Movie Review: जेल की कैद से सुपरस्‍टार बनने का सफर है 'कैदी बैंड'

'कैदी बैंड' की कहानी 5 अंडरट्रायल कैदियों की है जो स्वतंत्रता दिवस पर परफॉर्म करने के लिए एक बैंड बनाते हैं. ये कैदी स्वतंत्रता दिवस के लिए एक खास गाना तैयार करते हैं और वो गाना सोशल मीडिया के माध्यम से खूब लोकप्रिय हो जाता है.

Movie Review: जेल की कैद से सुपरस्‍टार बनने का सफर है 'कैदी बैंड'

'कैदी बैंड' आज रिलीज हो चुकी है.

खास बातें

  • 'कैदी बैंड' में अंडरट्रायल कैदियों की कहानी हुई है बयां
  • आदर जैन और आन्‍या सिंह ने प‍हली फिल्‍म में की बढ़‍िया एक्टिंग
  • इस फिल्‍म को हमारी तरफ से मिलते हैं 3 स्‍टार
नई दिल्‍ली:

डायरेक्‍टर : हबीब फैसल
कास्‍ट : आदर जैन, आन्‍या सिंह, सचिन पिलगांवकर, प्रिंस परविंदर सिंह
रेटिंग : 3 स्‍टार

यश राज बैनर की फिल्‍म 'कैदी बैंड' आज रिलीज हो चुकी है और यह फिल्‍म बॉलीवुड में दो एक्‍टर्स लेकर आ रही है. इस फिल्‍म से कपूर खानदान का एक और चिराग फिल्‍मों में कदम रख रहा है और आज का शुक्रवार इन दोनों ही सितारों के लिए काफी अहम है. इस फिल्‍म से राज कपूर के नाती आदर जैन फिल्‍मों में एंट्री कर रहे हैं. उनके साथ नए एक्‍ट्रेस आन्‍या सिंह भी नजर आने वाली हैं. कहानी की बात करें तो फिल्‍म 'कैदी बैंड' की कहानी 5 अंडरट्रायल कैदियों की है जो स्वतंत्रता दिवस पर परफॉर्म करने के लिए एक बैंड बनाते हैं. ये कैदी स्वतंत्रता दिवस के लिए एक खास गाना तैयार करते हैं और वो गाना सोशल मीडिया के माध्यम से खूब लोकप्रिय हो जाता है. इसी के साथ ये कैदी स्टार बन जाते हैं और यहां से शुरू होती है जेल से आजादी की लड़ाई.

 
qaidi band

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लेखक और निर्देशक हबीब फैसल की फिल्‍म 'कैदी बैंड' का विषय अच्छा है. यह फिल्‍म देश के उन कैदियों की बात करती है जो दोषी करार दिए जाने से पहले ही सालों जेल में कैद होते हैं, यानी अंडरट्रायल कैदी. फिल्‍म के कई सीन दिल को छू जाते हैं. खास तौर से आतंकवाद के आरोप लिए एक बेगुनाह कैदी से हर महीने उसकी बीवी और बेटी जेल में मिलने आती हैं. फिल्‍म में बेल मिलने की टूटती उम्‍मीद और बेल मिलने पर जमानत की मोटी रकम न दे पाने पर फिर से जेल जाना जैसी कई चीजें दिखाई गई हैं. इस फिल्‍म का पेस भी ठीक है. 'कैदी बैंड' से आदर जैन डेब्यू कर रहे हैं और उन्होंने अपने किरदार को अच्छे से निभाया है. अन्या सिंह की भी ये पहली फिल्म है और उन्होंने अपने अभिनय की अच्छी छाप छोड़ी है. उनके अभिनय में कैदी का दर्द नजर आता है. सपोर्टिंग कास्ट ने भी अच्छा अभिनय किया है.

 
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फिल्‍म की खामियों की अगर बात करें तो इसका विषय तो अच्छा है लेकिन कहानी थोड़ी कमजोर पड़ गई. फिल्‍म कैदियों का दर्द तो बयान करती है मगर कई जगह कहानी रुकने लगती है. इंटरवेल के बाद का हिस्‍सा थोड़ा लंबा लगने लगता है और थोड़ा ड्रामेटिक भी. फिल्‍म का म्यूजिक भी कुछ खास छाप नहीं छोड़ता. सिर्फ एक गाना ' आई एम इंडिया'  थोड़ा ठीक लगता है या याद रहने वाला है.

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'कैदी बैंड' सच्ची घटनाओं से प्रेरित है जो अपने पहले सीन में माचन लाल की कहानी कहती है जिसका जुर्म अगर साबित होता तो भी ज्‍यादा से ज्‍यादा 10 साल की सजा होती. लेकिन वो इंसान 54 साल तक जेल में बंद रहा और 54 साल बाद वह निर्दोष साबित हुआ. 'कैदी बैंड' जेल में कैद कैदियों की छोटी-छोटी आजादी और ख्वाहिशों के बारे में बताती है. यह फिल्‍म एक अच्छे मुद्दे पर रोशनी डालती है इसलिए इस फिल्‍म के लिए रेटिंग है 3 स्टार.

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