फिल्म समीक्षा : दिल को छू लेगी इमोशन से भरी फिल्म 'ट्रैफिक'

फिल्म समीक्षा : दिल को छू लेगी इमोशन से भरी फिल्म 'ट्रैफिक'

मुंबई:

फ़िल्म 'ट्रैफिक' की कहानी है एक सुपरस्टार की बेटी की, जिसे दिल की बीमारी है और एक लड़के की, जो सड़क दुर्घटना के बाद ब्रेन डेड की हालत में है, मगर उसका दिल धड़क रहा है। इस लड़के के दिल को उस सुपरस्टार की बेटी के सीने में ट्रांस प्लांट के लिए मुम्बई से पुणे तक का सफर जल्द से जल्द तय करना है। इस चुनौती को स्वीकार करता है एक ट्रैफिक हवलदार रामदास गोडबोले जिस पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

सच्ची घटना से प्रेरित है यह फिल्म
यह फ़िल्म सच्ची कहानी से प्रेरित है जिसमें 2009 में चेन्नई के हॉस्पिटल में ऐसे ही एक हार्ट ट्रांस प्लांट को अंजाम दिया गया था। उस लड़की की जान बचाने में उसमें उस ट्रैफिक हवलदार की बड़ी भूमिका थी। इस कहानी को 2011 में फिल्मी परदे पर निर्देशक राजेश पिल्लई ने मलयाली भाषा में उतारा था और अब हिन्दी भाषा में भी राजेश पिल्लई ने ही इस फिल्म का निर्देशन किया है।

किरदारों को अच्छे से पिरोया है
फ़िल्म 'ट्रैफिक' की कहानी कई किरदारों में बंटी है और सबकी कहानियां एक साथ चलती रहती हैं मगर इन सबके बावजूद फ़िल्म में अच्छा थ्रिल है। फ़िल्म अपना पेस नहीं खोती और इन सभी किरदारों को अच्छे से पिरोया गया है। फ़िल्म के कुछ इमोशनल सीन दिल को छूते हैं। सभी किरदारों ने अपने-अपने किरदारों के साथ अच्छा इंसाफ किया है।

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फिल्म की कहानी से थोड़ा भटके
फिल्म के बीच में कुछ सीन्स ने मेरे दिमाग में सवालिया निशान लगाये मगर जब मैंने लेखक और निर्देशक के नज़रिये से देखा तब लगा कि फिल्म में सस्पेंस और थ्रिल के लिए शायद ये ज़रूरी था। फिर भी कहीं न कहीं फ़िल्म की कहानी से फोकस थोड़ा हटा है।

मैं यह कह सकता हूं कि फ़िल्म 'ट्रैफिक' की कहानी ने इमोशन और रफ़्तार को पकड़ा है। मनोज बाजपेयी ने बेहतरीन तरीके से अपने किरदार को जिया है। फ़िल्म के लिए मेरी रेटिंग है 3 स्टार।