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Movie Review: इतिहास और देशभक्ति की कहानी कहती 'राग देश'

राग देश' में सबसे अच्छी बात है इसकी कास्टिंग, जो परफेक्ट लगती है. अमित साध, कुणाल कपूर, और मोहित मारवाह ने अपने अपने किरदारों के साथ पूरा इंसाफ किया है.

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Movie Review: इतिहास और देशभक्ति की कहानी कहती 'राग देश'

फिल्‍म 'राग देश' का एक सीन.

खास बातें

  1. इस फिल्‍म की कहानी आजाद हिन्द फौज के तीन जवान की है
  2. फिल्‍म में कुणाल, अमित और मोहित का काम अच्‍छा है
  3. इस फिल्‍म को हमारी तरफ से मिलते हैं 2.5 स्‍टार
नई दिल्‍ली: इस शुक्रवार रिलीज हुई फिल्म 'राग देश' की कहानी इर्द गिर्द घूमती है साल 1945 में आजाद हिन्द फौज के तीन जवान और ब्रिटिश शासन के. फिल्म में ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तीन जवानों, शहनवाज खान, गुरबक्श सिंह ढिल्लन और कर्नल प्रेम सहगल के ऊपर देशद्रोह और हत्या का आरोप लगाकर मुकदमा चलाया जाता है, क्योंकि इन तीन जवानों ने दूसरे विश्‍वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश इंडियन आर्मी छोड़कर आई एन ए यानी नेताजी सुभाष चंद्र बोस की इंडियन नेशनल आर्मी को जॉइन कर लिया था. जवानों की तरफ से इस केस को भुलाबाई देसाई लड़ते हैं. कैप्‍टन शाहनवाज खान की भूमिका में हैं कुणाल कपूर, कैप्‍टन गुरबख्श सिंह ढिल्लों का किरदार निभाया है अमित साध ने और कर्नल प्रेम सहगल के रोल में हैं मोहित मारवाह.
 
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निर्देशक तिग्मांशु धुलिया की 'राग देश' इतिहास के पन्‍नों को खोलती है और दर्शाती है कि किस तरह द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार ने ब्रिटिश इंडियन आर्मी के जवानों को जापान के सामने परोस दिया था. किस तरह नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने देश कि आजादी के लिए आजाद हिंदी फौज का गठन किया था और सबसे महत्वपूर्ण यह कि किस तरह देश के इन तीन सिपाहियों का मुकदमा लड़ा गया था. इसमें भारत की सम्पूर्ण आजादी से पहले हुई घटनाओं और वाकयों को दर्शाने की अच्छी कोशिश की गई है.

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'राग देश' में सबसे अच्छी बात है इसकी कास्टिंग, जो परफेक्ट लगती है. अमित साध, कुणाल कपूर, और मोहित मारवाह ने अपने अपने किरदारों के साथ पूरा इंसाफ किया है और तीनों उस दौर के देश के सिपाही की तरह ही पर्दे पर नजर आते हैं. फिल्म में अंग्रेजी, तमिल या पंजाबी जैसी अलग-अलग भाषाओं का इस्‍तेमाल किया गया है जो इस फिल्‍म को और भी ऑथेंटिक बनाती है.
 
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फिल्म 'राग देश' का पहला हिस्सा कसा हुआ नजर आता है, लेकिन इंटरवेल के बाद का हिस्‍सा थोड़ा बिखरता सा लगता है और ऐसा लगने लगता है कि कहानी लम्बी हो रही है. फिल्म कि सबसे बड़ी प्रॉब्लम है इसका नरेशन और एडिटिंग. फ्लैशबैक और आज में कई जगह काफी घालमेल और कंफ्यूजन नजर आता है. फिल्म को बहुत ही ध्यान लगाकर देखना पड़ता है. अगर थोड़ा भी ध्यान हटेगा तो कहानी समझ नहीं आएगी.


तिग्मांशु धुलिया का कहानी कहने का अपना अंदाज है मगर उन्हें भी यह सोचना चाहिए कि कहानी को आसान बनाकर कहा जाए तो आम आदमी भी उसे आसानी से समझ सकेगा. अगर आपको इतिहास में रुचि है तो आप इस फिल्म को एक बार देख सकते हैं और अगर इतिहास कि जानकारी है तो इसे आसानी से समझ भी सकते हैं. फिल्म 'राग देश' के लिए मेरी रेटिंग है 2.5 स्टार.

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