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  • Jind-Ramgarh Election Results: रामगढ़ सीट पर जीत के साथ राजस्थान में कांग्रेस का शतक, जींद में BJP आगे, अब तक की 10 बड़ी बातें
    सत्तारूढ़ कांग्रेस ने अलवर की रामगढ़ विधानसभा सीट जीत ली है. इसके साथ ही 200 सीटों वाली विधानसभा में कांग्रेस के पास 100 सीटों का आंकड़ा हो गया है. रामगढ़ सीट के लिए उपचुनाव सोमवार को हुआ था. गुरुवार को हुई वोटों की गिनती में कांग्रेस प्रत्याशी साफिया जुबैर खान को कुल 83,311 मत मिले हैं. उन्होंने अपने निकटतम प्रतिद्वदी भाजपा के सुखवंत सिंह को 12,228 मतों से पराजित कर दिया. दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के सुखवंत सिंह को 71,083 मत मिले. वहीं बसपा उम्मीदवार जगत सिंह 24,856 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. बता दें, सात दिसम्बर को राजस्थान विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पूर्व रामगढ़ विधानसभा क्षेत्र के बसपा प्रत्याशी लक्ष्मण सिंह के निधन के कारण चुनाव स्थगित कर दिये गये थे. यहां दो महिलाओं समेत कुल 20 उम्मीदवार मैदान में थे.
  • पिछले 45 साल में 2017-18 में सबसे ज्यादा रही बेरोजगारी, रिपोर्ट में हुआ खुलासा
    राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय की पीएलएफएस की रिपोर्ट के मुताबिक देश में साल 2017-18 में बेरोजगारी दर पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा थी. अंग्रेजी अखबार बिजनेस स्टैंडर्ड ने इस रिपोर्ट का खुलासा किया है. दिसंबर महीने में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा मंजूरी मिलने के बाद भी इस रिपोर्ट को जारी नहीं किया गया. इसके बाद आयोग के कार्यकारी चेयरपर्सन सहित दो सदस्यों ने इस्तीफा दे दिया. सरकार के अंतरिम बजट से कुछ दिन पहले ही यह रिपोर्ट सामने आई है, ऐसे में लोकसभा चुनाव से पहले काफी विवाद हो सकता है. विपक्षी दल रोजगार के आंकड़ों को लेकर लगातार सरकार को निशाना बना रहे हैं.
  • कर्नाटक में जन्मे, बिहार में जीते, कोकाकोला को भगाया, नीतीश को वाजपेयी से मिलाया, जॉर्ज फर्नांडीज से जुड़ीं 10 बातें जो जाननी चाहिए
    पूर्व रक्षा मंत्री एवं प्रख्यात समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 88 वर्ष के थे. उनकी सहयोगी जया जेटली ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि फर्नांडिस अल्जाइमर बीमारी से पीड़ित थे, जिस कारण वह पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक जीवन से दूर थे. हाल में उन्हें स्वाइन फ्लू भी हो गया था. जया जेटली ने बताया उनका निधन उनके आवास पर हुआ. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में फर्नांडिस रक्षा मंत्री थे, जब 1999 में भारत ने करगिल युद्ध लड़ा था. उनके कार्यकाल के दौरान ही भारत ने 1998 में पोखरण में परमाणु परीक्षण किया था. इंदिरा गांधी को मात देकर 1977 में सत्ता में आई जनता पार्टी के नेतृत्व वाली सरकार में वह उद्योग मंत्री भी रहे. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने समाजवादी नेता के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि वह स्पष्टवादी तथा निडर थे जो हमेशा अपनी विचारधारा पर अडिग रहे. प्रधानमंत्री ने कहा, 'एक दूरदर्शी रेल मंत्री और एक महान रक्षा मंत्री जिसने भारत को सुरक्षित और मजबूत बनाया. अपने कई वर्षों के सार्वजनिक जीवन में वह अपनी विचारधारा पर अडिग रहे. उन्होंने आपातकाल का जोरदार विरोध किया. उनकी सादगी और विनम्रता उल्लेखनीय थी.' कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी फर्नांडीज के निधन पर शोक जाहिर कर उनके परिवार और दोस्तों के प्रति संवेदना व्यक्त की. गांधी ने फेसबुक पोस्ट में कहा, ''पूर्व सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री जॉर्ज फर्नांडीज जी के निधन के बारे में सुनकर दुख हुआ.'' उन्होंने कहा, ''दुख की इस घड़ी में उनके परिवार और मित्रों के प्रति मेरी संवेदना है.''
  • 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम में एक सवाल पर पीएम मोदी ने कहा- ये PUBG वाला है क्या, 10 अहम बातें
    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज देश भर के दो हज़ार से ज़्यादा छात्रों से रूबरू हुए. दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में 'परीक्षा पे चर्चा' कार्यक्रम में पीएम मोदी परीक्षार्थियों को तनाव से उबरने का मंत्र दिया. प्रधानमंत्री ने कहा परीक्षा का महत्व है, लेकिन अगर हम ये सोचें कि यह ज़िंदगी की परीक्षा नहीं है तो हमारा भार कम हो जाएगा. इस परीक्षा के बाहर भी ज़िंदगी है. परीक्षा को एक अवसर मानें और इसका आनंद उठाएं. एक सवाल के जवाब में दौरान एक महिला अभिभावक ने पीएम मोदी को बताया कि पहले मेरा बेटा पढ़ाई में ठीक था, लेकिन आजकल ऑनलाइन गेम्स की वजह से वो कमज़ोर हो गया है. इस पर तुरंत पीएम मोदी ने कहा, 'ये PUBG वाला है क्या'. पीएम के इस जवाब पर पूरा स्टेडियम तालियों से गूंज उठा. प्रधानमंत्री ने अभिभावकों को भी सलाह दी और कहा कि बच्चों पर अपने सपने न थोपें क्योंकि दबाव में बच्चे बिखर जाते हैं. अगर बच्चा असफल भी होता है तो मां-बाप उनका हौसला बढ़ाएं. सोशल स्टेटस की वजह से दबाव न पालें.
  • अयोध्या विवाद : मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से मांगी 67 एकड़ जमीन, अर्जी की 5 बड़ी बातें
    केंद्र ने अयोध्या में विवादास्पद राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद स्थल के पास अधिग्रहण की गई 67 एकड़ जमीन को उसके मूल मालिकों को लौटाने की अनुमति मांगने के लिये न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है. लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार की यह कोशिश एक चुनावी दांव के तौर पर देखा जा रहा है. बीजेपी महासचिव राम माधव ने मोदी सरकार के इस कदम को 'बहुप्रतीक्षित' बताया है. वहीं विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है. विहिप ने कहा कि यह सही दिशा में उठाया गया कदम है.  वहीं सुप्रीम कोर्ट में बार-बार सुनवाई टलने के मुद्दे पर केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने सोमवार को कहा था कि अयोध्या ममाला जो करीब 70 सालों से लंबित है, उसकी जल्द सुनवाई होनी चाहिए क्योंकि देश के लोग वहां एक भव्य राम मंदिर का निर्माण होने की उम्मीद कर रहे हैं, जहां कभी बाबरी मस्जिद हुआ करती थी.  प्रसाद ने कहा, "अयोध्या मामला पिछले 70 सालों से लंबित है. (2010 में) इलाहाबाद उच्च न्यायालय का आदेश मंदिर के पक्ष में था, लेकिन अब यह मामला सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन है. इस मामले का जल्द निपटारा होना चाहिए." फिलहाल अब देखने वाली बात यह कोर्ट सरकार की ओर से दायर इस याचिका पर क्या कहता है.
  • देशभर में आज गणतंत्र दिवस की धूम, दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, 10 प्वाइंट में जानें क्या है खास
    आज देशभर में गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) की धूम है. भारत आज 70वां गणतंत्र दिवस (70th Republic Day) मना रहा है और आज का यह आयोजन काफी विशेष होने जा रहा है. आगामी लोकसभा चुनाव से पहले यह आखिरी सबसे बड़ा पब्लिक इवेंट होगा. इंडिया गेट पर स्थित अमर जवान ज्योति पर प्रधानमंत्री (PM Modi) द्वारा पुष्पांजलि अर्पित करने के बाद गणतंत्र दिवस की परेड की शुरूआत होगी. भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर साउथ अफ्रीका (दक्षिण अफ्रीका) के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा हैं. साउथ अफ्रीका के राष्ट्रपति को पीएम मोदी ने जी20 सम्मेलन के दौरान पिछले साल अर्जेंटिना में न्योता दिया था. गणतंत्र दिवस को देखते हुए राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गये हैं. किसी अप्रिय घटना को टाला जा सके, इसके लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस बलों की तैनाती की गई है. इतना ही नहीं, सुरक्षा एजेंसियों और सुरक्षा बलों को भी अलर्ट पर रखा गया है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मध्य दिल्ली में सामरिक रुप से महत्वपूर्ण स्थानों पर करीब 25,000 सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं.
  • लोकसभा चुनाव 2019 :  उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी के सामने खड़ी हैं 10 बड़ी चुनौतियां
    कहा जा रहा है कि समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती के साथ गठबंधन कर उत्तर प्रदेश का चुनावी गणित दुरुस्त कर दी है, मगर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के गठबंधन से बाहर रहने से ऐसा लग रहा था कि भारतीय जनता पार्टी के लिए अभी भी संभावना बची हुई है. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव के नतीजों पर मीमांसा अगर मौजूदा हालात में करें तो सपा-बसपा-कांग्रेस के एक साथ मोर्चा खोलने पर भाजपा उत्तर प्रदेश की 80 में से जहां 71 सीटों पर कब्जा जमाई थी, उससे 20 सीट कम पर सिमट सकती है. भाजपा उत्तर प्रदेश में पहले ही फूलपुर और गोरखपुर सीटें उपचुनावों में गंवा चुकी है. अगर सपा-बसपा से अलग हटकर कांग्रेस चुनाव मैदान में उतरती है और मुकाबला त्रिकोणीय होता है तो भाजपा को 38 सीटें मिल सकती हैं और उसे 33 सीटों का नुकसान हो सकता है. मौजूदा हालात में प्रियंका गांधी के आगमन से एक बार फिर देश की सबसे बड़ी आबादी वाले प्रदेश में चुनावी गणित बदल सकता है. मालूम हो कि देश में सबसे ज्यादा सांसद इसी प्रदेश से चुनकर लोकसभा पहुंचते हैं.
  • कथित EVM हैकर की प्रेस कॉन्फ्रेंस में कपिल सिब्बल की मौजूदगी, बीजेपी बोली- कांग्रेस उनसे हमेशा ऐसे काम कराती है, पूछे-10 सवाल
    अमेरिका में राजनीतिक शरण चाह रहे एक स्वयंभू भारतीय साइबर विशेषज्ञ ने सोमवार को सनसनीखेज दावा किया कि भारत में 2014 के आम चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के जरिये ‘धांधली’ हुई थी. उसका दावा है कि ईवीएम को हैक किया जा सकता है. चुनाव आयोग ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया है. वहीं भारत में बीजेपी और आम आदमी पार्टी ने जहां इस दावे को खारिज कर दिया, कांग्रेस ने कहा कि ये आरोप बेहद गंभीर हैं. स्काइप के जरिये लंदन में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए सैयद शुजा ने दावा किया कि अपनी टीम के कुछ सदस्यों के मारे जाने के बाद वह भारत से भाग गए क्योंकि उन्हें देश में अपनी जान को खतरा था. यद्यपि वह स्काइप के जरिये स्क्रीन पर सामने आए लेकिन उनका चेहरा ढंका हुआ था. शुजा ने दावा किया कि टेलीकॉम क्षेत्र की बड़ी कंपनी रिलायंस जियो ने कम फ्रीक्वेंसी के सिग्नल पाने में बीजेपी की मदद की थी ताकि ईवीएम मशीनों को हैक किया जा सके. हालांकि, उन्होंने अपने दावों के समर्थन में कोई सबूत नहीं दिया. यहां ध्यान देने की बात है कि जियो का 2014 में कोई अस्तित्व नहीं था और उसकी सेवाएं सितंबर 2016 में शुरू हुई थीं. इसी बीच केंद्रीय मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने भी पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि ईवीएम हैकिंग कार्यक्रम की पटकथा कांग्रेस ने लिखी, पार्टी के इशारे पर इस प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया. रविशंकर प्रसाद ने इस मौके पर कई अहम सवाल भी कांग्रेस से किए हैं.
  • प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन : पीएम मोदी ने राजीव गांधी के एक बयान से कांग्रेस पर साधा निशाना, 21 अहम बातें
    उत्तर प्रदेश के वाराणसी में प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन के दूसरे दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने औपचारिक उद्घाटन कर दिया है. इस मौके पर पीएम मोदी ने विदेशों में बसे भारतीयों का स्वागत किया. पीएम मोदी ने कहा, 'सबसे पहले आप सभी का बहुत-बहुत अभिनंदन, बहुत-बहुत स्वागत है. आप सभी, यहां अपनी, अपने पूर्वजों की मिट्टी की महक से खिंचे चले आए हैं. कल जिन्हें प्रवासी भारतीय सम्मान मिलने वाला है, उन्हें मैं अपनी ओर से अग्रिम शुभकामनाएं देता हूं. इसके साथ ही उन्होंने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ की तारीफ करते हुए कहा कि कुंभ और प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन का आयोजन कर दिखा दिया कि उत्तर प्रदेश किसी से कम नहीं है. पीएम मोदी ने कहा कि वह लगभग हर प्रवासी दिवस सम्मेलन में हिस्सा लिया है. उन्होंने कहा कि काशीवासियों ने इस बार प्रवासी भारतीय दिवस सम्मेलन को सरकारी कार्यक्रम नहीं बनने दिया है. ऐसा वातावरण पहले के सम्मेलन में देखने को नहीं मिला है.
  • लोकसभा चुनाव से पहले कोलकाता में 'सियासी पिच' तैयार, ममता बनर्जी की विपक्षी एकजुटता रैली आज, 10 प्वाइंट में जानें सब कुछ
    कोलकाता (Kolkata) का ब्रिगेड परेड ग्राउंड लोकसभा चुनाव के लिए सियासी पिच का गवाह बनने को तैयार है. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) की महारैली में शनिवार यानी आज न सिर्फ विपक्षी एकता की झलक दिखेगी, बल्कि केंद्र की मोदी सरकार को एक संदेश देने की भी कोशिश होगी. करीब 20 विपक्षी दलों के एक मंच पर जुटान से लोकसभा चुनाव 2019 (Lok Sabha Elections 2019) से ठीक पहले ऐसा लगने लगा है कि पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बार फिर से विपक्षी एकता की झलक देखने को मिल सकती है. इतना ही नहीं, लोकसभा चुनाव में विपक्षी दलों की क्या रणनीति होगी इसका भी खाका तैयार करने पर जोर होगी. ममता बनर्जी की कोलकाता में होने वाली ‘संयुक्त विपक्षी रैली' में विपक्षी दलों से समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव, डीएमके चीफ एमके स्टालिन, पूर्व बीजेपी नेता अरुण शौरी, शरद यादव, अरविंद केजरीवाल आदि शामिल हो सकते हैं. 
  • कर्नाटक सरकार संकट में? कांग्रेस के 5 विधायक कर सकते हैं प्रेस कॉन्फ्रेंस, 10 बड़ी बातें
    कर्नाटक में विधानसभा चुनाव के 7 महीने बाद एक बार फिर राज्य सरकार को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं. खबर है कि कांग्रेस के 5 विधायक गायब हैं. कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी 'ऑपरेशन लोटस' के तहत सरकार गिराने की कोशिश कर रही है. वहीं बीजेपी ने भी अपने सभी 14 विधायकों को गुरुग्राम के होटल में टिका दिया रखा है. अब यह अभी तक पुख्ता नहीं हो रहा है कि आखिर किसको किसका खौफ है. राज्य में 224 सीटें जिसमें 104 बीजेपी, कांग्रेस 80, जेडीएस-37, बीएसपी-01, केपीजेपी-01, निर्दलीय-01 सीटें है. कांग्रेस ने जेडीएस के साथ मिलकर सरकार बनाई थी.
  • बीएसपी-सपा के गठबंधन के बाद उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में हलचल, 8 अहम बातें
    बसपा सुप्रीमो मायावती और सपा के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शनिवार को आयोजित संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में यह घोषणा की है कि दोनों दल लोकसभा का चुनाव मिलकर लड़ेंगे. मायावती ने बसपा-सपा गठबंधन को 'नई राजनीतिक क्रांति का आगाज' करार देते हुए कहा कि इस गठबंधन से 'गुरू-चेला' (नरेंद्र मोदी और अमित शाह) की नींद उड़ जाएगी. उन्होंने कहा, 'नए वर्ष में यह एक प्रकार की नई राजनीतिक क्रांति की शुरुआत है. इस गठबंधन से समाज की बहुत उम्मीदें जग गई हैं. यह सिर्फ दो पार्टियों का मेल नहीं है बल्कि सर्वसमाज (दलित, पिछड़ा, मुस्लिम, आदिवासी, गरीबों, किसानों और नौजवानों) का मेल है. यह सामाजिक परिवर्तन का बड़ा आंदोलन बन सकता है.' यह पूछे जाने पर कि यह गठबंधन कितना लंबा चलेगा, इस पर मायावती ने कहा कि गठबंधन 'स्थायी' है. यह सिर्फ लोकसभा चुनाव तक नहीं बल्कि उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव में भी चलेगा और उसके बाद भी चलेगा. मायावती ने बसपा और सपा के 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान किया लेकिन पूर्व केंद्रीय मंत्री अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल का नाम तक नहीं लिया. उन्होंने सिर्फ इतना कहा कि दो सीटें अन्य दलों के लिए छोड़ी गई हैं.
  • सीबीआई में घूसकांड : आलोक वर्मा का इस्तीफा, राकेश अस्थाना को कोर्ट से झटका, बीते 2 दिनों में हुई 10 बड़ी बातें
    मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई निदेशक के पद पर रहे आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने के फैसले को रद्द कर दिया और कहा कि उनके इस पद पर बने रहने के फैसले पर सेलेक्ट कमेटी फैसला करेगी. सेलेक्ट कमेटी में प्रधानमंत्री मोदी, सुप्रीम कोर्ट के जज सीकरी और कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे. समिति ने 2:1 के फैसले से सीवीसी की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए आलोक वर्मा को सीबीआई से हटा दिया. के 1979 बैच के आईपीएस वर्मा का तबादला महानिदेशक दमकल सेवा, नागरिक सुरक्षा एवं गृह रक्षा के पद पर कर दिया गया था. सीबीआई निदेशक के पद पर वर्मा का दो सालों का कार्यकाल आगामी 31 जनवरी को पूरा होने वाला था. हालांकि कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे हटाने के पक्ष में नहीं थे और उन्होंने इस फैसले के खिलाफ डिसेंट नोट भी लिखा है. सीवीसी की रिपोर्ट में आलोक वर्मा के खिलाफ कई गंभीर आरोप थे. जिसमें लालू प्रसाद यादव से जुड़े आईआरसीटीसी घोटाले में एक अधिकारी को बचाने की कोशिश की और गुरुग्राम जमीन अधिग्रहण मामले में भी उनका नाम सामने आया था.
  • इसरो प्रमुख ने कहा- भारत दिसंबर 2021 तक अंतरिक्ष में भेजेगा अंतरिक्ष यात्री, 10 बड़ी बातें
    इसरो प्रमुख ने शुक्रवार को कहा कि भारत का दिसंबर 2021 तक अंतरिक्ष में मनुष्य को भेजने का लक्ष्य है. उन्होंने कहा कि हम अपने गगनयान प्रोजेक्ट की मदद से ऐसा कर पाने में सफल होंगे. अगर हम निर्धारित समय के अंदर ऐसा कर पाते हैं तो हमारा देश विश्व का चौथा ऐसा देश होगा जो अपने बल पर अंतरिक्ष यात्रियों को अंतरिक्ष में भेज सकेगा. इसरो प्रमुख के सिवन ने बताया कि भारत इस साल अप्रैल तक चंद्रयान-2 के भी लांचिंग की तैयारी में है. बता दें कि गगनयान प्रोजेक्ट की घोषणा पिछले साल पीएम मोदी ने की थी. 
  • 'SC ने बनाया, PM के पैनल ने हटाया': आलोक वर्मा की CBI से छुट्टी पर सियासी हमले तेज, 10 प्वाइंट में पूरा मामला
    सीबीआई डायरेक्टर पद से आलोक वर्मा की छुट्टी कर दी गई है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा बहाल किये जाने के मात्र दो दिन बाद आलोक वर्मा को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली एक हाई पावर सेलेक्शन कमेटी ने ने गुरुवार को एक मैराथन बैठक के बाद एक अभूतपूर्व कदम के तहत भ्रष्टाचार और कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोपों में सीबीआई निदेशक के पद से हटा दिया. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कल सेलेक्शन कमेटी की बैठक में 2:1 से ये फ़ैसला लिया गया. पैनल में मौजूद पीएम मोदी और चीफ़ जस्टिस के प्रतिनिधि के तौर पर मौजूद जस्टिस एके सीकरी वर्मा को हटाने के पक्ष में थे. वहीं पैनल के तीसरे सदस्य के तौर पर मौजूद लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे आलोक वर्मा को हटाने के विरोध में थे. उन्होंने समिति को विरोध की चिट्ठी भी सौंपी. पैनल ने पाया कि सीवीसी ने आलोक वर्मा पर गंभीर टिप्पणियां की हैं. पैनल को लगा कि आलोक वर्मा जिस तरह के संवेदनशील संस्था के प्रमुख थे, उन्होंने वैसा आचरण नहीं किया.
  • सवर्णों के आरक्षण पर संसद की मुहर: किसी ने बताया 'राजनीतिक स्टंट', तो किसी ने सवर्णों से 'धोखा', 10 खास बातें
    सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं रोजगार में 10 प्रतिशत आरक्षण देने के प्रावधान वाले ऐतिहासिक संविधान संशोधन विधेयक को बुधवार को संसद की मंजूरी मिल गयी. राज्यसभा ने करीब 10 घंटे तक चली बैठक के बाद संविधान (124 वां संशोधन), 2019 विधेयक को सात के मुकाबले 165 मतों से मंजूरी दे दी. इससे पहले सदन ने विपक्ष द्वारा लाए गए संशोधनों को मत विभाजन के बाद नामंजूर कर दिया. लोकसभा ने इस विधेयक को मंगलवाार को ही मंजूरी दी थी जहां मतदान में तीन सदस्यों ने इसके विरोध में मत दिया था. उच्च सदन में विपक्ष सहित लगभग सभी दलों ने इस विधेयक का समर्थन किया. कुछ विपक्षी दलों ने इस विधेयक को लोकसभा चुनाव से कुछ पहले लाये जाने को लेकर सरकार की मंशा तथा इस विधेयक के न्यायिक समीक्षा में टिक पाने को लेकर आशंका जतायी. हालांकि सरकार ने दावा किया कि कानून बनने के बाद यह न्यायिक समीक्षा की अग्निपरीक्षा में भी खरा उतरेगा क्योंकि इसे संविधान संशोधन के जरिये लाया गया है. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए इसे सरकार का एक ऐतिहासिक कदम बताया. 
  • आर्थिक आधार पर आरक्षण: 'लोकसभा में पास, राज्यसभा से आस', मोदी सरकार की 'अग्निपरीक्षा' आज, 10 बड़ी बातें
    लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मोदी सरकार (Modi Govt) ने बड़ा दांव खेलकर विपक्ष के चुनावी हमलों को एक तरह से कमजोर कर दिया है. मोदी सरकार ने अपने मास्टरस्ट्रोक के तहत आर्थिक तौर पर कमजोर सवर्णों (quota Bill for economically weak in general category) को सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने का फ़ैसला किया है. आर्थिक रूप से पिछड़े तबके को आरक्षण देने के लिए केंद्र सरकार ने मंगलवार को लोकसभा में संविधान संशोधन बिल पेश किया और उसे पारित भी करा लिया. बिल के समर्थन में जहां 323 वोट पड़े वहीं, विरोध में महज 3 वोट. हालांकि, राज्यसभा में आज यानी बुधवार को इस बिल को पेश किया जाएगा. राज्यसभा में इस बिल को लेकर सरकार की अग्निपरीक्षा होगी. हालांकि, लोकसभा में जिस तरह से विपक्षी पार्टियों ने अपने तेवर दिखाए, उससे नहीं लगता कि सरकार को यहां से पास कराने में खासा परेशानी होगी, मगर कांग्रेस की जेपीसी की मांग इस बिल को लटका सकती है. 
  • सवर्ण आरक्षण बिल: लोकसभा में 5 घंटे की चर्चा के दौरान नेताओं ने क्या-क्या कहा?
    सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को नौकरियों और शिक्षा में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाया गया बिल लोकसभा में पास हो गया. लगभग पांच घंटे की चर्चा के बाद यह बिल मंगलवार को लोकसभा में पास हुआ. बिल के समर्थन में 323 वोट और विरोध में महज 3 वोट पड़े. लगभग सभी दलों ने इसका पक्ष लिया, लेकिन किसी ने भी इसका खुलकर विरोध नहीं किया. राज्यसभा में बुधवार को इस बिल को पेश किया जाएगा. इस बिल के पास होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समर्थन करने वाले सभी सांसदों का धन्यवाद करते हुए कहा कि आरक्षण बिल पास होना देश के इतिहास में ऐतिहासिक पल है. हालांकि, कई सांसदों ने इस विधेयक को लेकर सरकार की नीयत पर सवाल भी खड़े किए. कांग्रेस ने कहा कि वह आर्थिक रूप से पिछड़े तबकों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण देने के लिए लाए गए विधेयक के समर्थन में है, लेकिन उसे सरकार की मंशा पर शक है. 
  • आर्थिक आधार पर आरक्षण : कौन सा दल है पक्ष में और कौन खड़ा है विपक्ष में? जानें- विस्तार से
    जनरल कैटेगरी के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा एवं सरकारी नौकरियों में 10 फीसदी आरक्षण सुनिश्चित करने वाला संविधान का 124वां संशोधन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पेश कर दिया गया. केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री थावर चंद गहलोत ने यह विधेयक पेश किया. एक दिन पहले ही केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे मंजूरी प्रदान की थी. आपको बता दें कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सामान्य श्रेणी में आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के लिए नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 10 प्रतिशत आरक्षण को सोमवार को मंजूरी दी थी.  सूत्रों के अनुसार, यह कोटा मौजूदा 50 प्रतिशत आरक्षण से अलग होगा. सामान्य वर्ग को अभी आरक्षण हासिल नहीं है.  समझा जाता है कि यह आरक्षण आर्थिक रूप से पिछड़े ऐसे गरीब लोगों को दिया जाएगा, जिन्हें अभी आरक्षण का फायदा नहीं मिल रहा है. आरक्षण का लाभ उन्हें मिलने की उम्मीद है जिनकी वार्षिक आय आठ लाख रूपये से कम होगी और 5 एकड़ तक जमीन होगी. मोदी सरकार के इस फैसले का ज्यादातर विपक्षी दलों ने स्वागत किया है, हालांकि कुछ दलों ने सरकार की मंशा पर सवाल भी खड़े किये हैं और इसे महज चुनावी स्टंट बताया है. आइये आपको बताते हैं कि आर्थिक आधार पर आरक्षण के मुद्दे पर विभिन्न राजनैतिक दलों की क्या राय है. 
  • सीबीआई चीफ आलोक वर्मा को मिली दफ्तर जाने की इजाजत, सुप्रीम कोर्ट के फैसले की 8 बड़ी बातें
    सीबीआई में रिश्वत कांड के बाद CBI चीफ आलोक वर्मा को जबरन छुट्टी पर भेजे जाने का फैसला सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि आलोक वर्मा अभी कोई नीतिगत फैसला नहीं ले सकते हैं. वह अपने दफ्तर जा सकते हैं. आपको बता दें कि सीबीआई में विवाद उस समय शुरू हुआ था जब सीबीआई के दूसरे नंबर के अधिकारी राकेश अस्थाना पर रिश्वत लेने के आरोप में एफआईआर दर्ज की गई थी. यह अपने आप में पहली बार था जब सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर पर सीबीआई ने ही केस दर्ज किया हो. लेकिन इस कार्रवाई के बाद राकेश अस्थाना ने भी चीफ पर 2 करोड़ की रिश्वत लेने का आरोप लगा दिया. यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप झेल रहे मीट कारोबारी मोइन कुरैशी से जुड़ा था. इसके बाद दोनों अधिकारियों मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए. फिलहाल इस मामले की सुनवाई अभी कोर्ट में है. आज जस्टिस संजय किशन कौल ने फैसला सुनाया है क्योंकि प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई छुट्टी पर हैं. फैसले के वक्त जस्टिस जोसेफ भी मौजूद थे. फैसला तीनों जजों की सहमति से लिखा गया है.
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