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भारत में सिर्फ एक हफ्ते में ड्राइविंग लाइसेंस मिल जाता है, यह गलत है : अमिताभ बच्चन

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अमिताभ बच्चन का फाइल चित्र

ठाणे : बॉलीवुड के सुपरस्टार अमिताभ बच्चन ने भारत में एक सप्ताह के भीतर ही ड्राइविंग लाइसेंस दे दिए जाने की व्यवस्था पर अंगुली उठाई है। उनका कहना है कि लाइसेंस दिए जाने वाले नियमों में बदलाव ज़रूरी है। उनके मुताबिक, जिस तरह विदेशों में नियम-कानून सीखने और पूरी ट्रेनिंग तथा परीक्षा देने के बाद ही लाइसेंस दिया जाता है, वैसा ही भारत में भी किया जाना चाहिए।

ठाणे शहर ट्रैफिक पुलिस की तरफ से सड़क सुरक्षा सप्ताह के समापन के अवसर पर शुक्रवार को आयोजित कार्यक्रम में अमिताभ बच्चन ने प्रमुख अतिथि के रूप में कहा कि महाराष्ट्र से उन्हें सम्मान, प्रतिष्ठा, नाम, शोहरत, पैसा सब कुछ मिला है, इसलिए अगर उन्हें राज्य में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने के लिए ब्रांड एम्बैसेडर बनने का मौका मिला, तो वह खुद को सम्मानित महसूस करेंगे।

अमिताभ बच्चन ने यह भी कहा कि अगर वह गुजरात के लिए पर्यटन का प्रचार कर सकते हैं, तो महाराष्ट्र में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर लगाम लगाने के लिए भी काम कर सकते हैं।

अमिताभ बच्चन का कहना था कि लोगों द्वारा सड़क के नियम-कानूनों को पालन किया गया तो अपने आप सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी। इसके बाद उन्होंने खुद के द्वारा गाड़ी चलाते समय सभी नियमों का पालन किए जाने की बात बी लोगों से कही।

इस दौरान अमिताभ ने गत शुक्रवार को मनाए गए मराठी दिवस के अवसर पर मराठी न बोल सकने पर लोगों से क्षमा मांगते हुए कहा कि जब तक भाषा का पूरा ज्ञान नहीं हो जाता और उसे बोलना नहीं आ जाता, तब तक भाषा को सार्वजनिक स्थानों पर बोलना भाषा का अपमान है। उन्होंने बताया कि वह मराठी सीख रहे हैं।

अमिताभ ने ठाणे के नागरिकों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए कुछ टिप्स भी दिए और अपील की कि सभी लोग नियमों का पालन करते हुए अनुशासन सीखें। अमिताभ ने कहा कि प्रत्येक इंसान को अपने मन में यह ठान लेना ज़रूरी है कि वह न खुद नियम तोड़ेगा और न किसी दूसरे को तोड़ने देगा। अमिताभ बच्चन ने कहा कि राज्य सरकार और पुलिस विभाग यदि उन्हें दिन-ब-दिन बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम और उपाय-योजनाओं के लिए आमंत्रित करता है, तो वह साथ देने के लिए तैयार हैं।

मराठी दिवस पर ठाणे आए अमिताभ बच्चन ने महाराष्ट्र की गरिमा का बखान करते हुए कहा कि आज मैं जो भी हूं, वह महाराष्ट्र की इस पावन भूमि की देन है। उनका कहना था कि अपनी कमाई का पहला घर उन्होंने महाराष्ट्र में ही खरीदा था। महाराष्ट्र ने उन्हें पत्नी, बेटा-बेटी, बहू-दामाद, नाती और पोता सब कुछ दिया है।

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