अभिनेत्री रेणुका शहाणे ने 'बेघर' इरोम शर्मिला को दिया अपने घर में रहने का न्योता

अभिनेत्री रेणुका शहाणे ने 'बेघर' इरोम शर्मिला को दिया अपने घर में रहने का न्योता

रेणुका शहाणे ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा, 'कृपया आप मेरे साथ यहां मुंबई में रह लें. यह मेरा सौभाग्य होगा.'

खास बातें

  • अनशन तोड़ने के बाद अपनों ने छोड़ा इरोम शर्मिला का साथ.
  • अस्पताल में रहने को मजबूर हुईं इरोम शर्मिला.
  • रेणुका शहाणे ने मुंबई में अपने साथ रहने का दिया न्योता.
नई दिल्ली:

मणिपुर की 'आयरन लेडी' इरोम शर्मिला ने 16 साल तक चले अपने अनशन को समाप्त कर दिया है. अनशन तोड़ते ही उन लोगों ने इरोम का साथ छोड़ दिया है जो अब तक उनके साथ खड़े होने का दावा कर रहे थे. जब वह अपने एक दोस्त के घर रहने गईं तो लोगों ने उन्हें वहां घुसने नहीं दिया, इतना ही नहीं स्थानीय इस्कॉन मंदिर ने भी उन्हें शरण देने से इंकार कर दिया. शर्मिला अब उसी अस्पताल में रह रहीं हैं जहां अनशन के दौरान वह 16 साल तक रहीं थी.

शर्मिला के पास ठिकाना नहीं होने की खबर जब अभिनेत्री रेणुका शहाणे को लगी तो उन्होंने फेसबुक के माध्यम से उन्हें अपने साथ रहने का न्यौता दे दिया. उन्होंने लिखा, 'इरोम शर्मिला यदि आपके पास ऐसी कोई जगह नहीं है जो आपको रखने को तैयार हो तो कृपया आप मेरे साथ यहां मुंबई में रह लें. यह मेरा सौभाग्य होगा. वह सारे ह्यूमन राइट्स और एंटी एफ्स्पा कार्यकर्ता जो केवल तब तक खुश थे और आपके साथ थे जब तक आपके नाक में ट्यूब लगा हुआ था या केवल तब तक जब आप अकेले पूरे साहस के साथ शासन-प्रशासन का कहर झेल रही थीं, वह इस लायक नहीं हैं कि आप उनके बारे में विचार करें. आप अब भी एफ्स्पा के खिलाफ लड़ रही हैं, अब आप यह लड़ाई उस इंसान के साथ मिलकर लड़ेंगी जिसे आपने प्यार करने के लिए चुना है और वैसे ही जैसे केवल आप कर सकती हैं.'


रेणुका शहाणे ने आगे लिखा, 'आप असहमतियों की आदी हैं. अब, वे लोग आपसे असहमत हैं जिन्हें आपने अपना समझा. यह ज्यादा मुश्किल और दर्दनाक है. साल 2000 में जब आपने अनशन शुरू किया था तब भी हर कोई आपके साथ नहीं था और आज जब आपने भूख हड़ताल खत्म की तब भी सभी आपके साथ नहीं हैं.  हर किसी ने आपके साथ इस भूख हड़ताल के नतीजे नहीं भुगते. मैं खुद को राजनैतिक रूप से इतनी समझदार नहीं समझती कि कह सकूं कि आप किन बातों के लिए आवाज उठा रही हैं और उनका असर क्या होगा. पर मैं उन सभी ताकतों के खिलाफ हूं जो अपने मतों को बलपूर्वक थोपते हैं. एक ऐसी महिला पर जिन्होंने अपने विरोध का एक तरीका चुना है, अपने चुनाव से मिली तकलीफें सही हैं, एक मित्र चुना है जो उनके करीबियों के हिसाब से उपयुक्त नहीं है और इन सबके बावजूद जो अपने चुनाव की चुनौतियों का सामना कर रही हैं.  एक महिला ही क्यों, मैं हर वयस्क व्यक्ति की चुनाव की आजादी का समर्थन करती हूं.  हमें इस 'चॉइस-शेमिंग' को रोकना होगा.'

उन्होंने आगे लिखा, 'पिछले 16 सालों से आपको जिस अस्पताल में जेल की तरह आप रहीं आज अचानक वही अस्पताल आपका घर बन गया है, सिर्फ इसलिए कि आपके साथ प्रोटेस्ट करने वाले कार्यकर्ता, आपका परिवार और आपके दोस्तों ने आपको अपने साथ रखने से मना कर दिया. यह ख्याल ही मुझे दुखी कर देता है. यह लोगों की उस फासीवादी विचारधारा की दुखद व्याख्या है जिसमें लोग इंसानों के अधिकारों के लिए लड़ते हुए नजर आते हैं. उन्हें पहले इंसान बनने की कोशिश करनी चाहिए.'



 

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