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'मिर्जा जूलियट' फिल्‍म रिव्‍यू: अल्‍हड़ प्‍यार की कहानी लेकिन भटकावों से भरी

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'मिर्जा जूलियट' फिल्‍म रिव्‍यू: अल्‍हड़ प्‍यार की कहानी लेकिन भटकावों से भरी
नई दिल्‍ली: फिल्म 'मिर्जा जूलियट' की कहानी है मिर्जा और जूली शुक्ला की जिनके बीच कभी राजनीति आती है, कभी धर्म आता है तो कभी जूली का भोलापन. फिल्म की कहानी उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर और इलाहबाद में घूमती है. फिल्म की अच्छाइयों की अगर बात करें तो इसकी कहानी, झगड़े, हाव भाव देखकर लगता है कि हम किसी छोटे शहर को बहुत नज़दीक से देख रहे हैं. फिल्म की सिनेमाटोग्राफी अच्छी है जिसने अच्छे दृश्यों को कैमेरे में कैद किया है. जूली शुक्ला की भूमिका में पिया वाजपेयी काफी अच्‍छी लगी हैं. जुनून से भरे आशिक मिर्जा की भूमिका दर्शन कुमार ने काफी अच्छे से निभाई है. प्रियांशु चटर्जी और स्वानंद किरकिरे ने अपने अपने किरदारों को ठीक से निभाया है. फिल्म के 2 गाने भी अच्छे हैं.

'मिर्जा जूलियट' की कमियों की बात करें तो सबसे पहले बात आयेगी कहानी की जो काफी कमजोर पड़ गई. फिल्‍म की पटकथा काफी भटकी हुई लगी. कई दृश्य ऐसे लगे जो हम सैकड़ों बार किसी न किसी प्रेम कहानी में देख चुके हैं. फिल्म का क्लाइमेक्स भी दमदार नहीं था और यह काफी भटवाक भरा लगा. आखिर में यह समझ ही नहीं आया कि फिल्म क्या कहने की कोशिश कर रही है. फिल्‍म का संदेश क्‍या था, प्‍यार का कोई धर्म नहीं होता या राजनीति में कोई रिश्ते अहमियत नहीं रखते?, यह कुछ साफ नहीं था.

फिल्म 'मिर्जा जूलियट' में प्यार का अल्हड़पन और जुनून अच्छा है साथ ही फिल्म ने कई बार ये भी बताने की कोशिश की है कि आज भी महिलाएं केवल एक वस्तू की तरह हैं. इस फिल्म को हमारी तरफ से रेटिंग दी जाती है 2 स्टार.



 


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