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कर्नाटक चुनाव परिणाम: सिद्धारमैया का सबसे बड़ा दांव क्या कांग्रेस पर ही पड़ा भारी? BJP की जीत के 10 बड़े कारण

अभी मिल रहे रुझानों के मुताबिक बीजेपी को 100 से ज्यादा सीटें मिल रही हैं. ऐेसे हालात में जेडीएस को एक बार फिर से किंगमेकर बनने का मौका मिल सकता है.

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कर्नाटक चुनाव परिणाम: सिद्धारमैया का सबसे बड़ा दांव क्या कांग्रेस पर ही पड़ा भारी? BJP की जीत के 10 बड़े कारण

कर्नाटक चुनाव में बीजेपी बनी सबसे बड़ी पार्टी

बेंगलुरु: कर्नाटक में बीजेपी ने काफी बढ़त रही थी लेकिन एक बार फिर आंकड़े बदल रहे हैं और ऐसा लग रहा है कि बीजेपी बहुमत से थोड़ा पीछे रह जायेगी. लेकिन इतना तय हो गया है कि बीजेपी ही राज्य में सबसे बड़ी पार्टी की रूप में उबर ही है. आज शाम बीजेपी संसदीय बोर्ड की बैठक है और बताया जा रहा है कि बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और येदियुरप्पा थोड़ी देर शाम को प्रेस कांन्फ्रेंस करेंगे. कर्नाटक चुनाव में बीजेपी की जीत के कारण रहे हैं. गौरतलब है कि कर्नाटक विधानसभा की 224 सीटों में से 222 सीटों पर मतदान हुआ था. दो सीटों पर चुनाव स्थगित कर दिया गया था. बहुमत के लिए 112 सीटें चाहिये और अभी मिल रहे रुझानों के मुताबिक बीजेपी को 100 से ज्यादा सीटें मिल रही हैं. ऐेसे हालात में जेडीएस को एक बार फिर से किंगमेकर बनने का मौका मिल सकता है.
BJP की जीत के 10 बड़े कारण
  1. बीजेपी ने अपने काडर बीते 5 सालें में बहुत मजबूत बनाया है. बीजेपी कर्नाटक में पहले भी सरकार बना चुकी है. पार्टी वहां साल 1990 से ही काफी सक्रिय है. 
  2. बीजेपी को इस बार बीएस येदियुरप्पा जैसे लिंगायत समुदाय के बड़े नेता के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है. पिछले चुनाव में बीएस येदियुरप्पा और बी. श्रीरामुलू जैसे कद्दावर नेता अलग होकर अपनी पार्टी बना ली थी जिसका नुकसान बीजेपी को उठाना पड़ा था. 
  3. इस बार बीएस येदियुरप्पा को बीजेपी ने सीएम का प्रत्याशी बनाया और बी. श्रीरामुलू को भी सिद्धारमैया के खिलाफ बदामी सीट से चुनाव लड़े. 
  4. सिद्धारमैया ने लिंगायतों को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश करके बड़ा चुनावी दांव चला लेकिन बीजेपी ने इसे हिंदुओं को बांटने का मुद्दा बनाया और वह इसमें कामयाब हो गई. 
  5. वहीं लिंगायतों के अलावा बाकी जातियां कांग्रेस से दूर होती चली गईं. बीजेपी ने वहां 'प्लान बी' के तहत लिंगायतों को अपने पाले में रखने की कोशिश के साथ ही दूसरी जातियों को लुभाने की कोशिश की. इसका नतीजा ये रहा कि बीजेपी को सभी जातियों से वोट मिला.
  6. बीजेपी ने सत्ता विरोधी लहर को खूब भुनाया और साथ ही में पीएम मोदी ने राज्य सरकार के भ्रष्टाचार को भी मुद्दा बनाया. बीजेपी ने सीएम सिद्धारमैया के खिलाफ उनकी महंगी घड़ी की खूब चर्चा की. 
  7. शुरुआत में जब राहुल गांधी प्रचार मेें उतरे थे तो ऐसा लग रहा था कि कांग्रेस  यहां पर सत्ता बचाने में कामयाब हो जाएगी लेकिन पीएम मोदी की रैलियों से भी बीजेपी के पक्ष में माहौल बदला.
  8. बीजेपी को इस बार तटीय इलाके, मुस्लिम बहुल और एसटी-एसटी बहुल सीटों पर भी खासा समर्थन मिला है.
  9. लिंगायतों बहुल इलाके में भी कांग्रेस का दांव नहीं चला और इस बार उसे 40 सीटें मिलीं.
  10. जेडीएस का मजबूत होना भी कांग्रेस के लिए नुकसान साबित हुआ है. ऐस लग रहा है कि कांग्रेस के पक्ष में पड़ने वाला वोट जेडीएस के खाते में चला गया. 



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