अब शरद पवार ने उड़ाई विपक्ष की नींद, मनाने के लिए सोनिया गांधी ने रवाना किए दूत : 10 खास बातें

सूत्रों के मुताबिक बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तरह शरद पवार भी राष्ट्रपति पद के लिए बीजेपी के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की ओर झुक रहे हैं...

अब शरद पवार ने उड़ाई विपक्ष की नींद, मनाने के लिए सोनिया गांधी ने रवाना किए दूत : 10 खास बातें

सोनिया गांधी ने कांग्रेस नेताओं गुलाम नबी आज़ाद तथा अहमद पटेल को शरद पवार से मुलाकात करने के लिए रवाना किया है...

नई दिल्ली: विपक्षी दलों की बैठक शुरू होने से भी पहले अब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) प्रमुख शरद पवार भी 16 पार्टियों के गठबंधन की नींदें उड़ा दे रहे हैं. सूत्रों का कहना है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की ही तरह पवार भी भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की ओर से राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की ओर झुक रहे हैं. कांग्रेस अध्यक्ष तथा बीजेपी-विरोधी मोर्चे की सूत्रधार सोनिया गांधी ने अपनी पार्टी के नेताओं गुलाम नबी आज़ाद तथा अहमद पटेल को पवार से मुलाकात करने के लिए रवाना किया है. वामनेता सीताराम येचुरी, जो विपक्ष की ओर से प्रत्याशी खड़ा किए जाने पर ज़ोर दे रहे हैं, भी शरद पवार के घर पर मौजूद हैं.

मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :

  1. राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव को अनिवार्य बताने वालों में कांग्रेस तथा वामदल प्रमुख हैं, और ऐसा प्रत्याशी खड़ा करना चाहते हैं, जिसे समूचे विपक्ष का समर्थन हासिल हो.

  2. सोनिया गांधी की अध्यक्षता में गुरुवार को ही 16 पार्टियों के बीच बैठक होनी है, जिसमें रणनीति पर विचार किया जाएगा.

  3. बीजेपी-विरोधी मोर्चे को उस समय बड़ा झटका लगा, जब नीतीश कुमार ने मोर्चे का साथ छोड़कर एनडीए प्रत्याशी रामनाथ कोविंद का समर्थन करने का ऐलान कर दिया था.

  4. 71-वर्षीय रामनाथ कोविंद दलित परिवार से आते हैं, और राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी घोषित किए जाने तक बिहार के राज्यपाल थे. नीतीश कुमार ने कहा कि वह राष्ट्रपति पद के लिए आदर्श प्रत्याशी हैं. दरअसल, मुख्यमंत्री की बिहार में जीत में दलितों का अहम योगदान रहा है.

  5. विपक्ष को बहुजन समाज पार्टी (बीएसपी) प्रमुख मायावती जैसे सहयोगियों से भी इसी तरह की चिंता है, क्योंकि वह खुद भी 'दलितों की नेता' कहलाती रही हैं, और संकेत दे चुकी हैं कि वह देश के शीर्ष पद पर पहुंचने में किसी दलित का रास्ता रोकने वाली छवि नहीं बनने देना चाहतीं.

  6. बीजेपी का मुकाबला करने के लिए विपक्ष द्वारा गुरुवार की बैठक में संभावित प्रत्याशी के रूप में दलित नेताओं के नामों पर विचार करने की संभावना है. दौड़ में शामिल नेताओं में पूर्व लोकसभाध्यक्ष मीरा कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री सुशील कुमार शिंदे (दोनों कांग्रेस के नेता) तथा 'दलितों के मसीहा' बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर के पौत्र प्रकाश अम्बेडकर प्रमुख हैं.

  7. शरद पवार को यह ध्यान रखना होगा कि केरल में सत्तारूढ़ वाम-नीत गठबंधन में उनकी पार्टी भी साझीदार है, और वामदलों द्वारा समर्थित किसी प्रत्याशी के मुकाबले बीजेपी के प्रत्याशी का समर्थन करना उनके लिए मुश्किल हो सकता है.

  8. वैसे, नीतीश कुमार के बीजेपी प्रत्याशी को समर्थन देने के फैसले से पहले से तनाव में चल रहे उनके महागठबंधन पर भी दबाव बढ़ा है, जिसमें लालू प्रसाद यादव की आरजेडी और कांग्रेस सहयोगी हैं, और दोनों ही राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव चाहती हैं.

  9. लालू प्रसाद यादव की पार्टी के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने नीतीश कुमार पर हमला बोलते हुए कहा, "विपक्ष को एकजुट होना होगा... मेरा सवाल है कि उस एकता का क्या हुआ...? उन्हें गठबंधन के हिसाब से काम करना चाहिए था, लेकिन उन्होंने वैसा नहीं किया... हम बीजेपी के खिलाफ हैं..."

  10. बीजेपी तथा उनके सहयोगियों के पास अब 60 फीसदी से भी कहीं ज़्यादा वोट हैं, क्योंकि उनके पास ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (एआईएडीएमके) के दोनों धड़ों जैसी कई क्षेत्रीय पार्टियों का समर्थन भी हासिल है, लेकिन विपक्ष चुनाव पर अड़ा है, क्योंकि उनके मुताबिक वह 'विचारधाराओं की लड़ाई' का प्रतीक होगा.



 
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