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शाहरुख खान और शिमला में टैक्सी चलाने वाले पंजाब सिंह का क्या लेना देना...

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शाहरुख खान और शिमला में टैक्सी चलाने वाले पंजाब सिंह का क्या लेना देना...

पंजाब सिंह शिमला में टैक्सी चलाते हैं

2 नवंबर को शाहरुख खान का जन्मदिन है और दुनिया भर में फैले उनके चाहने वाले इस मौके पर चुप कहां बैठने वाले हैं। समाचार चैनल से लेकर अखबार, वेबसाइट और रेडियो किसी के लिए भी इस लोकप्रिय सितारे के जन्मदिन को नज़र अंदाज़ करना मुश्किल है। शाहरुख के घर के बाहर फैन्स का जमावड़ा लगना और खान का उन्हें हाथ हिलाकर शुक्रिया अदा करना भी कोई नई बात नहीं है। इन सबके बीच मुमकिन है कि इस सुपरस्टार से जुड़ी खबरें बाकियों के साथ साथ शिमला की सड़को पर टैक्सी चलाने वाले पंजाब सिंह के कानों में भी पड़े। वो बातें जिसे सुनकर पंजाब सिंह उस अतीत में खो जाए जिसका एक अहम हिस्सा कभी शाहरुख खान हुआ करते थे।

16 साल से शिमला और उसके आसपास के इलाके में टैक्सी चलाने वाले पंजाब सिंह की जिंदगी में एक दौर ऐसा था जब शाहरुख खान से उनका रोज़ का नाता था। शाहरुख का पहला सीरियल ‘दिल दरिया’ था और उस दौरान पंजाब सिंह को इस नवोदित कलाकार को काफी करीब से जानने का मौका मिला। फर्श से अर्श तक पहुंचने वाले इस नाम के बारे में बात करते हुए पंजाब सिंह मानो अपनी अतीत को फिर से जीने लगते हैं।

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किस तरह दिल्ली के सफदरजंग मकबरे के पास शाहरुख का एक रेस्त्रां था जहां पंजाब सिंह ने भविष्य के इस सुपरस्टार को कैश काउंटर पर बैठे हुए पहली बार देखा था। उस वक्त पंजाब ‘दिल दरिया’ के निर्माता रजनीश सहाय के लिए गाड़ी चलाने का काम करते थे और शिमला आने से पहले तक वह उनके साथ ही काम कर रहे थे। उस दिन भी पंजाब अपने ‘सर जी’ रजनीश और लेख टंडन (‘दिल दरिया’ और ‘दूसरा केवल’ के निर्देशक) को लेकर सफदरजंग के पास वाले रेस्त्रां में गए थे जहां अक्सर युवाओं का जमावड़ा लगा रहता था।

'जी जनाब फरमाएं...'

पंजाब की माने तो रजनीश और लेख टंडन अपने नए सीरियल ‘दिल दरिया’ के लिए एक नए चेहरे की तलाश में थे और यहीं पर उनकी मुलाकात शाहरुख खान से भी हुई थी। पंजाब को याद है शाहरुख का ‘जी जनाब फरमाएं’ कहना और निर्देशक लेख टंडन का खान से बातचीत करके उन्हें अगले दिन ऑडिशन के लिए बुलाना जिसके बाद शुरु हुआ दिल्ली के इस आम लड़के का एक ख़ास सफर।

शाहरुख के शुरुआती टीवी सिरियल 'फौजी' का एक दृश्य
 
शाहरुख खान को ‘दिल दरिया’ के लिए मुख्य रोल में चुन लिया गया और पंजाब सिंह का काम हो गया शाहरुख को रोज़ उनके नीति बाग स्थित घर से पिक करना और शूटिंग सेट पर ले जाना। उन दिनों की बात करते हुए पंजाब को शाहरुख की मां भी याद आती हैं जो अक्सर दरवाज़ा खोलती थी और चाय पीए बगैर उन्हें जाने नहीं देती थी। पंजाब सिंह को याद है वो वैन जो शाहरुख के पास हुआ करती थी जिसे कई बार उस वक्त उनकी दोस्त और (अब पत्नी) गौरी भी चलाया करती थीं।

शाहरुख की सादगी और हाथ मे आए इस सुनहरे मौके की कद्र करने के रवैये को पंजाब सिंह आज भी नहीं भूल पाए हैं। उनकी माने तो ज़मीन से जुड़े शाहरुख के अंदर सीखने की जो ललक थी, उसके बाद तो वे वाकई में इस कामयाबी के 'लायक' हैं। शाहरुख की सिगरेट पीने की आदत के बारे में तो उनके कई प्रशंसक वाकिफ हैं लेकिन पंजाब सिंह को तो अपने इस हीरो का वो ‘क्लासिक’ ब्रैंड भी याद है जिसके बगैर उनका काम नहीं चल पाता था।

'शाहरुख से जलन..'
 
लेकिन इस तस्वीर का एक और पहलू भी है जो कभी कभार पंजाब सिंह को थोड़ा परेशान भी कर देता है। बड़ी ईमानदारी से अपने दिल की बात जाहिर करते हुए पंजाब कहते हैं कि कभी कभी उन्हें शाहरुख खान की कामयाबी से थोड़ी सी जलन भी होती है। कुछ नहीं से बहुत कुछ बनने वाले किस भी शख्स की कामयाबी लोगों को हैरत में डाल ही देती है, फिर पंजाब सिंह ने तो खान को तब देखा था जब वे दिल्ली में एक रेस्त्रां चलाते थे, जब वे दिल्ली के एक आम लड़के थे जो हाथ में आए इस ब्रेक को ज़ाया नहीं करने देना चाहते थे। ऐसे में पंजाब के मन में ऐसी भावना का आना काफी स्वाभाविक सी बात लगती है।

हालांकि पंजाब को अपने 'शाहरुख जी' की कामयाबी पर फक्र भी है और इस बात की खुशी भी कि कहीं न कहीं वे इस सुपरस्टार के सफर का हिस्सा भी हैं। पंजाब सिंह में शायद आपको 'बिल्लू' फिल्म का वो नायक दिखाई दे जिसकी एक सुपरस्टार को जानने की कहानियां किसी के लिए शिमला से कालका जी तक के सफर का टाइम पास है तो किसी के लिए महज़ एक किस्सा। पंजाब सिंह एक तरफ अपने मन को समझा चुका है कि शाहरुख उसे कबका भूल चुके होंगे लेकिन कहीं ना कहीं अपने मन के किसी कोने में उसे शाहरुख से दोबारा मिलने की उम्मीद भी है।

हो सकता है कभी शिमला में छुट्टियां बिताने के दौरान आपकी मुलाकात भी पंजाब सिंह से हो जाए और अपने चहेते हीरो की वो बातें आपको मालूम चलें जो शायद अब शाहरुख खान के ज़हन में भी नहीं बची हों। हर तरफ शाहरुख हैं कभी टीवी पर दिखते हैं तो कभी अखबारों के पन्नों पर और कभी चाय की दुकान पर चलने वाली चर्चाओं में उनका ज़िक्र हो जाता है। शाहरुख  जिन्हें देखकर कभी पंजाब को अपनी किस्मत पर गुस्सा आता है तो कभी उनकी कामयाबी देखकर हौंसला मिलता है। शाहरुख जैसे पंजाब सिंह के जीवन का स्थायी भाव बन गए हैं।

(पंजाब सिंह से बातचीत पर आधारित)


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