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मन की बात : पीएम मोदी ने कहा- युद्धाभ्यास की तरह आपदा प्रबंधन पर भी अभ्यास होना चाहिए, 12 बड़ी बातें

आकाशवाणी पर प्रसारित प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ हम यह न सोचें कि सुरक्षा किसी और के लिए है, अगर हम सब अपनी सुरक्षा के लिए सजग हो जाएं तो समाज की सुरक्षा का भाव भी अन्तर्निहित होता है. अगर हम सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, तो हम सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं.’’

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मन की बात :  पीएम मोदी ने कहा- युद्धाभ्यास की तरह आपदा प्रबंधन पर भी अभ्यास होना चाहिए, 12 बड़ी बातें
नई दिल्ली: भारत को जोखिम के प्रति सतर्क समाज बनने की जरूरत पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज मन की बात कार्यक्रम में कहा कि सतर्क रहकर और आवश्यक नियमों का पालन करके लोग अपने जीवन की रक्षा करने के साथ साथ बहुत बड़ी दुर्घटनाओं को भी टाल सकते हैं. आकाशवाणी पर प्रसारित प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘ हम यह न सोचें कि सुरक्षा किसी और के लिए है, अगर हम सब अपनी सुरक्षा के लिए सजग हो जाएं तो समाज की सुरक्षा का भाव भी अन्तर्निहित होता है. अगर हम सुरक्षा को प्राथमिकता देते हैं, तो हम सुरक्षा प्राप्त कर सकते हैं.’’ इसके साथ ही प्रधानमंत्री मोदी ने नारी शक्ति सबल होने की बात की है. उन्होंने कहा कि न्यू इंडिया का सपना है कि देश के विकास में महिलाओं की भी भागीदारी हो.
12 बड़ी बातें
  1. भारत भौगोलिक और जलवायु की दृष्टि से विविधताओं से भरा हुआ देश है. इस देश ने कई प्राकृतिक और मानव-निर्मित आपदाएं, जैसे रासायनिक एवं औद्योगिक दुर्घटनाओं का सामना किया है. 
  2. विभिन्न आपदाओं के संबंध में बचाव अभियान हो, तब एनडीएमए तुरंत पहुंचता है. दिशानिर्देश भी जारी किये हैं, साथ ही वे क्षमता निर्माण के लिए लगातार प्रशिक्षण के काम भी करते रहते हैं. बाढ़, चक्रवात के खतरे वाले ज़िलों में स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण के लिए भी ‘आपदा मित्र’ नाम की पहल की गई है.
  3. लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए अभियान चलाया गया. मौसम विभाग ने सटीक पूर्वानुमान लगाये. सबकी भागीदारी से एक अच्छा परिणाम सामने आया. साल 2017 में लू से होने वाली मौतों की संख्या अप्रत्याशित रूप से घटकर क़रीब-क़रीब 220 पर आ गई.
  4. जब सार्वजनिक सुरक्षा की बात हो तो दो चीज़ें बहुत महत्वपूर्ण होती हैं पहली है सक्रियता और दूसरी है तैयारी. इस संबंध में आपदा के दौरान सुरक्षा और दैनिक जीवन में सुरक्षा भी दो महत्वपूर्ण पहलू हैं.
  5. प्राकृतिक आपदाओं को छोड़ दें तो ज़्यादातर दुर्घटनाएं कोई न कोई गलती का परिणाम होती हैं. अगर हम सतर्क रहें, आवश्यक नियमों का पालन करें तो हम अपने जीवन की रक्षा तो कर ही सकते हैं, साथ ही, बहुत बड़ी दुर्घटनाओं से भी हम समाज को बचा सकते हैं.’’ 
  6. मेरा तो आग्रह है कि महानगर पालिका, नगर पालिकाएं जिनके पास अग्निशमन वाहन होते हैं उन्हें हफ़्ते में एक बार या महीने में एक बार अलग-अलग स्कूलों में जा करके बच्चों के सामने छद्म अभ्यास करना चाहिये. इससे अग्निशमन को भी सतर्क रहने की आदत रहती है और नयी पीढ़ी को इसकी शिक्षा भी मिलती है इसके लिए कोई अलग से खर्चा नहीं होता, यह एक प्रकार से शिक्षा का ही एक क्रम बन जाता है.
  7. जैसे दुनिया के दूसरे देशों में संयुक्त सैन्य अभ्यास होता है तो क्यों न दुनिया के देश आपदा प्रबंधन के लिए भी संयुक्त अभ्यास करें. भारत ने इसका नेतृत्व किया है. बिम्सटेक देश बांग्लादेश, भारत, म्यांमार, श्रीलंका, थाईलैंड, भूटान और नेपाल ने संयुक्त आपदा प्रबंधन अभ्यास भी किया है.
  8. सामाजिक, आर्थिक जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य, जिम्मेदारी और न्यू इंडिया का सपना है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर 100 वर्ष पूरा करने वाली महिलाओं के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित किये जाएं. 
  9. हर वर्ष 8 मार्च को ‘अन्तरराष्ट्रीय महिला-दिवस’ मनाया जाता है. देश और दुनिया में कई कार्यक्रम होते हैं. इस दिन देश में ‘नारी शक्ति पुरस्कार’ से ऐसी महिलाओं का सत्कार भी किया जाता है जिन्होंने बीते दिनों में भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अनुकरणीय कार्य किया हो
  10. आज देश महिला विकास से आगे महिलानीत विकास की ओर बढ़ रहा है. आज हम महिला विकास से आगे महिला के नेतृत्व में विकास की बात कर रहे हैं. आज सामाजिक, आर्थिक जीवन के हर क्षेत्र में महिलाओं की बराबरी की भागीदारी सुनिश्चित करना हम सबका कर्तव्य है, यह हम सबकी जिम्मेदारी है.
  11. हम उस परंपरा का हिस्सा हैं, जहाँ पुरुषों की पहचान नारियों से होती थी. यशोदा-नंदन, कौशल्या-नंदन, गांधारी-पुत्र, यही पहचान होती थी किसी बेटे की. आज हमारी नारी शक्ति ने अपने कार्यों से आत्मबल और आत्मविश्वास का परिचय दिया है. स्वयं को आत्मनिर्भर बनाया है.’’ 
  12. आख़िर हमारा ‘न्यू इंडिया’ का सपना यही तो है जहाँ नारी सशक्त हो, सबल हो, देश के समग्र विकास में बराबर की भागीदार हो.’’ 



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