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अक्षय की फिल्म से अलग है राकेश ओमप्रकाश मेहरा की 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर'

एक मां-बेटे की कहानी है 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर' जो स्वच्छता के मुद्दों पर प्रकाश डालती है

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अक्षय की फिल्म से अलग है राकेश ओमप्रकाश मेहरा की 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर'
मुंबई:

अक्षय कुमार ने अपनी आगामी फिल्म 'टॉयलेट : एक प्रेम कथा' की घोषणा करते हुए शौचालयों के विषय पर परियोजनाओं को एक लाभदायक उद्यम बताते हुए विचार व्यक्त किया था. अब राकेश ओमप्रकाश मेहरा भी अपनी अगली फिल्म "मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर" के साथ इसी विषय को उजागर करने के लिए तैयार हैं.

राकेश मेहरा की आने वाली फिल्म 'मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर' एक मां-बेटे की कहानी है जो स्वच्छता के मुद्दों पर प्रकाश डालती है. जब से राकेश मेहरा की इस फिल्म के बारे में पता चला है तभी से एक प्रश्न सबके मन में आने लगा है कि अक्षय की फिल्म की ही तरह राकेश की फिल्म तो नहीं?

इस बात को साफ करते हुए राकेश ओमप्रकाश मेहरा ने कहा कि - "मेरी फिल्म को एक झुग्गी बस्ती में सेट किया गया है, जहां यह समस्या अधिक तीव्र है. स्वच्छता के मुद्दे के अलावा, उन स्थितियों में रहना सबसे असुरक्षित है. यह एक मां-बेटे की कहानी है जहां एक युवा लड़का प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर अनुरोध करता है कि उसकी मां के लिए एक शौचालय बनाया जाए."  

मेहरा ने बताया कि इस युवा बालक ओम की मां की भूमिका अंजलि पाटिल निभाएंगी. यह अक्षय की फिल्म की तरह कुछ भी नहीं है, जो एक प्रेम कहानी है. और यहां तक कि इस तरह के विषयों के बारे में कभी भी पर्याप्त नहीं कहा जाता है.  यह विषय देश में महिलाओं की दुर्दशा को इंगित करता है. महिला सुरक्षा एक प्रमुख चिंता का विषय है. यूनिसेफ के आंकड़ों के मुताबिक महिलाओं को शौच करने के दौरान उनके साथ दुष्कर्म किया जाता है. शहरी इलाकों में स्वच्छता की समस्या ग्रामीण इलाकों से अधिक है. ग्रामीण भारत ने सांस्कृतिक रूप से शौच के लिए अनुकूल जगह ढूंढ ली है. खेत में, रीसाइक्लिंग आसान है.


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मेहरा एनजीओ युवा फाउंडेशन के साथ मिलकर एक समाजसेवी की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. उन्होंने कहा कि "हमने महसूस किया है कि लड़कियां यौवन के बाद स्कूल आना बंद कर देती हैं. हमने फैसला किया कि बदलाव की आवश्यकता है. जब हमने पहली बार नगरपालिका विद्यालय को फिर से बनाया, तो हमने पांच लाख खर्च किए और परिणामस्वरूप लड़कियों ने वापस आना शुरू कर दिया. हमें 20 और स्कूलों के लिए दान मिला है. अब हमारे पास 1,20,00 स्वयंसेवक हैं और 2020 तक हम 5000 शौचालय स्थापित करने की योजना बना रहे हैं. इयान बॉथम एक संरक्षक के रूप में बोर्ड पर आए हैं और वरली गांव में शौचालय बनाने में हमारी मदद की है. मेरी सारी फिल्में मेरे मन के एक टुकड़े का विस्तार रही हैं, और यह भी उनमें से एक है."

ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि भले टॉयलेट एक प्रेम कथा और मेरे प्यारे प्राइम मिनिस्टर का विषय एक जैसा लग रहा हो मगर दोनों फिल्में एक-दूसरे से अलग हैं... और राकेश की फिल्म मुख्य रूप से झुग्गी झोपड़ी की जिंदगी पर केंद्रित है.



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