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निजता का अधिकार भी अपने आप में संपूर्ण नहीं : सुप्रीम कोर्ट, आधार से जुड़ी सुनवाई की 10 खास बातें

संविधान पीठ में न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल, न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल हैं.

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निजता का अधिकार भी अपने आप में संपूर्ण नहीं : सुप्रीम कोर्ट, आधार से जुड़ी सुनवाई की 10 खास बातें

उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायाधीशों की संविधान पीठ 'निजता के अधिकार' पर सुनवाई कर रही है.

नई दिल्ली: उच्चतम न्यायालय की नौ न्यायधीशों की संविधान पीठ ने बुधवार को दलीलें सुननी शुरू कीं जिनके आधार पर यह तय किया जाएगा कि निजता का अधिकार संविधान के तहत मौलिक अधिकार है या नहीं. नौ न्यायधीशों की पीठ में न्यायमूर्ति जे चेलामेश्वर, न्यायमूर्ति एस ए बोबड़े, संविधान पीठ में न्यायमूर्ति आर के अग्रवाल, न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे, न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर भी शामिल हैं. यह पीठ निजता के अधिकार के सीमित मुद्दे पर विचार कर रही है, और आधार योजना को चुनौती देने वाले अन्य मुद्दों को लघु पीठ के पास ही भेजा जाएगा.
मामले से जुड़ी अहम जानकारियां :
  1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार को वाजिब प्रतिबंध लगाने से नहीं रोक नहीं सकते. क्या कोर्ट निजता की व्याख्या कर सकता है? आप यही केटेलाग नहीं बना सकते कि किन तत्वों से मिलकर प्राइवेसी बनती है.
  2. कोर्ट ने कहा कि निजता का आकार इतना बड़ा है कि ये हर मुद्दे में शामिल है. अगर हम निजता को सूचीबद्ध करने का प्रयास करेंगे तो इसके विनाशकारी परिणाम होंगे. निजता सही में स्वतंत्रता का एक सब सेक्शन है.
  3. जस्टिस डीवाई चंद्रचूड ने कहा कि अगर मैं अपनी पत्नी के साथ बेडरूम में हूं तो ये प्राइवेसी का हिस्सा है. ऐसे में पुलिस मेरे बैडरूम में नहीं घुस सकती लेकिन अगर मैं बच्चों को स्कूल भेजता हूं तो ये प्राइवेसी के तहत नहीं है क्योंकि ये राइट टू एजूकेशन के तहत आता था.
  4. उन्होंने कहा कि आप बैंक में अपनी जानकारी देते हैं, मेडिकल इंशोयरेंस और लोन के लिए अपना डाटा देते हैं. ये सब कानून द्वारा संचालित है यहां बात अधिकार की नहीं है. आज डिजिटल जमाने में डेटा प्रोटेक्शन बड़ा मुद्दा है. सरकार को डेटा प्रोटेक्शन के लिए कानून लाने का अधिकार है.
  5. वरिष्ठ अधिवक्ता गोपाल सुब्रमण्यम ने प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष बहस शुरू की और कहा कि जीने का अधिकार और स्वतंत्रता का अधिकार पहले से मौजूद नैसर्गिक अधिकार हैं.
  6. पूर्व AG सोली सोराबजी ने कहा कि संविधान में राइट टू प्राइवेसी नहीं लिखा है लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि ये है ही नहीं. दरअसल प्राइवेसी हर मानव व्यक्तित्व का अभिन्न अंग है.
  7. संविधान आर्टिकल 19 के तहत प्रेसकी आजादी का अधिकार नहीं देता बल्कि लेकिन इसे अभिव्यक्ति की आजादी को तहत देखा जाता है जिस पर कोर्ट ने भी यही माना है.
  8. श्याम दीवान ने कहा राज्यसभा में आधार बिल पेश करते हुए वित्त मंत्री अरूण जेटली ने कहा था कि प्राइवेसी शायद एक मौलिक अधिकार है.
  9. दीवान ने कहा कि जेटली ने 16-3-2016 को कहा था कि अब अब ये कहने में कि प्राइवेसी मौलिक अधिकार नहीं है या है, काफी देरी हो चुकी है. प्राइवेसी शायद एक मौलिक अधिकार है.  
  10. मामले पर सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी.

वीडियो : निजता के अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई




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