फिल्म रिव्यू : ज़रूर देखें काबिल-ए-तारीफ कहानी वाली 'तलवार'

फिल्म रिव्यू : ज़रूर देखें काबिल-ए-तारीफ कहानी वाली 'तलवार'

मुंबई:

इस फिल्मी फ्राइडे रिलीज़ हुई है 'तलवार', जिसे निर्देशित किया है मशहूर लेखक और फिल्मकार गुलज़ार की बेटी मेघना ने और इसे लिखा है फिल्मकार विशाल भारद्वाज ने। मुख्य किरदारों में दिखे हैं नीरज काबी, कोंकणा सेन, इरफान खान, तब्बू, आयशा परवीन और गजराज राव। फिल्म वर्ष 2008 में नोएडा में हुए आरुषि-हेमराज हत्याकांड पर आधारित है। सच्ची घटनाओं पर आधारित फिल्मों को बनाना फिल्मकारों के लिए चुनौती से कम नहीं होता, क्योंकि कहानी का बड़ा हिस्सा लोगों को मालूम होता है और डर बना रहता है कि दर्शक रुचि खो न दें।

इसके अलावा सच्ची घटनाओं की जब तक मुकम्मल तस्वीर सामने नहीं आती, उन्हें पर्दे पर उतारने में कानूनी कठिनाइयां भी पेश आती हैं। ऐसे में कई कहानियां वास्तविकता से कोसों दूर महज़ दो घंटे के ड्रामे के तौर पर पेश की जाती हैं, लेकिन 'तलवार' को देखकर मेघना गुलज़ार और विशाल भारद्वाज की तारीफ करना ज़रूरी है, जिन्होंने विषय की अहमियत और संवेदनशीलता समझते हुए उसे न सिर्फ वास्तविक रखा, बल्कि बेहद खूबसूरती से कहानी को अंजाम दिया।

यह कहानी पर्दे पर जिस तरह बयां की गई, वह वाकई काबिल-ए-तारीफ है। फिल्म में हर एक का नज़रिया है, फिर चाहे वह पुलिस हो, माता-पिता हों या सीबीआई। इसके अलावा 'तलवार' में सिर्फ उतनी ही कहानी नहीं दिखती, जितनी आपको न्यूज़ चैनलों ने दिखाई। केस से जुड़े कई और पहलू भी आपको पर्दे पर नज़र आएंगे, यानी दर्शक बोर नहीं होंगे।

इस फिल्म में एक क्लाइमैक्स है, और उसके बाद एक और क्लाइमैक्स है। पहले क्लाइमैक्स के बाद कहानी से रुचि कम होने लगती है, लेकिन जब फाइनल क्लाइमैक्स आता है, दर्शकों के मुंह खुले रह जाते हैं!

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फिल्म में कमियों को देखें तो सिर्फ यह कहा जा सकता है कि फाइनल क्लाइमैक्स किसी और रास्ते से होकर अंजाम तक पहुंचता तो दर्शकों को गर्दन घुमाने का मौका भी नहीं मिलता। साथ ही, फिल्म में बार-बार दोहराए गए लोगों के नज़रिये कहानी को बेवजह खींचते महसूस होते हैं और उन दर्शकों को फिल्म धीमी लगेगी, जिन्हें फिल्मों में रफ्तार और मनोरंजन की तलाश रहती है। लेकिन चूंकि 'तलवार' मुझे अच्छी लगी, सो, मुझ जैसों को पसंद आएगी। फिल्म में तब्बू के किरदार की ज़रूरत समझ नहीं आई, लेकिन फिर लगा, शायद फिल्मकार तब्बू और इरफान के किरदारों के रिश्ते के जरिये इरफान के किरदार की संवेदनशीलता सिद्ध करना चाहते हों।

सभी किरदारों का काम कमाल का है, और फिल्म में खासकर इरफान और कोंकणा सेन का बेहतरीन अभिनय है। फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर ड्रामे से दूर रखते हुए कहानी की मदद करता है। आरुषि हत्याकांड से जुड़े कई नज़रिये आपके सामने पेश हुए होंगे, लेकिन एक नज़रिया इस फिल्म का भी है, ज़रूर देखिए... मेरी ओर से फिल्म की रेटिंग है - 3.5 स्टार...