण....
पांच बातें
  1. वन बेल्ट-वन रोड उस चाइना-पाकिस्तान इकोनॉमिक कोरिडोर यानी चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे से गुज़रता है, जो पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में पड़ता है. भारत इसे अपना हिस्सा मानता है और इस इलाके में आर्थिक गतिविधियों में चीन के शामिल होने पर ऐतराज़ जताता रहा है. इस इलाके में बुनियादी ढांचे को बेहतर करने के लिए चीन अब तक 46 अरब डॉलर का निवेश भी कर चुका है, जिस पर भारत लगातार ऐतराज़ जताता रहा है. 
  2. बेल्ट रोड मुहिम से भारत, पाकिस्तान और चीन के संदर्भ में जम्मू-कश्मीर का मुद्दा केंद्र में आता है. इस मुद्दे को हमेशा भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय मुद्दे के तौर पर ही देखा जाता रहा, लेकिन चीन हमेशा से इसमें भी एक भूमिका निभाता रहा है. दरअसल, सच्चाई ये है कि चीन कश्मीर में तीसरी ताक़त बनने की फिराक में है. 
  3. लद्दाख के एक बड़े इलाके पर चीन का कब्ज़ा है. उसके पश्चिम में पाकिस्तान ने अपने कब्ज़े का एक बड़ा हिस्सा 1962 की भारत-चीन लड़ाई के बाद चीन के सुपुर्द कर दिया है. कराकोरम हाइवे कश्मीर में चीन का पहला सीमापार बुनियादी ढांचा परियोजना है जो साठ के दशक की है. तब से ही पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर में चीन का दखल बढ़ता गया है. चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे के पाकिस्तान के कब्ज़े वाले कश्मीर के साथ जुड़ने से कश्मीर विवाद में चीन की भूमिका और बढ़ गई है.
  4. इस प्रोजेक्ट के तहत ज़मीन और समुद्री रास्तों से व्यापार मार्गों को बेहतर बनाया जाएगा. कई हाईस्पीड रेल नेटवर्क होंगे, जो यूरोप तक जाएंगे. एशिया और अफ्रीका में कई बंदरगाहों से ये रूट गुज़रेगा और इसके रास्ते में कई फ्री ट्रेड ज़ोन आएंगे. चीन दुनिया के 65 देशों को एक-दूसरे के क़रीब लाएगा और दुनिया की दो तिहाई आबादी को अपनी अर्थव्यवस्था से सीधे जोड़ देगा. इसके ज़रिए दुनिया की अर्थव्यवस्था पर अपनी पकड़ और गहरी करने की कोशिश में है. ऐसे समय जब चीन में घरेलू मांग काफ़ी घटी है तो विकास की भूख पूरी करने के लिए उसे दूसरे देशों की ओर तेज़ी से बढ़ना ही होगा और ये प्रोजेक्ट उसके लिए बहुत मददगार साबित हो सकता है. चीन वन बेल्ट-वन रोड के ज़रिए अपने सस्ते और बेहतर उत्पादों को दुनिया के बाज़ारों तक आसानी से पहुंचा पाएगा. उसका लक्ष्य है अगले एक दशक में अपना व्यापार ढाई ख़रब डॉलर और बढ़ा देना. एक तरह से चीन अपने आर्थिक साम्राज्य को ऐसे बढ़ाने जा रहा है जैसा पहले कभी देखा या सुना नहीं गया.
  5. इसके तहत एशिया के तमाम देशों में काम शुरू भी हो चुका है. कहीं पहाड़ों के नीचे सुरंगें खोदी जा रही हैं, कहीं बड़ी-बड़ी नदियों पर लंबे चौड़े पुल बन रहे हैं. कई लेन के हाइवे बन रहे हैं तो हज़ारों किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछ रही हैं. बड़े-बड़े पावर प्लांट बन रहे हैं और सैकड़ों किलोमीटर लंबी गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही हैं. चीन का ये अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है, जिसका बजट है दस खरब अमेरिकी डॉलर यानी सात सौ ख़रब रुपये है, जो भारत की कुल अर्थव्यवस्था का क़रीब एक तिहाई है. इसी से आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये कितनी महत्वाकांक्षी और बड़ी परियोजना है. 



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