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अंतरिक्ष में 104 सैटेलाइट भेजने वाले 'रॉकेट मैन' के. सिवन बने इसरो के नये प्रमुख, 7 खास बातें

सिवन के वर्तमान में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में निदेशक हैं. वह ए एस किरण कुमार का स्थान लेंगे जिनकी नियुक्ति 12 जनवरी 2015 को हुई थी.

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अंतरिक्ष में 104 सैटेलाइट भेजने वाले 'रॉकेट मैन' के. सिवन बने इसरो के नये प्रमुख, 7 खास बातें

के सिवन बने इसरो के नये प्रमुख (फाइल फोटो)

नई दिल्ली: नये साल में इसरो को एक नया प्रमुख मिल गया है. जाने माने वैज्ञानिक और रॉकेट के स्पेशलिस्ट के सिवन को सरकार ने भारतीय अनुसंधान संगठन (इसरो) का चीफ नियुक्त किया है. उन्होंने ए एस किरण कुमार का स्थान लिया है. कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी एक आदेश के मुताबिक, मंत्रिमंडल की नियुक्ति संबंधी समिति ने अंतरिक्ष विभाग में सचिव पद और अंतरिक्ष आयोग के अध्यक्ष पद पर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दी. उनका कार्यकाल तीन वर्ष का होगा.
नये इसरो प्रमुख के सिवन के बारे में कुछ रोचक जानकारियां
  1. सिवन के वर्तमान में विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में निदेशक हैं. वह ए एस किरण कुमार का स्थान लेंगे जिनकी नियुक्ति 12 जनवरी 2015 को हुई थी. 
  2. यह के सिवन की विशेषता थी कि  इसरो को एक ही मिशन में 104 उपग्रह भेजने की क्षमता प्रदान की. इसकी बदौलत पिछले साल फरवरी में भारत ने वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया था. सैटेलाइट को कक्षा में भेजने के लिए जितने लोग तकनीक पर काम कर रहे थे, उनमें के सिवन वह प्रमुख व्यक्ति थे.
  3. के सिवन ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि 'मैं इस नियुक्ति से काफी खुश हूं क्योंकि पिछले कुछ सालों में इसरो के चेयरमैन ने काफी महान कार्य किये हैं. मैं उम्मीद करता हूं कि देश की सेवा करूंगा और इसे एक नई उंचाईयों तक लेकर जाऊंगा.'
  4. सिवन के संक्षित परिचय के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 1980 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग में स्नातक किया और वर्ष 1982 में बेंगलुरु के आईआईएससी से एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर किया है. आईआईटी बॉम्बे से उन्होंने वर्ष 2006 में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग में पीएचडी पूरी की.
  5. सिवन वर्ष 1982 में इसरो में आए और पीएसएलवी परियोजना पर उन्होंने काम किया. उन्होंने एंड टू ऐंड मिशन प्लानिंग, मिशन डिजाइन, मिशन इंटीग्रेशन ऐंड ऐनालिसिस में काफी योगदान दिया.
  6. वह इंडियन नेशनल ऐकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग, एयरोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और सिस्टम्स सोसाइटी ऑफ इंडिया में फैलो हैं. कई जर्नल में उनके पेपर प्रकाशित हुए हैं.
  7. उन्हें कई पुरस्कारों से नवाजा गया है. इसमें चेन्नई की सत्यभामा यूनिवर्सिटी से अप्रैल 2014 में मिला डॉक्टर ऑफ साइंस और वर्ष 1999 में मिला श्री हरी ओम आश्रम प्रेरित डॉ विक्रम साराभाई रिसर्च अवॉर्ड शामिल है. (इनपुट भाषा से)



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