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फिल्म रिव्यू: शराफत गई तेल लेने

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फिल्म रिव्यू: शराफत गई तेल लेने
फिल्म 'शराफत गई तेल लेने' एक सीधे-सादे मिडल क्लास लड़के पृथ्वी चौहान की कहानी है जो अपनी नौकरी और दुनिया में खुश है। उसके बैंक अकाउंट में 5 हजार रुपए थे लेकिन अचानक एक दिन अकाउंट में बैलेंस बढ़कर 100 करोड़ रुपए हो जाता है। पूरी फिल्म इस बदलाव के बाद की कहानी बयान करती है।

पृथ्वी चौहान के किरदार से परदे पर वापसी कर रहे हैं ज़ायेद खान। इस फिल्म में बड़े ही हल्के फुल्के अंदाज से मनी लॉन्ड्रिंग और पैसों का हवाला दिखाया गया है। फिल्म में दिखाने की कोशिश की है कि किस तरह काला धन एक जगह से दूसरे जगह पहुंचाया जाता है या पहुंचाया जा सकता है।

फिल्म में यह भी दिखाया गया है कि किस तरह दाऊद का नाम इस्तेमाल करके आम आदमी भी अपना डर फैला सकता है या किस तरह दाऊद का नाम सुनकर आम आदमी डर जाता है। और मजेदार बात यह है कि यह सब कुछ मजाकिया अंदाज़ में कहा गए हैं। फ़िल्म का पेस अच्छा है। कहीं कहीं फिल्म हंसाती है। मासूम पृथ्वी चौहान के रोल में ज़ायेद खान खूब जमे हैं। रणविजय और टीना देसाई ने भी अच्छा काम किया है।

मेरी नजर में यह एक लाइट हार्टेड फिल्म है जिसे आप एक बार तो देख ही सकते हैं। इसलिए इस फिल्म के लिए मेरी रेटिंग है 3 स्टार।


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